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359 रन ठोंकने वाले समित गोहेल ने पिछले रणजी सीजन में बनाए थे केवल 68 रन, कोच की बेटी से की है लव मैरिज

समित ने 11 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था।

समित गोहेल

रणजी ट्रॉफी में बतौर ओपनर नाबाद तिहरा शतक लगाने वाले समित गोहेल अब किसी पहचान के मोहताज नहीं रहे। लेकिन इस उभरते खिलाड़ी के बारे में हम आपको कई एेसी बातें बताने जा रहे हैं, जो शायद अब तक आप नहीं जानते होंगे। समित की शादी उन्हीं के कोच देवांग देसाई की बेटी शिखा से हुई है। देसाई ने अपनी बेटी का हाथ समित के क्रिकेट टैलेंट को देखते हुए नहीं दिया बल्कि वह शादी के लिए इसलिए माने क्योंकि समित एक शानदार इंसान हैं। उनकी प्रेम कहानी भी काफी दिलचस्प है।

पिछले 14 वर्षों से देसाई समित के कोच हैं। देसाई कहते हैं कि उनकी बेटी शिखा एचआर में एमबीए करने से पहले होटल मैनेजमेंट पढ़ रही थी। दो साल बाद अॉस्ट्रेलिया से उसके लिए एक रिश्ता आया। लड़का होटल मैनेजमेंट में ग्रैजुएट था। मैंने शिखा से पूछा तो उसने कहा कि अभी उसका शादी का मन नहीं है। उन्होंने कहा, मैंने शिखा को दो दिन का वक्त दिया। इसके बाद उसने कहा कि मैं एक लड़के को पसंद करती हूं। आप उसे जानते हैं, वह एक क्रिकेटर है। देसाई ने कहा, पहले सुनकर मुझे धक्का लगा। फिर जैसे ही उसने कहा कि वह लड़का समित है। इसके बाद मेरे पास मना करने की कोई वजह नहीं रही।

बीबी निंबलकर इकलौते एेसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाए हैं, वह भी नाबाद रहते हुए। उन्होंने 1948-49 में कटियावाड़ के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में 443 रन बनाए थे। तिहरा शतक जमाने के बाद समित शांत हैं, लेकिन उनकी पत्नी शिखा उत्साहित नजर आईं। समित ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, मैं खुश हूं कि हमारी टीम ने सेमीफाइनल के लिए क्वॉलिफाई कर लिया। वहीं उनकी पत्नी शिखा कहती हैं कि मैं शब्दों में अपनी खुशी बयां नहीं कर सकती। समित के बारे में शिखा कहती हैं कि घर पर मैं शांत होती हूं और ये बिंदास रहते हैं। उन्हें खाने का बहुत शौक है खासकर गुजराती खाना। लेकिन मैं ध्यान रखती हूं कि समित अपनी फिटनेस का ख्याल रखें।

समित ने 11 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने समर कैंप में आणंद जिला क्रिकेट असेसिएशन में एडमिशन लिया और वहां उनकी मुलाकात कोच देसाई से हुई थी। समित के पिता भानूभाई ने कभी क्रिकेट नहीं खेला था। वह प्रॉपर्टी डीलर बनने से पहले ट्रैवल के बिजनेस में थे। वह बताते हैं कि 3 साल की उम्र में उन्होंने एक मिनी क्रिकेट बैट समित को दिया और इसके बाद उन्होंने किसी खिलौने को हाथ नहीं लगाया। जब समित ने बीजेवीएम कॉलेज में एडमिशन लिया तो वह इंटर कॉलेज टूर्नामेंट्स के तीन सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। बता दें कि पिछले रणजी सीजन में उनका प्रदर्शन बेहद खराब था। उन्होंने तीन मैचों में कुल 68 रन बनाए थे, जिनके बाद उन्हें ड्रॉप कर दिया गया।

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