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… जब भारतीय टीम के ‘कर्नल’ ने स्टेडियम में मौजूद फैंस को जड़ दिया तमाचा

वेंगसरकर ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर की बतौर ओपनर शुरुआत 1975 में न्यूजीलैंड के खिलाफ की थी। लेकिन इसमें उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। मगर वेंगसरकर ने हार नहीं मानी और समय ने भी उनको मौका दिया।

सन 1956 में आज ही के दिन जन्मे दिलीप बलवंत वेंगसरकर को उनके फैंस ‘कर्नल’ के नाम से बुलाते हैं। 70-80 के दशक में भारतीय टीम की शान माने जाने वाले वेंगसरकर को उस वक्त भारत के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज के रूप में जाना जाता था।

1977-78 के बीच ऑस्ट्रेलिया दौरे में वेंगसरकर ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए खुद को भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर लिया था। भारत के लिए तीसरे नंबर पर बैटिंग करने वाले इस कलात्मक बल्लेबाज ने 15 सालों तक टीम में अपनी धाक जमाए रखी। 116 टेस्ट मैचों में 42.13 की औसत से वेंगसरकर ने 6868 रन बनाए, जबकि 129 वनडे में 3508 रन जड़े। इसके साथ ही इस शानदार बल्लेबाज ने 10 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी भी की।

वेंगसरकर ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर की बतौर ओपनर शुरुआत 1975 में न्यूजीलैंड के खिलाफ की थी। लेकिन इसमें उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। मगर वेंगसरकर ने हार नहीं मानी और समय ने भी उनको मौका दिया। 1979 में पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में वेंगसरकर ने अपनी बल्लेबाजी से लोगों को अपना मुरीद बना लिया।

वेंगसरकर से जुड़ा एक किस्सा बहुत ही रोचक है। हुआ यूं कि 1994 में वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई और पंजाब के बीच मैच चल रहा था। टीम से रिटायरमेंट ले चुके वेंगसरकर इस मैच को देखने स्टेडियम में ही बैठे थे। इस बीच वहां मौजूद कुछ दर्शक उन्हें लगातार परेशान करने लगे। इससे वेंगसरकर को इतना गुस्सा आ गया कि वह दाहिने साइड बने स्टैंड में कूद पड़े और परेशान करने वालों की ओर दौड़ना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं गेट के पास उन शरारती लोगों में से एक को पकड़कर एक जोरदार थप्पड़ भी मार दिया। 

61 साल के वेंगसरकर एक वक्त कूपर्स और लेब्रांड रेटिंग में एलन बॉर्डर और क्लाइव लॉयड से भी आगे निकल चुके थे। 1983 में वर्ल्डकप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे वेंगसरकर को 1987 में कप्तानी का भार सौंपा गया। टेस्ट मैचों में 17 शतक जड़ने वाले इस खिलाड़ी ने बतौर मुख्य चयनकर्ता और मुंबई क्रिकट टीम के उपाध्यक्ष भी जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्हें भारतीय टीम में अहम योगदान के लिए 1987 में विस्डन क्रिकेटर ऑफ द इयर समेत पद्म श्री से भी नवाजा गया था। साथ ही बीसीसीआई ने उन्हें सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट से भी सम्मानित किया।

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