इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में बारिश के कारण नतीजा नहीं निकला। फिर भी यह मैच भारतीय टीम के लिए कई बड़े सवाल खड़े कर गया। अचानक से संजू सैमसन और इशान किशन का फॉर्म तो डगमगाया ही, साथ ही उपकप्तान तिलक वर्मा की बैटिंग तकनीक फिर से सवालों के घेरे में आ गए। चेस्टर ली स्ट्रीट में तिलक वर्मा की 13 गेंदों में 13 रन की पारी ने टीम इंडिया के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या तिलक वर्मा वाकई टी20 में नंबर-5 की भूमिका के लिए फिट हैं?
उस मुकाबले (पहले टी20) की बात करें तो जब तिलक वर्मा बल्लेबाजी के लिए आए, तब भारत ने 8.2 ओवर में 88 रन पर 3 विकेट गंवा दिए थे। उस समय रन रेट 10.73 के ऊपर था और टीम बड़े स्कोर की ओर बढ़ती दिख रही थी। अगले कुछ ओवर में रनों बनने की रफ्तार धीमी पड़ गई। तिलक ने 13 गेंदों में सिर्फ 13 रन बनाए और जब तक वह आउट हुए, भारत का रन रेट 9.25 तक गिर चुका था। आखिर में शिवम दुबे की तेज बल्लेबाजी ने भारत को गति दी और स्कोर 189 तक पहुंचाया।
हालांकि इस धीमी पारी के लिए पूरी तरह तिलक को दोष देना भी सही नहीं होगा। 23 वर्षीय तिलक वर्मा को टीम इंडिया लगातार अलग-अलग भूमिकाओं में इस्तेमाल कर रही है। अब वह टी20 स्क्वाड के उपकप्तान हैं। उन्होंने अब तक टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नंबर-3 से लेकर नंबर-7 तक लगभग हर पोजिशन पर बल्लेबाजी की है। यानी जहां टीम को जरूरत होती है, तिलक को वहीं भेज दिया जाता है।
तिलक वर्मा के टी20 इंटरनेशनल करियर के आंकड़ों की बात करें तो 52 मैचों में उनका स्ट्राइक रेट करीब 143 और औसत 43 से ज्यादा है। लेकिन एक कमजोरी ऐसी है, जो बार-बार सामने आ रही है और विरोधी टीमें उसका पूरा फायदा भी उठा रही हैं।
क्या है तिलक वर्मा की कमजोरी?
वह कमजोरी है स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ तिलक वर्मा की बल्लेबाजी। इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने भी यही रणनीति अपनाई। पहले टी20 में जैसे ही तिलक क्रीज पर आए, उन्होंने आदिल रशीद, लियाम डॉसन और विल जैक्स जैसे स्पिनरों को गेंद थमा दी। नतीजा वही निकला जिसकी उम्मीद थी। तिलक रन बनाने के लिए संघर्ष करते नजर आए और भारत की पारी की रफ्तार धीमी हो गई और रन रेट गिर गया।
आंकड़े भी तिलक की इस कमजोरी को बताते हैं। टी20 इंटरनेशनल में जहां तिलक का ओवरऑल स्ट्राइक रेट करीब 143 का है, वहीं स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ यह गिरकर लगभग 126 हो जाता है। कई पारियों में तो उनका स्ट्राइक रेट 100 के आसपास ही रहा है। यही वजह है कि आईपीएल में भी विरोधी टीमें उनके खिलाफ शुरुआत से ही स्पिन आक्रमण का इस्तेमाल करती हैं।
इसमें सबसे खास बात यह है कि टीम इंडिया उन्हें अब नंबर 5 की जिम्मेदारी सौंप रही है। टी20 क्रिकेट में यह वही स्थान है जहां बल्लेबाज को आते ही तेजी से रन बनाने पड़ते हैं, खासकर बीच के ओवरों में जब स्पिनर गेंदबाजी कर रहे होते हैं। मगर तिलक के लिए यही वक्त बल्लेबाजी के लिए चुनौती बन रहा है। यही वह चरण है जहां तिलक सबसे ज्यादा संघर्ष करते दिख रहे हैं। उनके करियर का सबसे कम स्ट्राइक रेट भी अभी तक नंबर-5 पर ही रहा है।
वहीं जब उन्होंने नंबर 3 या नंबर 4 पर बल्लेबाजी की है, तब उन्हें इनिंग बिल्ड करने का मौका मिला है। जबकि नंबर 6 और नंबर 7 पर भी तिलक ने अच्छी बल्लेबाजी की है तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी उनका स्ट्राइक रेट 200 प्लस का रहा है। यानी वह बेहतर फिनिशर भी हैं। उनकी सबसे बड़ी कमजोरी स्पिनर के खिलाफ बल्लेबाजी ही निकल कर आई है।
तिलक वर्मा ने खुद को बताया था रेड बॉल क्रिकेटर…
इसको लेकर तिलक वर्मा खुद भी मान चुके हैं कि बचपन से उन्होंने रेड बॉल क्रिकेट पर ज्यादा फोकस किया है। उन्होंने दो साल पहले बीसीसीआई टीवी से बात करते हुए कहा था कि,”बचपन से मैंने रेड बॉल क्रिकेट बहुत खेला है। आईपीएल के कारण ही कई लोग मुझे बतौर व्हाइट बॉल क्रिकेटर जानते हैं, लेकिन मैं जानता हूं कि मैं रेड बॉल क्रिकेटर हूं जो 500 गेंद खेल सकता है। यह मेरे लिए नई बात नहीं है। रेड बॉल क्रिकेट मेरी प्राथमिकता है लेकिन टी20 क्रिकेट में मुझे खुद को ढालना होगा। और मैं अपना माइंडसेट वैसा ही बना रहा हूं।”
आज दो साल बाद भी तिलक वर्मा का टी20 क्रिकेट में खुद को ढालने का प्रयास जारी है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में उनका ऑर्डर बदला और वह नीचे पहुंचे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या टीम इंडिया को अपनी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करना चाहिए? अगर रिंकू सिंह टीम में नहीं हैं, तो क्या शिवम दुबे को नंबर-5 पर भेजना बेहतर विकल्प होगा? दुबे स्पिन गेंदबाजी पर बड़े शॉट खेलने में ज्यादा सहज हैं, जबकि तिलक को ऊपर बल्लेबाजी का मौका देकर उनकी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
तिलक वर्मा की प्रतिभा पर किसी को संदेह नहीं है। उन्होंने कई अहम पारियां खेलकर अपनी उपयोगिता साबित की है। लेकिन अगर उन्हें टीम इंडिया के टी20 सेटअप में लंबे समय तक सफल होना है, तो स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ अपने खेल में सुधार करना होगा। क्योंकि अब विरोधी टीमें उनकी इस कमजोरी को अच्छी तरह पहचान चुकी हैं और हर मैच में उसी पर निशाना साध रही हैं।
वैभव सूर्यवंशी को करना होगा और इंतजार, दूसरे टी20 में भी नहीं होगा डेब्यू? भारतीय कोच ने मैच से पहले दिया संकेत
वैभव सूर्यवंशी को दूसरे टी20 इंटरनेशनल में भी डेब्यू का इंतजार करना पड़ सकता है। मैनचेस्टर टी20 से पहले टीम इंडिया के बॉलिंग कोच ने इस बात के साफतौर पर संकेत दिए हैं कि संजू सैमसन को बैक किया जाएगा और विश्वास जताया जाएगा। क्लिक करें और पढ़ें पूरी खबर
