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कभी जुर्म की दुनिया में अखिलेश पॉल की बोलती थी तूती; फुटबॉल ने बदली जिंदगी, वर्ल्ड कप में कप्तानी की, आमिर खान को सुनाई थी दर्दभरी कहानी

अभिषेक पॉल की परवरिश नागपुर की एक बस्ती में हुई थी। गुंडागर्दी, शराब, ड्रग्स के साथ उनका पाला बहुत जल्दी पड़ गया था। जुर्म की दुनिया ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। अचानक हालात ऐसे हो गए कि उनकी जिंदगी पर खतरना मंडराने लगे। उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था, तभी फुटबॉल ने उनकी जिंदगी बदल दी।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: December 26, 2020 1:20 PM
Amir Khan Akhilesh Paulअखिलेश पॉल आमिर खान के स्टार प्लस पर प्रसारित हुए शो सत्यमेव जयते में आए थे। (स्क्रीनशॉट)

अभिषेक पॉल आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह ब्राजील में खेले गए स्लम सॉकर वर्ल्ड कप में इंडिया टीम के कैप्टन भी रह चुके हैं। हालांकि, एक समय अखिलेश का खेल से दूर-दूर तक रिश्ता नहीं था। जुर्म की दुनिया में उनकी तूती बोलती थी। फुटबॉल ने उनकी जिंदगी बदल दी। इसमें सबसे बड़ा हाथ रहा स्लम सॉकर के संस्थापक प्रोफेसर विजय बारसे का। अखिलेश ने आमिर खान के शो सत्यमेव जयते में अपनी दर्दभरी कहानी बयां की थी।

अखिलेश ने शो में आमिर को बताया था कि बचपन से ही उनका सपना बड़ा होकर भाई बनना चाहते थे। अखिलेश ने बताया, ‘किसी को भी मारना, किसी के ऊपर बोरा डाल देना। छीन लेना, हपका देना (डराना)। यह सब मेरे लिए नॉर्मल था।’ आमिर ने पूछा, ‘आपकी जिंदगी में वह क्या चीज हुई जिससे बदलाव आया।’ अखिलेश ने बताया, ‘सर जिस एरिया में मैं रहता था, वहां एक कॉलेज था। वहां एक प्रोफेसर थे विजय बारसे। कॉलेज के अपोजिट में हमारा अड्डा था। प्रोफेसर हमको रोज देखते थे। एक दिन उन्होंने हम लोगों को बुलाया। हम लोग जब पहुंचे तो उन्होंने पूछा फुटबॉल खेलेंगे आप लोग? इस पर मैंने पूछा कितने पैसे मिलेंगे? उन्होंने कहा कि हर किसी को 5-5 रुपए। उस समय मैं 14-15 साल का था।’

अखिलेश ने बताया, ‘यह सिलसिला कुछ दिन चला। फिर उन्होंने पैसे देने बंद कर दिए, लेकिन हमारा फुटबॉल खेलना जारी रहा। कुछ दिन बाद उन्होंने फुटबॉल देना भी बंद कर दी, लेकिन तब हमको फुटबॉल खेलने का नशा हो चुका था। हालांकि, इसका आभास हमें नहीं था। इस बीच, मेरे क्राइम का रेट बहुत तेजी से बढ़ रहा था। मैं एक बार किसी की प्रॉपर्टी पर कब्जा करने जा रहा था। तभी विरोधी गैंग के गुंडों ने मुझे घेर लिया।’

अखिलेश ने कहा, ‘मैं भागा और भागता ही गया। लेकिन मैं ऐसी स्थिति में फंस चुका था कि मैं कहीं पर भी नहीं जा सकता था। पुलिस मुझे ढूंढ रही थी। गुंडे मेरी जान के प्यासे थे। मैं कब्रिस्तान में छिप गया जाकर। लोगों की जूठन खाने लगा।’ आमिर ने पूछा, ‘अखिलेशजी फिर आगे क्या हुआ?’

अखिलेश ने बताया, ‘किसी ने मुझे वकील बताया। वकील ने सरेंडर कराया। कोर्ट से मुझे जमानत मिली। एक बार मुझे फुटबॉल खेलते कुछ बच्चे दिखे। मैं भी वहां खड़ा हो गया। तभी वहां विजय बारसे सर आए। मैं उन्हें देखकर शॉक्ड रह गया। उन्होंने मुझे देखकर पूछा अभी क्या चालू है? मैंने उनसे कहा जैसा मैं पहले था आज उससे भी ज्यादा बुरी स्थिति है।’

अखिलेश ने बताया, ‘इसके बाद उन्होंने बोला कुछ समय निकालकर बच्चों के साथ प्रैक्टिस किया करो। फिर मैं डिस्ट्रिक्ट लेवल के लिए खेला। मेरी परफॉर्मेंस उन्हें अच्छी लगी। मुझे स्टेट लेवल के लिए चुन लिया गया। फिर मैंने ज्यादा मेहनत की। मेरी परफॉर्मेंस और अच्छी हो गई। इसके बाद इंडिया टीम में चयन हो गया।’

आमिर ने पूछा, ‘यह जो सॉकर की टीम थी, इसमें कौन से बच्चे हिस्सा लेते हैं।’ अखिलेश ने कहा, ‘मेरे जैसे। मतलब जो गरीब बच्चे हैं, अंडरप्रिविलेज्ड बैकग्राउंड से, झोपड़पट्टी के बच्चे।’ आमिर ने शो में बैठी ऑडियंस को बताया, ‘अखिलेशजी, ना सिर्फ हिंदुस्तान की टीम के लिए चयन हुए, बल्कि हिंदुस्तानी टीम के कैप्टन भी बने। इनकी अगुआई में भारतीय टीम ने ब्राजील में हुए स्लम सॉकर वर्ल्ड कप में हिस्सा भी लिया।’

बता दें कि अभिषेक पॉल की परवरिश नागपुर की एक बस्ती में हुई थी। गुंडागर्दी, शराब, ड्रग्स के साथ उनका पाला बहुत जल्दी पड़ गया था। देखते ही देखते जुर्म की दुनिया ने उन्हें पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया। हालात यहां तक पहुंच गए थे कि पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ तरह तरह के मामलों में दर्जनों केस दर्ज हो गए थे। दूसरी तरफ क्रिमिनल गैंग की आपसी रंजिस के चलते विरोधी गैंग के बदमाश भी उनकी जान के प्यासे थे।

जिंदगी ऐसे मोड़ पर आ गई थी कि पुलिस से बचते तो गुंडे उन्हें मार देते और गुंडो से बचते तो पुलिस पकड़ने के लिए तैयार थी। अखिलेश को अपनी जिंदगी बचाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। ऐसे में फुटबॉल ने उनकी जिंदगी बदल दी। अब वह जरूरतमंद बच्चों को फुटबॉल सिखाते हैं। अखिलेश ने आमिर के शो में बताया था कि एक समय लोग उन्हें भाऊ कहते थे। मैं पढ़ा लिखा नहीं हूं, लेकिन इसके बावजूद अब मुझे लोग सर बुलाते हैं। यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।

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