ताज़ा खबर
 

इन पांच भारतीय खिलाड़ियों के जीवन पर बन सकती है बायोपिक, कड़ी मेहनत और संघर्ष के बूते पाया है बड़ा नाम

पिछले साल सितंबर में रिलीज हुई एमएस धोनी-द अनटोल्ड स्टोरी और इस साल आई सचिन तेंदुलकर की बायोपिक ने बॉक्स अॉफिस पर अच्छा खासा कलेक्शन किया था।

कपिल देव, इरफान और यूसुफ पठान, युवराज सिंह, सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग।

पिछले साल सितंबर में रिलीज हुई एमएस धोनी-द अनटोल्ड स्टोरी और इस साल आई सचिन तेंदुलकर की बायोपिक ने बॉक्स अॉफिस पर अच्छा खासा कलेक्शन किया था। फैन्स को अपने फेवरेट स्टार्स के उन पहलुओं को जानने का मौका मिला, जिससे वह अब तक अनजान थे। उनके संघर्ष, मेहनत और यहां तक पहुंचने की कठिन यात्रा पर हर किसी को गर्व महसूस हो रहा था। लेकिन भारतीय क्रिकेट में और भी कई एेसे सितारे हैं, जिनकी जिंदगी लोगों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने न सिर्फ अपने हौसले से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया, बल्कि वापसी कर खुद को साबित भी किया। आइए आपको बताते हैं उन खिलाड़ियों के बारे में, जिनकी जिंदगी पर बायोपिक बननी चाहिए।

युवराज सिंह: क्रिकेट वर्ल्ड टी20 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में 6 छक्के जड़ने वाले युवराज सिंह के संघर्ष के बारे में कौन नहीं जानता। 19 साल की उम्र में भारतीय टीम में एंट्री पाने वाले युवराज की जिंदगी किसी फिल्म जैसी रही है। 2011 विश्व कप में मैन अॉफ द टूर्नामेंट बनने के बाद युवराज सिंह कैंसर की चपेट में आ गए। इस खबर से हर कोई हैरान था। कई महीनों तक उनका इलाज चला और उन्होंने शानदार वापसी की। 2014 वर्ल्ड टी20 फाइनल में भारत को श्रीलंका से करारी मात मिली, जिसके बाद युवराज सिंह की कड़ी आलोचना हुई थी। उनके घर पर पत्थर तक फेंके गए। लेकिन फिर भी युवी का हौसला पस्त नहीं हुआ। वह एक चैम्पियन की तरह उभरे।

HOT DEALS
  • Sony Xperia XZs G8232 64 GB (Warm Silver)
    ₹ 34999 MRP ₹ 51990 -33%
    ₹3500 Cashback
  • MICROMAX Q4001 VDEO 1 Grey
    ₹ 4000 MRP ₹ 5499 -27%
    ₹400 Cashback

वीरेंद्र सहवाग: दिल्ली के छोटे से इलाके नजफगढ़ में जन्मे सहवाग जॉइंट फैमिली में पैदा हुए थे, जिसमें 50 लोग थे। उनके पिता एक अनाज व्यापारी थे और चाहते थे कि बड़े होने पर सहवाग भी वही करें। लेकिन सहवाग का रुझान बचपन से ही क्रिकेट की ओर था। वह रोजाना 84 किमी यात्रा तक क्रिकेट खेलने जाते थे। उनके आदर्श मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर हैं। जल्द ही सहवाग ने अपने प्रदर्शन से टीम में जगह बना ली। अपने विस्फोटक प्रदर्शन से उन्होंने हर किसी को दीवाना बना लिया। जब उन्हें ओपनिंग की जिम्मेदारी दी गई, उसके बाद उन्हें रोक पाना नामुमकिन था। वनडे में दोहरे शतक ठोकने वाले बल्लेबाजों में से एक सहवाग ने टेस्ट में भी दो बार तिहरा शतक जड़ा है।

सौरव गांगुली: भारतीय क्रिकेट को नए मुकाम पर ले जाने वाले कप्तान। अपने हौसले और लीडरशिप के बल पर उन्होंने टीम इंडिया की कायापलट ही कर दी। मोहम्मद अजहरुद्दीन के मैच फिक्सिंग स्कैंडल में फंसने के बाद सौरव को कप्तानी सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने टीम को भरोसा दिलाया कि भारत विदेशों में भी जीत सकता है। युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ, जहीर खान और महेंद्र सिंह धोनी को तराशने में उन्हीं का हाथ था। ग्रेग चैपल से मतभेद के कारण उन्हें टीम से निकाल दिया गया था, लेकिन उन्होंने फिर से एक चैम्पियन की तरह वापसी की।

कपिल देव: भारत के सबसे शानदार अॉलकराउंडर और सर्वकालीन महान क्रिकेटर। 1983 विश्व कप के सेमीफाइनल में जिम्बाब्वे के खिलाफ उनके 175 नाबाद रनों की पारी को शायद ही कोई भुला सके। उन्हीं की कप्तानी में भारत ने क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता था। 1999 में उनका नाम मैच फिक्सिंग स्कैंडल में आया था, जिस पर हर कोई हैरान था। कपिल की इस कारण काफी आलोचना हुई थी, लेकिन इन आरोपों को बाद में खारिज कर दिया गया था।

पठान ब्रदर्स: वडोदरा के मांडवी में पैदा हुए यूसुफ और इरफान पठान का बचपन गरीबी में बीता। उनके पिता स्थानीय मस्जिद में अज़ान पढ़ते थे और उनकी मासिक आय 250 रुपये थी। दोनों भाइयों को अपनी क्रिकेट की जरूरत को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। दोनों एक ही साइकल से स्कूल और मैदान तक जाते थे और उन्हें एक ही किट शेयर करनी पड़ती थी। इरफान पठान अपने पिता से सेंकड हैंड जूते खरीदने के लिए 50 रुपये लिया करते थे, क्योंकि नए जूते खरीदने के पैसे उनके पास नहीं थे। लेकिन दोनों भाइयों ने हौसले, लगन और मेहनत से न सिर्फ अपने पिता का बल्कि दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया। 

देखें वीडियो ः

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App