चीनी कंपनी VIVO नहीं रहेगी आईपीएल की प्रायोजक, टाटा ग्रुप बना टूर्नामेंट का नया टाइटल स्पॉन्सर

पिछले साल चीन और भारत में तनाव के बीच वीवो से टाइटल राइट्स ट्रांसफर नहीं हो पाया था। आईपीएल चेयरमैन बृजेश पटेल के मुताबिक, मंगलवार यानी 11 जनवरी 2022 को आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इस पर फैसला लिया गया।

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बीसीसीआई ने वीवो की जगह टाटा ग्रुप को आईपीएल (IPL) का नया टाइटल स्पॉन्सर बनाया है। (सोर्स- आईपीएल)

चीन की मोबाइल फोन निर्माता कंपनी वीवो अब इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की टाइटल स्पॉन्सर नहीं रहेगी। उसकी जगह टाटा ग्रुप को आईपीएल (IPL) का नया टाइटल स्पॉन्सर बनाया गया है। साल 2022 से टूर्नामेंट अब TATA IPL के नाम से जाना जाएगा।

पिछले साल चीन और भारत में तनाव के बीच वीवो से टाइटल राइट्स ट्रांसफर नहीं हो पाया था। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के चेयरमैन बृजेश पटेल ने समाचार एजेंसी पीटीआई को इस बात की जानकारी दी। उनके मुताबिक, मंगलवार यानी 11 जनवरी 2022 को आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इस पर फैसला लिया गया।

आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में कई बड़े फैसले लिए गए। टाटा को आईपीएल का टाइटल स्पॉन्सर बनाया गया है। इसके अलावा अहमदाबाद टीम को खरीदने वाले सीवीसी ग्रुप को लेटर ऑफ इंटेंट सौंपा गया है।

वीवो ने साल 2018 में आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप के राइट्स खरीदे थे। चीनी कंपनी वीवो को आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को हर साल 440 करोड़ रुपए देने थे। पिछले साल भारत-चीन के बीच हुए विवाद के कारण जब देश में विरोध हुआ, तब एक साल के लिए वीवो को ब्रेक लेना पड़ा था।

इससे पहले आईपीएल 2020 में फैंटेसी गेमिंग कंपनी ड्रीम-11 टाइटल स्पॉन्सर रही थी। इसके लिए ड्रीम-11 ने बीसीसीआई को 222 करोड़ रुपए दिए थे। यह कॉन्ट्रैक्ट 18 अगस्त से 31 दिसंबर 2020 तक के लिए था। यह धनराशि वीवो के सालाना भुगतान की करीब आधी थी।

आईपीएल का 2022 सीजन कई मायनों में खास होने वाला है। दरअसल, इस बार मेगा ऑक्शन होना है। साथ ही यह वीवो का बतौर टाइटल स्पॉन्सर आखिरी साल होगा। यही नहीं, आईपीएल को जल्द ही नया मीडिया स्पॉन्सर भी मिलेगा, क्योंकि स्टार के साथ आईपीएल का राइट भी 2022 तक खत्म होगा।

बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा, ‘आज नहीं तो कल ऐसा होना ही था, क्योंकि इससे लीग और कंपनी दोनों का बुरा प्रचार हो रहा था। चीन के उत्पादों को लेकर नकारात्मक भावना को देखते हुए कंपनी को करार पूरा होने से एक सत्र पहले प्रायोजन से हटना पड़ा।’

बीसीसीआई प्रायोजन से मिलने वाली राशि का 50 प्रतिशत अपने पास रखता है और बाकी राशि आईपीएल फ्रैंचाइजी के बीच बांटता है। इसकी संख्या दो नई टीम के जुड़ने के बाद अब 10 हो गई है। माना जा रहा है कि अभी यह करार एक साल का है, क्योंकि बीसीसीआई को 2023 से शुरू हो रहे अगले चक्र के लिए नई निविदा आमंत्रित करनी होगी।

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वीवो का आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए 2190 करोड़ रुपए के साथ 5 साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट हुआ था। यह कॉन्ट्रैक्ट 2018 से 2022 तक का था। पहले खबर थी कि वीवो का कॉन्ट्रैक्ट 2023 तक के लिए बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अब टाटा ने उसकी जगह ले ली है।

आईपीएल के सेंट्रल स्पॉन्सरशिप में देसी कंपनियों का ही बोलबाला है। सेंट्रल और टाइटल स्पॉन्सरशिप दोनों के अधिकार अलग-अलग हैं। आईपीएल में सेंट्रल स्पॉन्सरशिप के तहत जर्सी के अधिकार नहीं आते हैं। यानी जर्सी पर छपे लोगो पर केवल टाइटल स्पॉन्सरशिप का ही अधिकार होता है।

साथ ही कंपनी को अपनी ब्रांडिंग के लिए मैच के बाद का प्रेजेंटेशन एरिया, डग आउट में बैकड्रॉप और बाउंड्री रोप जैसे बढ़िया स्पेस मिलते हैं। टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से ज्यादा पैसा देना होता है।

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