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वर्ल्ड चैंपियनशिप से नेशनल तक में जीता गोल्ड, अब नौकर का काम करने को मजबूर; राजनाथ भी दे चुके मदद का भरोसा, पर सुनवाई नहीं

कई खिलाड़ियों ने अपने खेल में देश का नाम रोशन तो किया है लेकिन बाद में गुमनामी में खो गए हैं। देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना भी उनके जीवन यापन के काम नहीं आ सका है। यह एक ऐसी लड़की के प्रति सरकार की उदासीनता का एक मामला है, जिसने देश का नाम रोशन किया है।

सुनील नेशनल और वर्ल्ड पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीत चुकी हैं। (सोर्स – ट्विटर)

भारत में कितने ही ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपने खेल में देश का नाम रोशन तो किया है लेकिन बाद में गुमनामी में खो गए हैं। देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना भी उनके जीवन यापन के काम नहीं आ सका है। यह एक ऐसी लड़की के प्रति सरकार की उदासीनता का एक मामला है, जिसने देश का नाम रोशन किया है। हरियाणा की रोहतक जिले के सीसर खास गांव में रहने वाली लड़की सुनीता ने भारोत्तोलन में कई पदक जीते हैं, लेकिन वो अब वो घर-घर काम करने को लेकर मजबूर है।

पिछड़ा वर्ग से आने वाली सुनीता का परिवार गरीब है। दो जून की रोटी के लिए भी उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता है। गरीबी का ये आलम है कि सुनीता को कई बार रोटी और मिर्ची खाकर रहना पड़ा है। इसके बावजूद अपनी फिटनेस और ताकत बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करती हैं। वो अपने खेल का अभ्यास करने के लिए पेड़ों और ईंटों का उपयोग कर रही हैं। मिट्टी के चूल्हे पर रोटियां बनाने वाली सुनीता के पिता एक मजदूर हैं। उनकी मां दूसरों के घरों में काम करती हैं।

सुनीता ने कहा, ‘‘मेरे पिता एक मजदूर हैं और मां घरेलू सहायिका के रूप में काम करती हैं। जब भी उन्हें स्थानीय समारोहों और मिलन समारोहों में खाना पकाने का काम मिलता है तो मैं अपनी माँ की भी मदद करती हूं। मैं घर का काम भी करती हूं और जीवन यापन के लिए पैसे वालों के घर में उनके बुजुर्गों की सेवा भी करती हूं।’’

माता-पिता जमुना देवी और ईश्वर सिंह ने निजी साहूकारों से सुनीता के प्रशिक्षण और खेल आयोजनों में भाग लेने के लिए ऋण लिया है। जमुना कहती हैं, ‘‘हमें 2020 में वर्ल्ड स्ट्रेंथ-लिफ्टिंग चैंपियनशिप के लिए बैंकॉक भेजने के लिए एक निजी साहूकार से भारी ब्याज पर 1.5 लाख रुपए का कर्ज लेना पड़ा। हम कर्ज चुकाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।’’

सुनीता ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने छत्तीसगढ़ में आयोजित नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप-2019 में गोल्ड मेडल और पश्चिम बंगाल में नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप-2021 में सिल्वर मेडल भी हासिल किया है। स्थानीय विधायक बलराज कुंडू से लेकर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह तक के राजनीतिक नेताओं ने सुनीता की उपलब्धियों को सराहा है और उन्हें मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन आज तक कोई मदद नहीं मिली है।

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