ऑस्ट्रेलिया-बांग्लादेश के बीच मैके में खेला गया दूसरा टेस्ट के दो दिन के अंदर खत्म होने के बाद लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने भारतीय पिचों के आलोचकों को आड़े हाथ लिया है। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच मैके में दूसरा टेस्ट छठे सत्र की शुरुआत में समाप्त हो गया। पहले दिन 18 विकेट गिरे। मिचेल स्टार्क ने बांग्लादेश की पहली पारी में 22 गेंदों पर पांच विकेट लिए। इसके बाद शोरफुल इस्लाम ने छह विकेट लेकर पहले दिन का खेल खत्म किया। उन्होंने अगले दिन एक और विकेट लिया।
दूसरे दिन 12 विकेट गिरे, जिसमें स्टार्क ने चार और पैट कमिंस ने तीन विकेट लिए। बांग्लादेश अपनी दो पारियों में 65 और 94 रन पर आउट हो गया। ऑस्ट्रेलिया अपनी एकमात्र पारी में 210 रन ही बना पाया। तेज गेंदबाजों ने इस जीवंत पिच पर दबदबा दिखाया। मैके की पिच के मद्देनजर गावस्कर ने द हिंदू के लिए अपने कॉलम में भारत की स्पिनिंग पिचों की आलोचना को पाखंड बताया।
बहाने तो बहुत तेज बनाए जाते हैं
गावस्कर ने लिखा, ‘ऑस्ट्रेलिया में एक और टेस्ट मैच दो दिन के अंदर खत्म हो गया। पिछले कुछ सालों में वहां ऐसा चार बार हुआ है। हमें अभी तक ट्रैम्पोलिन-बाउंस पिचों की कोई आलोचना सुनने को नहीं मिली है, जिनसे ऐसे नतीजे मिलते हैं। बहाने तो बहुत तेज बनाए जाते हैं। ओह, ग्राउंड्समैन, सॉरी, टर्फ एग्जीक्यूटिव से गलती हो गई। उसने मौसम के अनुमान के हिसाब से काम किया। गर्म मौसम का अनुमान था इसलिए उसने थोड़ी और घास छोड़ दी और इससे बाउंस ज्यादा हो गया।’
ल्लेबाज के पास उछाल से निपटने की तकनीक नहीं थी
गावस्कर ने लिखा, ‘क्रिकेट को लेकर दूसरा बहाना यह बनाया जाता है कि बल्लेबाज के पास उछाल से निपटने की तकनीक नहीं थी। यह पिच की गलती नहीं थी। यह बहाना थोड़ा-बहुत माना जा सकता था अगर मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने अच्छी बैटिंग की होती, लेकिन जब घरेलू टीम के बैट्समैन भी रन या अच्छी पार्टनरशिप नहीं बना पाते तो यह पिच के बारे में क्या बताता है?’
मैके की पिच को खराब रेटिंग न दिया जाना हैरानी की बात नहीं
गावस्कर ने कहा, ‘आम तौर पर रेफरी की यह इच्छा रहती है कि पुरानी ताकतों के मीडिया से उन्हें तारीफ मिले,इसलिए मैके की पिच को खराब रेटिंग न दिया जाना कोई हैरानी की बात नहीं होगी। ऐसा हमने हाल के सालों में इसी तरह के दो-दिन के मैचों के लिए देखा है। लेकिन अगर भारत में कोई मैच तीन दिन में खत्म हो जाता है तो पिच,बीसीसीआई और भारतीय क्रिकेट के बारे में हर तरह की बुरी रिपोर्ट और इल्जाम लगाए जाएंगे। यह दोहरापन दिमाग खराब कर देता है।’
देखते हैं मैच रेफरी मैके पिच को क्या रेटिंग देते हैं
गावस्कर ने लिखा, ‘तेज गेंदबाजी के सामने नाकाबिल होने का आम बहाना बनाया जाता है। जब विदेशी बल्लेबाज स्पिन होती बॉल नहीं खेल पाते तो कोई ऐसा नहीं कहता। तब काबिलियत की कमी नहीं होती बल्कि पिच में कमियां होती है। तेज पिचों पर रन नहीं बनाने वाले बैट्समैन को रेटिंग नहीं मिलती, लेकिन धीमी पिचों पर विकेट नहीं लेने वाले उनके तेज बॉलर को फिर भी महान कहा जाता है। जैसा कि मैंने पहले कहा दोहरे चरित्र हैरान करने वाले हैं। देखते हैं मैच रेफरी मैके पिच को क्या रेटिंग देते हैं, लेकिन भारतीय प्रशंसकों को ज्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। ऑस्ट्रेलियाई पहले से ही आराम से सांस ले रहे हैं यह जानते हुए कि उन्हें चिंता करने की कोई बात नहीं है।’
मैके टेस्ट 125 ओवर में समाप्त
ऑस्ट्रेलिया-बांग्लादेश के बीच 2 मैचों की टेस्ट सीरीज दो दिन भी नहीं चला। मैके में कुल 125 ओवर का खेल हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को पारी और 51 रनों से रौंद दिया। बांग्लादेश की टीम दूसरी पारी में वह 95 रन पर सिमट गई। इस तरह से 2 मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर रही। पूरी खबर पढ़ें।
