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टेनिसः उम्र की बंदिश बेमानी

छत्तीस साल 173 दिन की उम्र में आस्ट्रेलिया ओपन का खिताब अपने नाम कर स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर ने ताकत और फुर्ती का पर्याय माने जाने वाले खेलों में खिलाड़ियों के लिए उम्र की एक अलिखित सीमा बांधने की अवधारणा को तोड़ दिया है। तो वहीं पिछले पांच साल में ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में जिस तरह युवा खिलाड़ियों का दबदबा बढ़ा, उसके बीच सेरेना विलियम्स की सफलता चौंकाने वाली रही है।
Author February 8, 2018 02:53 am
फेडरर और सेरेना ने तोड़ीं उम्र की बंदिश और दिखाया जोश

श्रीशचंद्र मिश्र
छत्तीस साल 173 दिन की उम्र में आस्ट्रेलिया ओपन का खिताब अपने नाम कर स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर ने ताकत और फुर्ती का पर्याय माने जाने वाले खेलों में खिलाड़ियों के लिए उम्र की एक अलिखित सीमा बांधने की अवधारणा को तोड़ दिया है। ज्यादातर खिलाड़ी भले ही मन मसोस कर इस बंदिश को स्वीकार कर लेते हों लेकिन फेडरर इसे गलत साबित कर रहे हैं। फेडरर सरीखे खिलाड़ी संख्या में कम भले ही हों लेकिन उन्होंने उम्र को बाधा नहीं बनने दिया। 2015 की विंबलडन प्रतियोगिता में तो इसके कई प्रमाण मिले। भारत के लिएंडर पेस, अमेरिका की सेरेना विलियम्स और स्विटजरलैंड की मार्टिना हिंगिस ने नई इबारत लिखी। सर्बिया की 2008 में नंबर एक खिलाड़ी रहीं जेलेना जानकोविच ने हार के बावजूद लगातार खेलते रहने का संकल्प जता दिया।

पहले खिलाड़ियों के 35-40 या उससे ज्यादा की उम्र तक खेलों में सक्रिय रहना आम था। इंग्लैंड के विल्फ्रेड रोड्स और भारत के सीके नायडू तो साठ के करीब पहुंचने तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते रहे। फार्मूला वन रेस सात बार जीत कर विश्व रेकार्ड बनाने वाले जर्मर्नी के माइकल शूमाकर ने आखिरी खिताब 37 साल की उम्र में जीता। उम्र की बंदिश ने इस सहस्राब्दी में जिस खेल पर सबसे ज्यादा असर डाला है वह टेनिस है। खेल की तकनीक और उपकरणों में व्यापक सुधार के कारण टेनिस पर अच्छी कद काठी के युवा खिलाड़ियों का वर्चस्व हो गया है। इसी से यह मान्यता मजबूत हुई कि 27-28 साल की उम्र के बाद किसी खिलाड़ी के लिए चोटी पर रहना आसान नहीं हो पाता। हालांकि इसके अपवाद भी रहे। नौ बार विंबलडन जीतने वाली चेकोस्लोवाकिया मूल की अमेरिकी खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा तो 48 साल की उम्र तक खेलती रहीं।

यह सही है कि आज टेनिस ताकत का खेल बन गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 25 साल की उम्र शिखर की तरफ कदम बढ़ाने की आखिरी उम्र होती है। ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट ने करीब पांच दशक में इसकी पुष्टि भी की है। 1968 में ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट पेशेवर खिलाड़ियों के लिए खोल दिए जाने के बाद शुरू हुए ओपन युग में जिन पुरुष व महिला खिलाड़ियों ने 23 से 25 साल की उम्र में पहला ग्रैंड स्लैम जीता उनमें पुरुष वर्ग में ब्योर्न बोर्ग, माइकल चैग, पैट कैश, माइकल स्टिच, येवगेनी काफेल निकोव, मरात साफिन, लेटन हेविट, कार्लोस मोया, जुआन मार्टिन डेल पोर्टो और महिला वर्ग की सू वार्कर, मीमा जाउसोविच, ट्रेसी आस्टिन, बारबरा जार्डन, हाना माडालिकोवा, गौब्रिएला सबातीनी, मेरी पियर्स, इवा माजोली अनस्तीसिया मिस्कीना, एना इवानोविच आदि को अस्त होने में ज्यादा समय नहीं लगा। लेकिन इसी दौर से गुजरे जिमी कोनर्स, जॉन मैकेनरो, मैट्स विलेंडर, आंद्रे अगासी, पीट सम्प्रास, जिम कूरियर, रोजर फेडरर, राफेल नडाल, नोवाक जोकोविच, इवान गुलागोंग, क्रिस एवर्ट, मार्टिना नवरातिलोवा, मार्टिना हिगिंस, सेरेना विलियमस, वीनस विलियम्स, मारिया शरापोव आदि ने चढ़ती उम्र के साथ अपनी सफलताओं को नई चमक दी। जाहिर है कि उम्र सफलता का आधार नहीं है। वह तो निर्भर है खिलाड़ी के जीवटपन पर।

सेरेना का भी कोई नहीं सानी नहीं

पिछले पांच साल में ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में जिस तरह युवा खिलाड़ियों का दबदबा बढ़ा, उसके बीच सेरेना विलियम्स की सफलता चौंकाने वाली रही है। पांच साल पहले मान लिया गया था कि सेरेना का करिअर खत्म हो गया है। ऐसी भविष्यवाणी पहले भी हुई जब 1999 में अमेरिकी ओपन का पहला ग्रैंड स्लैम जीतने के बाद 2001 तक वे और कोई खिताब नहीं जीत सकीं। तब कहा गया कि वे आत्ममुग्धता का शिकार हैं। 2002 में तीन ग्रैंड स्लैम- फ्रेंच ओपन, विंबलडन व अमेरिकी ओपन जीत कर इस भ्रांति को उन्होंने तोड़ा। 2003 में आस्ट्रेलियाई ओपन व विंबलडन जीतने के बाद 2005 में वे सिर्फ आस्ट्रेलियाई ओपन ही जीत पाईं। 2007 में आस्ट्रेलियाई ओपन और 2008 में अमेरिकी ओपन वे किसी तरह जीत पाईं। 2009 व 2010 में आस्ट्रेलियाई ओपन व विंबलडन जीतने के बाद सेरेना चोटों से परेशान रहीं। 2012 में वापसी के बाद से उन्होंने अपनी चमक फिर दिखानी शुरू कर दी। ग्यारह साल बाद 31 साल की उम्र में फ्रेंच ओपन जीतने के बाद नया सफर शुरू हुआ वह अब किसी युवा खिलाड़ी के थामे नहीं थम रहा। 2008 के अमेरिकी ओपन तक 27 साल की हो चुकी सेरेना के करिअर को जब खत्म मान लिया गया था, सेरेना उठीं और अब 35 की उम्र में भी कमाल कर रही हैं। 23 ग्रैंड स्लैम जीत कर वे आस्ट्रेलिया की मागर्रेट कोर्ट (24) से ही पीछे हैं। रही बात लिएंडर पेस और मार्टिना हिंगिस की तो 2015 में मिश्रित युगल के दो ग्रैंड स्लैम खिताब साथ जीत कर दोनों ने उम्र के असर को धता बताई ही।

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