भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम सिर्फ रिकॉर्ड के कारण याद नहीं किए जाते, बल्कि इसलिए अमर हो जाते हैं क्योंकि उन्होंने खेल की दिशा बदल दी। सुनील मनोहर गावस्कर ऐसा ही एक नाम हैं। उन्होंने उस दौर में भारतीय बल्लेबाजी को नई पहचान दी, जब दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज बिना हेलमेट बल्लेबाजों को डराने के लिए जाने जाते थे। सुनील गावस्कर ने न सिर्फ उन गेंदबाजों का डटकर सामना किया, बल्कि यह भी साबित किया कि तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती किसी भी रफ्तार से बड़ी ताकत हो सकती है।
आज भारतीय बल्लेबाज दुनिया के किसी भी देश में जाकर आत्मविश्वास से खेलते हैं। इस आत्मविश्वास की नींव रखने वालों में अगर किसी एक बल्लेबाज का नाम सबसे ऊपर रखा जाए तो वह सुनील गावस्कर हैं। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को सम्मान दिलाया और यह विश्वास भी कि भारत सिर्फ स्पिन गेंदबाजों का देश नहीं, बल्कि विश्व स्तरीय बल्लेबाजों की भी भूमि है।
तकनीक इतनी मजबूत कि गेंदबाजों का धैर्य टूट जाता था
मुंबई में 10 जुलाई 1949 को जन्में सुनील गावस्कर को क्रिकेट इतिहास के महानतम सलामी बल्लेबाजों में गिना जाता है। उनकी बल्लेबाजी का सबसे बड़ा आधार उनकी लगभग त्रुटिहीन तकनीक थी। ऑफ स्टंप की शानदार समझ, गेंद की लंबाई को तुरंत पढ़ लेने की क्षमता, दाएं और बाएं दोनों पैरों पर समान दक्षता तथा बेहतरीन संतुलन उन्हें अलग बनाते थे।
सुनील गावस्कर की रक्षात्मक बल्लेबाजी को आज भी क्रिकेट की पाठ्यपुस्तक माना जाता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि बल्लेबाजी की कला सीखने वाले खिलाड़ियों के लिए सुनील गावस्कर की तकनीक किसी आदर्श से कम नहीं है। यही वजह थी कि उनका विकेट हासिल करना दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों के लिए भी आसान नहीं होता था।
सुनील गावस्कर के पास लगभग हर तरह का शॉट मौजूद था, लेकिन उन्होंने कभी अनावश्यक आक्रामकता को प्राथमिकता नहीं दी। टीम की जरूरत के अनुसार खेलने की कला ही उन्हें महान बनाती है।
बिना हेलमेट 10 हजार रन
आज के दौर में हेलमेट, आर्म गार्ड और आधुनिक सुरक्षा उपकरण सामान्य बात हैं, लेकिन सुनील गावस्कर ने अपने करियर का अधिकांश हिस्सा बिना हेलमेट खेले बिताया। सामने माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, मैल्कम मार्शल, जोएल गार्नर और अन्य घातक तेज गेंदबाज होते थे, जिनकी रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास पहुंचती थी।
ऐसे माहौल में लगभग 16 वर्षों तक बल्लेबाजी करते हुए 10 हजार से अधिक टेस्ट रन बनाना सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बल्कि अद्भुत साहस, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है।
वेस्टइंडीज में नए सितारे का जन्म
1971 का वेस्टइंडीज दौरा भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण शृंखलाओं में गिना जाता है। सुनील गावस्कर ने अपने पहले ही टेस्ट दौरे पर ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरी क्रिकेट दुनिया को चौंका दिया।
सुनील गावस्कर ने चार टेस्ट मैचों में 774 रन बनाए। इस दौरान चार शतक और तीन अर्धशतक लगाए तथा औसत 154.80 रही। पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट में उन्होंने दोनों पारियों में शतक जमाया, जिसमें एक दोहरा शतक भी शामिल था। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह उस समय टेस्ट इतिहास के दूसरे बल्लेबाज बने और आज भी ऐसा करने वाले एकमात्र भारतीय हैं। यहीं से दुनिया को समझ में आ गया कि भारतीय बल्लेबाजी अब सिर्फ घरेलू परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहने वाली।
वेस्टइंडीज के खिलाफ सबसे भरोसेमंद
सुनील गावस्कर का नाम आते ही वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी स्वतः याद आती है। जिस टीम के तेज गेंदबाजों से दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाज घबराते थे, उसी आक्रमण के खिलाफ सुनील गावस्कर ने सबसे अधिक सफलता हासिल की।
सुनील गावस्कर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 65 से अधिक की औसत से रन बनाए। उनका सर्वोच्च टेस्ट स्कोर 236 रन भी इसी टीम के खिलाफ आया। यह सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी, बल्कि उस दौर के सबसे भयावह गेंदबाजी आक्रमण के सामने धैर्य और कौशल का सर्वोच्च उदाहरण थी।
1979 का द ओवल टेस्ट: नतीजा ड्रॉ, लेकिन भारतीय क्रिकेट जीता
