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सुप्रीम कोर्ट के सुझाव से संकट में श्रीनिवासन और सीएसके

एन श्रीनिवासन के क्रिकेट के प्रशासक बने रहने और आइपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की स्थिति को लेकिन व्याप्त अनिश्चितता उस समय और गहरी हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि क्या बीसीसीआइ के चुनावों से उन लोगों को बाहर रखा जा सकता है जिनके नाम मुद्गल समिति की रिपोर्ट में आए […]

संकट में श्रीनिवासन और सीएसके (फोटो: भाषा)

एन श्रीनिवासन के क्रिकेट के प्रशासक बने रहने और आइपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की स्थिति को लेकिन व्याप्त अनिश्चितता उस समय और गहरी हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि क्या बीसीसीआइ के चुनावों से उन लोगों को बाहर रखा जा सकता है जिनके नाम मुद्गल समिति की रिपोर्ट में आए हैं और क्या चेन्नई सुपर किंग्स की फ्रेंचाइजी रद्द की जा सकती है।

न्यायमूर्ति मुद्गल समिति की रिपोर्ट के आधार पर गुरुवार को तीन घंटे से भी ज्यादा समय तक चली सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने जानना चाहा कि यदि श्रीनिवासन की इंडिया सीमेंट्स के स्वामित्व वाली चेन्नई सुपर किंग्स की फ्रेंचाइजी रद्द कर दी जाए तो क्या होगा और क्या हितों के टकराव का मसला बरकरार रहेगा।

न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाले खंडपीठ ने मुद्गल समिति की रिपोर्ट के आधार पर सट्टेबाजी में कथित संलिप्तता के लिए चेन्नई सुपर किंग्स और राज कुंद्रा के स्वामित्व वाली राजस्थान रॉयल्स और उसके अफसरों के खिलाफ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने पर बीसीसीआई से भी सवाल किए। न्यायाधीशों ने श्रीनिवासन का पक्ष लेने के लिए बीसीसीआइ को भी आड़े हाथ लिया।

शीर्ष अदालत ने श्रीनिवासन के बीसीसीआइ का मुखिया होने और चेन्नई सुपर किंग्स का मालिक होने के कारण हितों के टकराव से जुड़े सवाल भी पूछे। चेन्नई सुपर किंग्स के स्वामित्व की जानकारी हासिल करने के इरादे से न्यायालय ने निर्वासित अध्यक्ष से इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड की शेयर होल्डिंग और निदेशक मंडल का ब्योरा भी मांगा है। श्रीनिवासन के अनुसार कंपनी इस टीम की मालिक है। श्रीनिवासन इंडिया सीमेंट्स के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं।

श्रीनिवासन और कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया था कि आइपीएल-6 के दौरान सट्टेबाजी के आरोप में गिरफ्तार गुरुनाथ मेयप्पन चेन्नई सुपर किंग्स का अधिकारी था। उन्होंने पहले मेयप्पन को क्रिकेट प्रेमी बताते हुए दावा किया था कि उनका टीम प्रबंधन से कुछ लेना देना नहीं है।

न्यायालय ने सुझाव दिया कि बीसीसीआइ अपने चुनाव कार्यक्रम को जारी रख सकता है लेकिन मुद्गल रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम आए हैं, उन्हें इससे दूर रखना चाहिए। नया बोर्ड इस रिपोर्ट के नतीजों के आधार पर की जाने वाली कार्रवाई के बारे में फैसला कर सकता है। पीठ ने कहा, ‘हम कार्रवाई क्यों करें। आप खुद फैसला कीजिए। इस मसले पर बचाव की मुद्रा में आने की जरूरत नहीं है। हम आपको मौका देंगे। इस विषय पर गौर कीजिए।

बीसीसीआइ को सारे विवाद को खत्म करना चाहिए। न्यायाधीशों ने कहा कि इस विवाद में शामिल सभी व्यक्तियों को अलग रखकर बोर्ड के चुनाव हो सकते हैं और फिर नया बोर्ड फैसला ले सकता है।

अदालत ने कहा कि दो पहलू हैं जिन पर गौर करना होगा और ये हैं कि चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रायल्स व श्रीनिवासन, मेयप्पन और कुंद्रा का क्या होगा। न्यायाधीशों ने कहा कि टीम के सदस्यों और कप्तान के चयन की प्रक्रिया हो सकता है कि प्रत्यक्ष तौर पर नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से मेयप्पन अपनी पत्नी के जरिए करते हों जो इंडिया सीमेंट्स के बोर्ड की सदस्य हैं और कंपनी में उनके शेयर हैं।

पीठ ने कहा- हो सकता है कि कंपनी में किसी प्रकार की हिस्सेदारी नहीं होने के बावजूद अंतत: टीम पर उसका नियंत्रण हो। हमकंपनी के बोर्ड के सदस्यों और इसमें श्रीनिवासन और उनके परिवार की हिस्सेदारी के बारे में जानना चाहते हैं। न्यायालय ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि वे कौन लोग हैं जिन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के बारे में कंपनी की ओर से फैसला लिया। हम चेन्नई सुपर किंग्स के असली मालिक के बारे में जानना चाहते हैं।

 

 

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