तालिबान ने अफगान महिलाओं के खेलने पर लगाया प्रतिबंध, कहा- स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने पर उनके शरीर की नुमाइश होगी

इस हफ्ते की शुरुआत में, तालिबान ने फरमान जारी किया था कि केवल महिला शिक्षक ही छात्राओं को पढ़ाएगी। अगर ऐसा संभव नहीं हो पाया तो अच्छे चरित्र वाले बुजुर्ग अध्यापकों को उनकी जगह पर लगाया जा सकता है।

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काबुल में आईएसएएफ मुख्यालय में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईएसएएफ) और काबुल स्थित संयुक्त राज्य दूतावास के खिलाड़ियों के खिलाफ एक प्रदर्शनी मैच में हिस्सा लेती हुईं अफगान महिला ओलंपिक बास्केटबॉल की टीम (लाल रंग में)। (सोर्स- रायटर/फाइल फोटो)

तालिबान राज में महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं है। कब्जे के बाद तालिबान की तरफ से किए गए वादे इस संबंध में झूठे निकले हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी जाने वाली महिलाओं के लिए पारंपरिक कपड़े और नकाब पहनना का फरमान जारी करने के बाद तालिबान ने अब उनके खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

तालिबान ने बुधवार को कहा, ‘अफगान महिलाएं क्रिकेट समेत किसी भी खेल में हिस्सा नहीं ले सकतीं, क्योंकि खेल गतिविधियां उनके शरीर की नुमाइश करेंगी।’ यह सूचना तालिबान के एक प्रवक्ता की ओर से जारी बुधवार को जारी की गई। तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के उप प्रमुख अहमदुल्ला वसीक ने बुधवार यानी 8 सितंबर 2021 को मीडिया को बताया, ‘महिलाओं के लिए खेल गतिविधियां जरूरी नहीं हैं, क्योंकि इससे अफगान महिलाओं के शरीर के बेपर्दा होने का खतरा है। इस कारण वे क्रिकेट समेत किसी भी खेल में हिस्सा नहीं ले सकती हैं, क्योंकि खेल गतिविधियां उनके शरीर की नुमाइश करेंगी।’

इस हफ्ते की शुरुआत में, तालिबान ने फरमान जारी किया था कि केवल महिला शिक्षक ही छात्राओं को पढ़ाएगी। अगर ऐसा संभव नहीं हो पाया तो अच्छे चरित्र वाले बुजुर्ग अध्यापकों को उनकी जगह पर लगाया जा सकता है। तालिबान ने फरमान जारी कर कहा था कि निजी अफगान विश्वविद्यालयों में जाने वाली लड़कियों और महिलाओं को अबाया रोब (पूरी लंबाई की पोशाक) और नकाब (ऐसा परिधान जो चेहरे को ढंकता है) पहनकर आना होगा।

तालिबान ने लड़के और लड़कियों की कक्षाएं अलग-अलग चलाने का भी आदेश दिया है। यदि कक्षाएं अलग नहीं चलती हैं तो लड़के और लड़कियों को अलग कतार में बैठाकर बीच में पर्दा डालने के लिए कहा गया है। तालिबान का यह फरमान उन निजी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर लागू होता है, जो 2001 में तालिबान के पहले शासन के समाप्त होने के बाद से फले-फूले हैं।

साल 2001 से पहले ताबिलानी शासन के दौरान महिलाओं को पढ़ाई से वंचित रहना पड़ा था। यही नहीं, उन्हें घर से बाहर निकलने के लिए पुरुष रिश्तेदार को साथ ले जाना अनिवार्य होता था।

इस बीच, तालिबान ने मंगलवार को मुल्ला हसन अखुंद के नेतृत्व में एक नई अफगानिस्तान सरकार के गठन की घोषणा की। मुल्ला हसन अखुंद वही शख्स है जिसने साल 2001 में बामियान बुद्ध की प्रतिमा को नष्ट करने का आदेश दिया था। अफगानिस्तान में सत्ता की बागडोर संभालने के हफ्तों बाद तालिबान के एक प्रवक्ता ने यह एक ‘कार्यकारी’ सरकार होगी और स्थायी नहीं होगी।

इससे पहले तालिबान के शिक्षा मंत्री शेख मौलवी नूरुल्ला मुनीर ने कहा था कि पीएचडी और मास्टर डिग्री जरूरी नहीं हैं। मुल्ला वैसे ही सबसे ज्यादा महान होते हैं। मौलवी नूरुल्ला मुनीर ने कहा, ‘मुल्लाओं के पास कोई डिग्री नहीं है फिर भी वे सबसे ज्यादा महान हैं। आप देखते हैं कि मुल्ला और तालिबान के जो नेता सत्ता में आए हैं, उनके पास कोई पीएचडी डिग्री नहीं है, उनके पास कोई मास्टर्स डिग्री नहीं है, उनके पास हाईस्कूल की भी डिग्री नहीं है, लेकिन फिर भी वे सबसे महान हैं।’

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