क्रिकेट इतिहास की महान पारियों की चर्चा हो और 1979 के द ओवल टेस्ट में खेली गई सुनील गावस्कर की 221 रन की पारी का उल्लेख न हो, ऐसा संभव नहीं। इंग्लैंड ने भारत के सामने 438 रन का विशाल लक्ष्य रखा था। उस समय चौथी पारी में इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करना लगभग असंभव माना जाता था, लेकिन सुनील गावस्कर ने ऐसी बल्लेबाजी की कि भारत जीत के बेहद करीब पहुंच गया।
आखिरकार मैच ड्रॉ रहा और भारत लक्ष्य से सिर्फ नौ रन दूर रह गया। हालांकि, जीत नहीं मिली, लेकिन उस पारी ने दुनिया को दिखा दिया कि भारतीय टीम अब सिर्फ सम्मानजनक हार स्वीकार करने वाली टीम नहीं रही। कई क्रिकेट इतिहासकार मानते हैं कि इसी मैच ने विदेशी धरती पर भारतीय बल्लेबाजी की सोच बदल दी।
राहुल द्रविड़ से पहले ‘दीवार’ की असली परिभाषा
आज ‘द वॉल’ का नाम आते ही राहुल द्रविड़ याद आते हैं, लेकिन बल्लेबाजी में विकेट की कीमत समझाने का काम सुनील गावस्कर ने उससे कई दशक पहले कर दिया था। सुनील गावस्कर की बल्लेबाजी ने पूरी पीढ़ी को सिखाया कि हर गेंद पर चौका लगाना महानता नहीं है। सही गेंद का इंतजार करना, गेंदबाज को थकाना और अपनी टीम के लिए लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
34 शतक… जब अजेय माना जाता था यह रिकॉर्ड
सुनील गावस्कर टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन पूरे करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। उनके नाम 34 टेस्ट शतक थे, जो लंबे समय तक विश्व रिकॉर्ड रहा। बाद में सचिन तेंदुलकर ने इसे पीछे छोड़ा, लेकिन सुनील गावस्कर के रिकॉर्ड का महत्व कभी कम नहीं हुआ।
दरअसल, उनकी उपलब्धियों का मूल्य केवल आंकड़ों से नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने उस दौर में यह सब हासिल किया, जब बल्लेबाजी कहीं अधिक कठिन थी, सुरक्षा उपकरण सीमित थे और पिचें भी आज जैसी बल्लेबाजों के अनुकूल नहीं होती थीं।
सीमित ओवर क्रिकेट में संघर्ष भी रहा
सुनील गावस्कर का करियर यह भी सिखाता है कि महान खिलाड़ी भी हर प्रारूप में समान रूप से सफल नहीं होते। वनडे क्रिकेट में उन्हें टेस्ट जैसी सफलता नहीं मिली। 1979 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 174 गेंदों पर 36 रन की उनकी पारी आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और विवादित पारियों में गिनी जाती है। वह 1983 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उनके अनुभव ने टीम को मजबूती प्रदान की।
मैदान से बाहर भी उतनी ही प्रभावशाली आवाज
संन्यास के बाद सुनील गावस्कर क्रिकेट से कभी दूर नहीं हुए। उन्होंने कमेंटेटर, स्तंभकार और विश्लेषक के रूप में नई पहचान बनाई। भारतीय क्रिकेट प्रशासन से भी जुड़े और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की क्रिकेट समिति के अध्यक्ष रहे। स्पष्ट राय रखने के कारण वह कई बार विवादों में भी रहे, लेकिन उनकी बेबाक शैली ने उन्हें क्रिकेट जगत की सबसे प्रभावशाली आवाजों में शामिल रखा।
भारतीय क्रिकेट की असली विरासत
सुनील गावस्कर की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद उनके 10 हजार 122 टेस्ट रन, 34 शतक या अनगिनत रिकॉर्ड नहीं हैं। उनकी सबसे बड़ी विरासत वह मानसिक बदलाव है, जो उन्होंने भारतीय क्रिकेट में पैदा किया। सुनील गावस्कर ने भारतीय बल्लेबाजों को सिखाया कि विदेशी परिस्थितियां डरने की नहीं, चुनौती स्वीकार करने की जगह हैं।
सुनील गावस्कर ने यह विश्वास जगाया कि भारतीय खिलाड़ी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों के सामने बराबरी से खड़े हो सकते हैं। आज जब विराट कोहली, रोहित शर्मा, शुभमन गिल या यशस्वी जायसवाल विदेशी धरती पर बड़ी पारियां खेलते हैं, तो उनकी सफलता की जड़ें कहीं न कहीं उस रास्ते तक जाती हैं, जिन्हें सबसे पहले सुनील गावस्कर ने बनाया था।
क्रिकेट में कुछ खिलाड़ी रिकॉर्ड बनाते हैं, कुछ मैच जिताते हैं और कुछ पूरे युग की सोच बदल देते हैं। सुनील गावस्कर तीसरी श्रेणी (पूरे युग की सोच बदलने वाले) के खिलाड़ी हैं, इसलिए उन्हें केवल महान बल्लेबाज कहना पर्याप्त नहीं होगा। वह भारतीय क्रिकेट के आत्मविश्वास की पहली मजबूत नींव हैं। जनसत्ता की ओर से महान सुनील गावस्कर को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
Sunil Gavaskar: 16 साल क्रिकेट खेले, 40 साल से कमेंटेटर; मुंबई और गोवा में आलीशान घर, शुरुआत की थी सुनील गावस्कर प्रेजेंट्स की
2014 में आईपीएल सीजन के समय सुनील गावस्कर को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
