टी20 क्रिकेट में भारतीय टीम ने 49 बार 200 से ज्यादा रन बनाए हैं। 2024 से अबतक यानी बीते दो साल में 18 बार भारतीय टीम ने ऐसा किया है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय टीम ने विस्फोटक बल्लेबाजी को आदत बना ली है। 200 से ज्यादा रन बनाने के लिए जरूरी है कि पहली ही गेंद से बड़े शॉट लगाने का प्रयास किया जाए। इस तरह की शैली की क्रिकेट में अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ी अहम भूमिका निभाते हैं, जिनका स्ट्राइक रेट 190 के करीब है।

पंजाब के इस खिलाड़ी ने 2024 में डेब्यू करने के बाद से लगातार विस्फोटक बल्लेबाजी की है और फिलहाल दुनिया के नंबर-1 टी20 बल्लेबाज हैं। हालांकि, टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अभिषेक का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है और वह लगातार आलोचना का शिकार हो रहे हैं। पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर ने बीते दिनों अभिषेक को स्लॉगर बता दिया था और अब यह शब्द बहस का विषय बन गया है।

स्लॉगर होना अपराध नहीं

क्रिकेट में स्लॉगर होने का मतलब हर गेंद पर बड़ा शॉट लगाने का प्रयास करने वाला बल्लेबाज होता है। किसी बल्लेबाज का स्लॉगर होना अपराध नहीं है। यह भी कहना तर्कसंगत नहीं है कि सफल बल्लेबाज होने के लिए बेहतरीन तकनीक होने की जरूरत है। ऐसा होता तो स्कूप, रिवर्स स्वीप, हेलीकॉप्टर शॉट और स्विच हिट जैसे शॉट न पनपते। महेंद्र सिंह धोनी और वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ी सफल न होते। तकनीकी रूप से दोनों खिलाड़ी बहुत मजबूत नहीं थे, लेकिन फिर भी अपनी बल्लेबाजी से प्रभाव छोड़ा।

टेस्ट क्रिकेट में भी आक्रामक बल्लेबाजी

सहवाग का पैर नहीं चलता था। वह खड़े-खड़े शॉट लगाते थे, लेकिन उनके पास जबरदस्त टाइमिंग थी। उन्होंने अपनी बल्लेबाजी शैली से टेस्ट क्रिकेट में भी परचम लहराया। धोनी तो ऐसे शॉट खेलते थे, जो क्रिकेट के किताब में मिलेंगे ही नहीं। फिर वह दुनिया के नंबर-1 फिनिशर बने। आखिर तक मैच ले जाना और छक्के से टीम को जीत दिलाकर धोनी ने फिनिशर का टैग अपने नाम किया। आज के दौर में तो ऋषभ पंत और हैरी ब्रूक जैसे खिलाड़ियों ने आक्रामक बल्लेबाजी से टेस्ट क्रिकेट में नाम बना लिया है, जबकि लाल गेंद वाले क्रिकेट में क्रीज पर समय बिताना काफी महत्वपूर्ण होता है।

बहस का मुद्दा रन तय करेगा

सहवाग और धोनी जैसे उदाहरण यह बताने के लिए काफी हैं कि बल्लेबाजी शैली नहीं रन बनाना महत्वपूर्ण है। जरूरी नहीं गेंदबाज के सिर के ऊपर से ही शॉट लगाकर रन बनाया जाए। विकेटकीपर के ऊपर से शॉट खेलकर रन बनाए जा सकते हैं। अभिषेक शर्मा पर भी यह बात लागू होती है। फिर इससे क्या फर्क पड़ता है कि अभिषेक स्लॉगर हैं या उनका बैट फ्लो काफी शानदार है। बहस का मुद्दा रन तय करेगा। रन बन रहे थे तब अभिषेक के रेंज और बैट फ्लो पर बात हो रही थी। अब रन नहीं बन रहे थे यह विश्लेषण हो रहा है कि उनके पास सीमित शॉट हैं।

टी20 में विकेट की अहमियत नहीं

अभिषेक जैसा बल्लेबाज अपनी विकेट का मोल नहीं समझता। वह हर हाल में तेजी से रन बनाना चाहता है। यही तो टी20 क्रिकेट की जरूरत है। टी20 में विकेट की अहमियत होती तो बल्लेबाज रिटायर आउट क्यों होते। फ्रेंचाइजी क्रिकेट में यह काफी चलन में है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी आगे देखने को मिल सकता है क्योंकि नंबर 8-9 तक बल्लेबाजी रखना का कारण ही यही है कि किसी भी सूरत में तेजी रन बनाने में समझौता नहीं करना है। दुनिया क्या कह रही है उस पर अभिषेक को ध्यान नहीं रखना चाहिए। जिस शैली से वह नंबर-1 बल्लेबाज बने हैं उसी से वह आगे भी रन बनाएंगे। उन्हें बस कोशिश करनी है कि यह दौर लंबा न चले।

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