तनिष्क वड्डी। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती तीन मैचों में तिलक वर्मा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। वह नंबर तीन पर संघर्ष कर रहे थे। इसके बाद उनके बल्लेबाजी क्रम में बदलाव हुआ। जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में तिलक वर्मा का क्रम बदला और उन्होंने 16 गेंद पर 44 रन ठोके। इसके बाद उन्होंने अपने कोच सलाम बायश से कहा, ‘मैं अब किसी क्रम पर खेलूंगा और दिखाऊंगा।’ बायश ने यह बात द इंडियन एक्सप्रेस को हंसते हुए बताई, जिन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच के बाद तिलक को डांट लगाई थी।
तिलक के क्रिकेटर बनने में बायश का बड़ा हाथ है। 11 साल पहले तिलक के पिता नंबूरी नागराजू इलेक्ट्रीशियन का काम करते थे। उनका बेटा क्रिकेट खेलना चाहता था। एकेडमी चालीस किलोमीटर दूर थी। रोज बरकास से लिंगमपल्ली जाना आसान नहीं था। नंबूरी नागराजू ने मना कर दिया। फिर बयाश ने कहा कि वह तिलक के लिए ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कर देंगे। वह फीस माफ कर देंगे। पिता को तिलक को लेने या छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिर वे मान गए।
उतार-चढ़ाव आम बात
वर्ल्ड कप से पहले तिलक को चोट लग गई थी। वह उदास और असुरक्षित महसूस कर रहे थे। बयाश ने यह पहले भी देखा था। उन्होंने तिलक से कहा, ‘उतार-चढ़ाव आम बात है। हर क्रिकेटर को चोट लगती है, दिग्गजों को भी। वे मानसिक रूप से मजबूत होते हैं और आपके साथ भी यह समय बीत जाएगा।’
बयाश ने नरमी नहीं दिखाई
तिलक एनसीए गए। अपना रिहैब पूरा किया। फिट और मजबूत होकर वापस आए। फिर वर्ल्ड कप शुरू हुआ और नया प्रेशर आए। शुरुआती मैच मुश्किल थे। तीसरे नंबर पर तिलक पहले की तरह नहीं खेल रहे थे। साउथ अफ्रीका से सुपर 8 में हार के बाद टीम ने उन्हें नीचे भेजा तो बयाश ने नरमी नहीं दिखाई। यह हिम्मत बढ़ाने का समय नहीं था। उन्होंने कहा, ‘तुम रन नहीं बना पा रहे हो क्योंकि तुम्हारा शॉट चयन सही नहीं है। तुम जो गलतियां कर रहे हो उन पर ध्यान दो।’
मैं अब सभी पोजिशन पर खेलूंगा और दिखाऊंगा
बयाश ने हमेशा यही किया है। तिलक की जरूरत के हिसाब से सलाह देते थे। शुरुआती सालों में वह डांटते थे। जैसे-जैसे तिलक बड़े हुए और डांट से हौसला बढ़ने लगा। लेकिन कुछ पल ऐसे भी आते हैं जब एक छात्र को अपने अध्यापक के ओरिजिनल वर्जन की जरूरत होती है। साउथ अफ्रीका के बाद यह उनमें से एक था। जिम्बाब्वे के खिलाफ कैमियो हुआ। 16 गेंद 44 रन। बयाश को फोन आया। उन्होंने कहा, ‘मैं अब सभी पोजिशन पर खेलूंगा और दिखाऊंगा।’
फाइनल से पहले तिलक की गुरु से बात
फाइनल से पहले तिलक वर्मा ने एक बार फिर अपने गुरु से सलाह ली। सलाह हमेशा की तरह सरल थी। उन्होंने कहा, ‘आपको बैटिंग के लिए जो भी क्रम दी जाए, वहां अच्छा प्रदर्शन करो। हम सपने से बस एक कदम दूर हैं। भले ही बैटिंग न आए, लेकिन अपनी बेस्ट फील्डिंग करो, बेटा।’ फाइनल में तिलक ने छह गेंदों में आठ रन बनाए। उन्होंने दो कैच लिए।
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