भारत के टी20 विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव ने वनडे क्रिकेट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका मानना है कि वह कभी इस फॉर्मेट में खुद को सेट नहीं कर पाए। उनका मानना है कि वनडे को वह कभी समझ नहीं पाए। इससे हिंट भी मिला है कि अब शायद उनका वनडे करियर खत्म भी मान सकते हैं। वहीं टेस्ट क्रिकेट खेलने की उन्होंने इच्छा भी जताई है।
उनका कहना है कि वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं। वहीं सूर्या के वनडे करियर की बात करें तो वह 37 मैच भारत के लिए खेले और 35 पारियों में सिर्फ 773 रन ही बनाए। उनका औसत 25.7 का है और इसमें चार अर्धशतक शामिल हैं। आखिरी बार वह 2023 वर्ल्ड कप फाइनल 19 नवंबर 2023 को एकदिवसीय मुकाबला खेले थे। अब उनकी वनडे टीम में वापसी उनकी उम्र और पिछले प्रदर्शन को देखते मुश्किल लग रही है।
सूर्यकुमार यादव ने पीटीआई के साथ एक विशेष पॉडकास्ट में बात करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वह अब क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट यानी टी20 के उस्ताद बन चुके हैं और इसे खेलने में सहज महसूस करते हैं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट न खेलने की अपनी निराशा के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने याद दिलाया कि वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेले थे जिसमें वह केवल एक पारी खेल पाए थे।
सूर्यकुमार यादव ने कहा, ”आपकी किस्मत में जो लिखा होता है, आपको वही मिलता है। मैंने भी लाल गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू किया था और 10-12 साल तक रणजी ट्राफी खेली। मैंने मुंबई में लाल गेंद से बहुत क्रिकेट खेली है क्योंकि अगर आप मुंबई में पले बढ़े होते हैं तो आप लाल गेंद से ही शुरुआत करते हैं, इसलिए सब कुछ लाल गेंद के इर्द-गिर्द ही घूमता है। लेकिन धीरे-धीरे जब हमने सफेद गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू की तो मेरा झुकाव थोड़ा उसकी तरफ हो गया।”
वनडे में निराशा, टेस्ट खेलने की इच्छा
उन्होंने आगे कहा,”इसके बाद मैं इस फॉर्मेट (टी20) में दिलचस्पी लेने लगा। मैंने वनडे (50 ओवर की क्रिकेट) में भी अच्छा खेलने की बहुत कोशिश की लेकिन कुछ खास नहीं कर पाया। टी20 क्रिकेट में जैसा चल रहा था, उसमें अपना हाथ सेट हो गया है, ऐसा बोल सकते हैं।” सूर्यकुमार से जब पूछा गया कि अगर उन्हें मौका मिले तो क्या वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहेंगे?
उन्होंने सीधा जवाब दिया,”मुझे बहुत खुशी होगी, क्योंकि जैसा कि मैंने बताया कि मैंने 2010-11 से 2020 तक लाल गेंद से काफी क्रिकेट खेली है। दस साल तक लाल गेंद से खेलना बहुत लंबा समय होता है। मुझे इस प्रारूप से बेहद लगाव था। स्वाभाविक है कि अगर मौका मिले तो फिर कौन टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलना चाहेगा।”
टेस्ट में उनका एकमात्र अनुभव 2023 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया मैच था, जब उन्होंने एक पारी में आठ रन बनाए थे। उसी साल उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे विश्व कप के फाइनल में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने 28 गेंदों में 18 रन बनाए। भारत फाइनल हार गया और सूर्यकुमार उसके बाद इस प्रारूप में कभी नहीं खेल पाए।
वनडे क्रिकेट के भविष्य पर दिया बयान
सूर्यकुमार यादव से जब पूछा गया कि ऐसे ही समय में जब टी20 कम समय में फैंस को अधिक रोमांचित करता है और टेस्ट क्रिकेट उन्हें पारंपरिक संतुष्टि देता है तो क्या वनडे का कोई भविष्य है? उन्होंने कूटनीतिक रुख अपनाते हुए वनडे को बहुत अधिक खारिज किए बिना उसको उचित सम्मान दिया। वनडे में द्विपक्षीय श्रृंखलाओं की संख्या लगातार घट रही है जो इस फॉर्मेट के पतन का संकेत दे रही है और यही आलम रहा तो वनडे क्रिकेट का अंत हो सकता है।
सूर्यकुमार ने कहा, ”मुझे लगता है कि मैंने वनडे क्रिकेट को जितना करीब से अनुभव किया है और देखा है, यह एक ऐसा प्रारूप है जहां आपको तीन अलग-अलग तरीकों से बल्लेबाजी करनी पड़ती है। कभी-कभी अगर आप जल्दी बल्लेबाजी करने जाते हैं, अगर विकेट जल्दी गिरते हैं तो आपको टेस्ट क्रिकेट की तरह बल्लेबाजी करनी पड़ती है।”
उन्होंने कहा, ”फिर आपको वनडे की तरह अच्छे स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करनी होती है और पारी के आखिरी ओवरों में टी20 प्रारूप की तरह बल्लेबाजी करनी होती है। इसलिए यह एक ऐसा प्रारूप है जिसे मैं कभी समझ नहीं पाया। मैंने इसे खेलने की पूरी कोशिश की लेकिन यह चुनौती पूर्ण प्रारूप है।”
सूर्यकुमार यादव ने वनडे विश्व कप 2023 के दौरान की गई तैयारी और माहौल को भी याद किया। उन्होंने कहा, ”जब मैं 2023 वनडे विश्व कप के लिए टीम के साथ था और मैं उसमें खेला था तब उस प्रारूप का माहौल, फाइनल से पहले की तैयारियां, वह सब 2026 और 2024 के टी20 विश्व कप में खेले गए मैचों से बिलकुल अलग था। इसलिए, इसका आकर्षण अलग है। वनडे क्रिकेट का भी अपना अलग आकर्षण है, टी20 का तो और भी अलग।”
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