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चोट से बचें तभी चोट दे पाएंगे: युकी

युकी भांबरी पहले भी टॉप 100 में पहुंच चुके हैं। वह नवंबर 2015 में 88वीं रैंकिग तक पहुंच गए थे। उन्होंने साल 2015 की शुरुआत 300वीं रैंकिंग से की थी और इसमें वह 200 से ज्यादा सुधार करने में सफल रहे थे। असल में रैंकिंग में सुधार करने के लिए खिलाड़ी को ज्यादा से ज्यादा टूर्नामेंटों में खेलना जरूरी है।

युकी कहते हैं कि मैं कोर्ट में ज्यादा समय बिता पाने में सफल हो रहा हूं, यह उसी का परिणाम है।

भारत के रामनाथन कृष्णन, विजय अमृतराज, रमेश कृष्णन और सोमदेव देववर्मन के रूप में उम्दा सिंगल्स खिलाड़ी रहे हैं। पर एक खिलाड़ी के उभरने और दूसरे के खत्म होने के बीच कई बार खासा अंतर भी बना है। सोमदेव देववर्मन के खत्म होने के बाद देश में इस क्षेत्र में रिक्तता आ गई। पर अब लगता है कि इस स्थान को भरने के लिए युकी भांबरी तैयार हो गए हैं। वैसे तो तीन साल पहले 2015 में भी युकी ने शानदार प्रदर्शन से उम्मीदें बंधाई थीं। पर चोट की समस्या उनके लिए सिरदर्द बनी। उन्होंने पिछले दिनों इंडियन वेल्स मास्टर्स टेनिस में दो बेहतरीन जीतों से एक बार फिर दिखाया कि वे अब परिपक्व हो गए हैं और अब उनकी चुनौती से पार पाना आसान नहीं रहा है। युकी के बारे में यह सभी जानते हैं कि वह कॅरियर की शुरुआत से ही दो हाथों से दमदार बैकहैंड लगाते रहे हैं। लेकिन उनके फोरहैंड में बहुत तेजी नहीं थी। वह फोरहैंड में तेजी लाने के लिए पिछले कुछ समय से प्रयासरत थे। इस सीजन के शुरू में स्टीफन कून के साथ दो हफ्ते उन्होंने थाईलैंड स्थित अकादमी में बिताए। इस दौरान उन्हें एशिया के दिग्गज खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका भी मिला। इसका असर उनके फोरहैंड पर साफ दिखने लगा है।

फोरहैंड में आई तेजी से उनके खेल में ज्यादा मजबूती आ गई है। खेल में आए सुधार की वजह से ही वह इंडियन वेल्स मास्टर्स टेनिस में सुर्खियां बटोरने में सफल रहे। कई बार जोखिम उठाने का भी फायदा मिलता है। मार्च माह में युकी के सामने चीन में चैलेंजर टूर्नामेंट खेलने का तीन मौके थे और इनमें खेलकर वह आसानी से टॉप 100 में शामिल हो सकते थे। लेकिन युकी ने इंडियन वेल्स में खेलने का मुश्किल फैसला लिया। युकी भांबरी जानते थे कि इस टूर्नामेंट में उन्हें क्वालिफाइंग दौर से गुजरना होगा और बहुत संभव है कि कोई अंक ही न मिले। पर वह क्वालिफाइंग दौर में दो जीतों से मुख्य ड्रा में पहुंचे। इसके बाद निकोलस माहुत और वि के 12वें नंबर के खिलाड़ी लुकास पौउली को हराकर तीसरे राउंड में पहुंचे। यहां वह सैम क्वैरी से तीन सेट के संघर्ष में हार गए। इससे इस बात का तो अहसास होता है कि वह अब एटीप टूर पर धमाल मचाने को तैयार हो गए हैं। वह यदि इसी तरह विभिन्न टूर्नामेंटों में एक-दो राउंड जीतते रहे तो टॉप 100 के 70-80 रैंक तक पहुंच सकते हैं। एक बार 70-80 रैंकिंग तक पहुंचने का फायदा यह मिलेगा कि उन्हें नियमित तौर पर एटीपी टूर्नामेंट खेलने को मिलेंगे, उस स्थिति में खिलाड़ी के सामने ऊंचाइयां पाने के ज्यादा मौके होते हैं।

युकी भांबरी पहले भी टॉप 100 में पहुंच चुके हैं। वह नवंबर 2015 में 88वीं रैंकिग तक पहुंच गए थे। उन्होंने साल 2015 की शुरुआत 300वीं रैंकिंग से की थी और इसमें वह 200 से ज्यादा सुधार करने में सफल रहे थे। असल में रैंकिंग में सुधार करने के लिए खिलाड़ी को ज्यादा से ज्यादा टूर्नामेंटों में खेलना जरूरी है। यह अच्छी फिटनेस से ही संभव है। उस समय ट्रेनर के तौर पर जुड़े अहमद नासिर ने उन्हें इतना फिट रखा कि वह साल में 18 टूर्नामेंट खेलने में सफल रहे थे। लेकिन 2016 में कुहनी में चोट के कारण उन्हें फिर छह माह तक कोर्ट से दूरी बनानी पड़ी। लेकिन स्टीफन कून से जुड़ने के बाद से वह अपने पुनर्वास के बजाय कोर्ट पर ज्यादा समय बिताने में सफल हो पा रहे हैं।

पिछले डेढ़ साल में उन्होंने वाशिंगटन में एटीपी 500 सिटी क्लासिक में क्वार्टर फाइनल तक चुनौती पेश करने के दौरान मोंफिल्स को हराया, उन्होंने पुणे चैलेंजर जीता और आॅस्ट्रेलियन ओपन में दूसरे राउंड तक चुनौती पेश की। युकी कहते हैं कि मैं कोर्ट में ज्यादा समय बिता पाने में सफल हो रहा हूं, यह उसी का परिणाम है। हां इतना तय है कि युकी यदि अपनी फिटनेस को बनाए रखकर चोटों की समस्या से खुद को बचाए रखने में सफल रहते हैं तो हमें उनसे और धमाके देखने को मिल सकते हैं।

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