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लॉर्ड्स के एेतिहासिक मैदान पर खामोश रहा इन पांच दिग्गजों का बल्ला, कभी नहीं बना पाए शतक

इन दिग्गज खिलाड़ियों ने विश्व क्रिकेट में अलग ही मुकाम हासिल किया है, लेकिन लॉर्ड्स में इनका बल्ला खामोश रहा।

इंग्लैंड स्थित लॉर्ड्स मैदान को क्रिकेट का मक्का कहा जाता है। इसी मैदान पर भारत ने 1983 में वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्वकप जीता था। 2002 नेटवेस्ट सीरीज के फाइनल में विजयी रन लेते ही तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने इसी मैदान की बालकनी में शर्ट उतारी थी। इस मैदान पर सेंचुरी लगाना हर खिलाड़ी का सपना होता है। लेकिन विश्व क्रिकेट में कई दिग्गज खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने वर्षों तक क्रिकेट खेला, लेकिन लॉर्ड्स के मैदान पर हेलमेट और बल्ला उठाने का मौका नहीं मिला। आइए आपको बताते हैं एेसे ही खिलाड़ियों के बारे में:

जैक कैलिस: द.अफ्रीका के जैक कैलिस के नाम सचिन तेंडुलकर (51) के बाद सबसे ज्यादा (45) टेस्ट शतक लगाने का रिकॉर्ड है। अपने करियर में उन्होंने कई कीर्तिमान हासिल किए। लेकिन लॉर्ड्स के मैदान पर उनका बल्ला कभी नहीं चला। यहां खेली गई पांच पारियों में उनका स्कोर- 0, 7,13,3, 31 रहा यानी कुल 54 रन। इस दौरान उनका औसत 10.8 रहा।

रिकी पॉन्टिंग: दुनिया के सबसे कामयाब कप्तानों और बल्लेबाजों में से एक। उनकी कप्तानी में अॉस्ट्रेलिया ने 2003 और 2007 का विश्व कप जीता था। साल 2000 में उन्हीं की कप्तानी में अॉस्ट्रेलियाई टीम का विश्व क्रिकेट पर दबदबा था। उन्होंने हर देश के खिलाफ शतक लगाए। लेकिन लॉर्ड्स में खेली गई 8 पारियों में पंटर का बल्ला उस तरह नहीं चला, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। यहां उनका स्कोर- 14, 4, 9, 42, 2, 38, 26 और 0 है यानी सिर्फ 135 रन।

सुनील गावस्कर:  दुनिया के सर्वकालीन महान बल्लेबाजों में से एक। सचिन तेंडुलकर से पहले इसी दिग्गज खिलाड़ी के नाम सबसे ज्यादा टेस्ट शतक का रिकॉर्ड था। गावस्कर ही वह खिलाड़ी थे, जिन्होंने भारतीयों को विश्वास दिलाया कि वह इस खेल में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। इतना ही नहीं 70 के दशक में वेस्टइंडीज के घातक बॉलिंग अटैक के सामने वह बिना हेलमेट के खेलते थे। मुंबई के इस पूर्व खिलाड़ी ने 34 टेस्ट सेंचुरी बनाई हैं, जिसमें से 13 वेस्टइंडीज के खिलाफ हैं, जिसमें 3 दोहरे शतक भी शामिल हैं। लेकिन लॉर्ड्स में खेली गई 10 पारियों में उनका स्कोर-4, 53, 49, 5, 42, 59, 48, 24, 34 और 22 रन है। यानी उन्होंने 37.6 की औसत से 376 रन बनाए हैं।

ब्रायन लारा: टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा निजी स्कोर 400 रन बनाने की रिकॉर्ड लारा के नाम है। सचिन तेंडुलकर से पहले इन्हीं के नाम सर्वाधिक टेस्ट रन का रिकॉर्ड था। लारा अपने दौर के सबसे शानदार खिलाड़ियों में से एक थे। अकसर उनकी और सचिन तेंडुलकर की तुलना होती रहती थी। लेकिन लॉर्ड्स में उनका बल्ला शतक बनाने में नाकाम रहा। यहां खेली गई 6 पारियों में उनका स्कोर 6, 54, 6, 5, 11, 44 है। यानी उन्होंने 22.66 की औसत से कुल 126 रन बनाए।

सचिन तेंडुलकर: यह नाम शायद सभी को हैरान कर दे। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन ने अपने करियर में हर मुकाम हासिल किया है। 200 टेस्ट खेलकर 51 शतक जमाने वाले सचिन कभी क्रिकेट के मक्का में सेंचुरी नहीं जड़ पाए। 1989 में डेब्यू करने के बाद वह करीब 9 बार इस मैदान पर उतरे। लेकिन शतक क्या, वह यहां अर्धशतक भी नहीं बना सके। 9 पारियों में उनका स्कोर-10, 27, 31, 16, 12, 37, 16, 34 और 12 है। इसका मतलब है उन्होंने 21.67 की औसत से 195 रन ही बनाए हैं।

Sachin Tendulkar, Sachin: A Billion Dreams

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