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श्रीनिवासन की दलील सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को बीसीसीआइ के अध्यक्ष पद से बेदखल एन श्रीनिवासन से कहा कि उनकी यह दलील स्वीकार करना बहुत मुश्किल है कि चेन्नई सुपर किंग्स का मालिक होने और बोर्ड का मुखिया होने के बावजूद हितों का कोई टकराव नहीं था। न्यायालय ने इसके साथ ही श्रीनिवासन से कुछ तीखे सवाल भी […]

Author December 9, 2014 8:18 AM
सर्वोच्च न्यायालय ने बीसीसीआइ के अध्यक्ष पद से बेदखल एन श्रीनिवासन से कहा कि उनकी यह दलील स्वीकार करना बहुत मुश्किल है (फोटो: भाषा)

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को बीसीसीआइ के अध्यक्ष पद से बेदखल एन श्रीनिवासन से कहा कि उनकी यह दलील स्वीकार करना बहुत मुश्किल है कि चेन्नई सुपर किंग्स का मालिक होने और बोर्ड का मुखिया होने के बावजूद हितों का कोई टकराव नहीं था। न्यायालय ने इसके साथ ही श्रीनिवासन से कुछ तीखे सवाल भी किए। न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि हितों का टकराव तो पूर्वग्रह के समान है और हो सकता है कि वास्तविक पूर्वग्रह नहीं हा,े लेकिन पूर्वग्रह की संभावना होना भी अहम है।

न्यायालय ने कहा कि क्रिकेट की पवित्रता बनाए रखनी है और इसके मामलों की देखरेख करने वाले सभी व्यक्तियों को संदेह से परे होना चाहिए।न्यायाधीशों ने कहा, सभी परिस्थितियों पर गौर करते समय आपकी यह दलील स्वीकार करना बहुत मुश्किल है कि इसमें हितों का टकराव नहीं था। न्यायालय ने कहा कि इस मामले में चार बिंदु हैं जिनसे हितों के टकराव का मुद्दा उठता है क्योंकि श्रीनिवासन इंडिया सीमेंट्स के प्रबंध निदेशक हैं, इंडिया सीमेंट्स चेन्नई सुपर किंग्स की मालिक है और इसका एक अधिकारी सट्टेबाजी में शामिल है जबकि वे खुद बीसीसीआइ के मुखिया हैं।

न्यायाधीशों ने श्रीनिवासन की ओर से बहस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा, इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आपके इस तर्क को स्वीकार करना बहुत मुश्किल है कि इसमें कोई हितों का टकराव नहीं था। सिब्बल का कहना था कि मौजूदा समय में सभी गतिविधियों में हितों का टकराव नजर आता है। इस संबंध में उन्होंने कहा कि हॉकी फैडरेशन और फीफा में इसकी अनुमति है।

न्यायालय ने सुझाव दिया कि चुनाव के बाद गठित होने वाले बोर्ड को न्यायमूर्ति मुद्गल समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही न्यायालय ने जानना चाहा कि किसे बीसीसीआइ का चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।

न्यायालय ने कहा कि अगर हम उसे इसका फैसला करने की अनुमति दें तो बीसीसीआइ को हर तरह के कलंक से मुक्त होना चाहिए। न्यायालय ने सवाल किया कि किसे चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए? क्या रिपोर्ट में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जा सकती है?
न्यायालय ने कहा कि इस रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए क्रिकेट का प्रशासक सभी आरोपों और संदेह से परे होना चाहिए।

न्यायाधीशों ने श्रीनिवासन से कहा, हम यह नहीं कह रहे हैं कि फ्रेंचाइजी लेने में छल किया गया, लेकिन एक बार जब आप टीम के मालिक हो जाते हैं तो टीममें दिलचस्पी और क्रिकेट के प्रशासक के रूप में आप परस्पर विपरीत दिशा में चल रहे होते हैं।

न्यायालय ने कहा, आप एक ठेकेदार (सीएसके के मालिक के नाते) हैं और साथ ही ठेका करने वाले पक्ष (बीसीसीआइ) के मुखिया भी हैं। न्यायालय ने कहा कि इस मसले को क्रिकेट की जनता के नजरिए से देखना होगा जिसके लिए यह दीवानापन ही नहीं बल्कि धर्म भी है।

 

 

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