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सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले कुश्ती महासंघ से बात करेंगे सुशील कुमार

चयन के लिए ट्रायल की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में खारिज हो जाने के बाद दो बार के ओलंपिक पदकधारी पहलवान सुशील कुमार रियो ओलंपिक में भाग लेने की अंतिम मुहिम के तहत फिर से भारतीय कुश्ती महासंघ से बात करेंगे।
Author नई दिल्ली | June 7, 2016 05:33 am
पहलवान सुशील कुमार । (फाइल फोटो)

चयन के लिए ट्रायल की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में खारिज हो जाने के बाद दो बार के ओलंपिक पदकधारी पहलवान सुशील कुमार रियो ओलंपिक में भाग लेने की अंतिम मुहिम के तहत फिर से भारतीय कुश्ती महासंघ से बात करेंगे। इसके बाद ही वे निर्णय करेंगे कि इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाए या नहीं। सुशील के करीबी सूत्र ने कहा कि हम अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश करेंगे।

हम दोबारा भारतीय कुश्ती महासंघ से बात करेंगे और उनसे चयन ट्रायल कराने का आग्रह करेंगे। लेकिन अगर यह कारगर नहीं होता तो हम सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं क्योंकि सुशील 74 किग्रा वर्ग में सर्वश्रेष्ठ दांव है। उन्हें यह दिखाने का मौका दिया जाना चाहिए कि वे सिर्फ ओलंपिक जाने के लिए ही सक्षम नहीं हैं बल्कि वहां स्वर्ण पदक से कम नहीं जीतेंगे।

सुशील के मेंटर और ससुर महाबली सतबाल ने इस बीच कहा कि वे इस फैसले से निराश हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह पूर्व विश्व चैंपियन अपनी जिंदगी की बेहतरीन फार्म में है और उसे कम से कम ट्रायल के मौके से वंचित नहीं करना चाहिए। सतपाल ने कहा कि इस समय सुशील पूरी तरह फिट है। वह अपनी जिंदगी की सर्वश्रेष्ठ फार्म में है। अभी उसका वजन 78 किग्रा है और ट्रेनिंग सत्र के दौरान भी वह सिर्फ 74 किग्रा वर्ग में ही नहीं बल्कि अपने से ऊंचे वर्गों में भी पहलवानों को नियमित रूप से हराता रहा है। उसने हाल में 120 किग्रा वर्ग में राष्ट्रीय स्तर के पहलवान को पराजित किया।

कुश्ती महासंघ के उपाध्यक्ष पर चल सकता है झूठी गवाही का मामला- 

दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्लूएफआइ) के एक शीर्ष अधिकारी से सोमवार को पूछा कि रियो ओलंपिक के 74 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करने को लेकर चयन ट्रायल की मांग की पहलवान सुशील कुमार की याचिका में झूठा हलफनामा देने के लिए उनके खिलाफ झूठी गवाही देने का मामला आखिर क्यों नहीं शुरू किया जाए।

न्यायमूर्ति मनमोहन का नजरिया है कि डब्लूएफआइ के परिषद उपाध्यक्ष राज सिंह के खिलाफ झूठा हलफनामा देने के लिए कार्यवाही होनी चाहिए। राज सिंह ने कहा था कि 1996 में अटलांटा में हुए ओलंपिक खेलों में कुश्ती की ग्रीको रोमन स्पर्धा के 48 किग्रा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए खिलाड़ी के चयन के इरादे से ट्रायल हुए थे और मुख्य कोच के रूप में उन्होंने इसका संचालन किया था।

अदालत ने राज सिंह को नोटिस जारी किया है और 29 जुलाई तक उनसे जवाब मांगा है क्योंकि डब्लूएफआइ ने उसके समक्ष कहा था कि वे 1996 में भारतीय टीम के मुख्य कोच नहीं थे और ना ही खिलाड़ी के चयन के लिए उन्होंने कोई ट्रायल कराया था। न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि सभी वकील इस बात पर सहमत हैं कि मौजूदा मामले में राज सिंह ने झूठा हलफनामा दिया है। इस अदालत का नजरिया है कि कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि डब्लूएफआइ उपाध्यक्ष राज सिंह को दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय दंड संहिता की धारा 195 (झूठे साक्ष्य देना) के तहत नोटिस जारी करने का निर्देश दिया जाता है और उन्हें छह हफ्ते के भीतर जवाब देना होगा। झूठी गवाही देने का मामला चलाने पर विचार करने के लिए मामले की सुनवाई 29 जुलाई 2016 को होगी। अदालत ने सुशील की याचिका खारिज करने के दौरान यह निर्देश दिया।

टूर्नामेंटों से दूर रहना स्टार पहलवान सुशील कुमार के खिलाफ गया-

ओलंपिक चैंपियन अभिनव बिंद्रा का मानना है कि प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंटों से दूर रहना स्टार पहलवान सुशील कुमार के खिलाफ गया जिनकी रियो ओलंपिक में जगह बनाने की उम्मीद सोमवार को तब टूट गई जब दिल्ली हाई कोर्ट ने चयन ट्रायल की मांग करने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इससे चयनित खिलाड़ी नरसिंह पंचम यादव के मौकों को झटका लगेगा और देश को ‘नुकसान’ पहुंचेगा।

 

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