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स्पोर्ट्स फेडरेशंस को मान्यता देने का मामला: दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा खेल मंत्रालय, खेलों के विकास की दी दलील

दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 फरवरी को एक आदेश दिया था। उसमें कहा गया था कि खेल मंत्रालय फेडरेशन से जुड़े किसी भी फैसले से पहले हाई कोर्ट की मंजूरी लेगा, लेकिन अस्थायी मान्यता से जुड़े नोटिफिकेशन को हाई कोर्ट की मंजूरी लिए बिना ही जारी कर दिया गया था।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: June 30, 2020 10:14 PM
Kiren Rijijuखेल मंत्री किरण रिजीजू।

युवा मामले और खेल मंत्रालय ने 54 नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशंस को दोबारा मान्यता देने के लिए एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट को दरवाजा खटखटाया है। मंत्रालय ने हाई कोर्ट के 24 जून के आदेश पर 25 जून को 54 नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन की इस साल की अस्थायी मान्यता रद्द कर दी थी। खेल मंत्रालय ने दो जून को 54 स्पोर्ट्स फेडरेशन को अस्थायी मान्यता दी थी, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद उसे इसे वापस लेना पड़ा था। अब खेल मंत्रालय ने अपनी अर्जी में दलील दी है कि राष्ट्रीय खेल महासंघों को अस्थायी मान्यता देने से राष्ट्रीय स्तर पर खेलों को बढ़ावा मिल सकेगा और उनका विकास किया जा सकेगा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 फरवरी को एक आदेश दिया था। उसमें कहा गया था कि खेल मंत्रालय फेडरेशन से जुड़े किसी भी फैसले को करने से पहले हाई कोर्ट की मंजूरी लेगा, लेकिन अस्थायी मान्यता से जुड़े नोटिफिकेशन को हाई कोर्ट की मंजूरी लिए बिना ही जारी कर दिया गया था। खेल मंत्रालय ने 54 नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन को 30 सितंबर तक अस्थायी मान्यता देने के लिए दोबारा अर्जी लगाई है।

केंद्र सरकार के वकील अनिल सोनी ने ‘आजतक’ से कहा, कोर्ट हमारी अर्जी पर 2 जुलाई को सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कोरोना के चलते फेडरेशन का ऑडिट नहीं हो पाया है, इसीलिए हमने 30 सितंबर तक के लिए अस्थायी मान्यता देने को अर्जी लगाई है। मान्यता न होने के कारण फेडरेशन के खिलाड़ी प्रैक्टिस करने स्टेडियम तक नहीं जा सकते।

उन्होंने कहा, अस्थायी मान्यता रद्द होने के बाद सभी फेडरेशन को मिलने वाली सरकारी आर्थिक मदद बंद हो जाएगी। इसके अलावा फेडरेशन में काम करने वाले लोगों की तनख्वाह भी सभी फेडरेशन नहीं दे सकते। मान्यता न होने की सूरत में फेडरेशन के पास स्पॉन्सर्स भी नहीं रहते। फेडरेशन चलाने के लिए अस्थायी मान्यता जरूरी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 जून को दिए आदेश में स्पष्ट कर दिया था कि खेल मंत्रालय न सिर्फ अपने किसी भी फैसले की जानकारी देगा, बल्कि फैसला करने से पहले कोर्ट की इजाजत भी लेगा। इन सभी फेडरेशन को एक साल की अस्थायी मान्यता (प्रोविजनल रिकॉग्निशन) मिलती थी, जिसे खेल मंत्रालय को रिन्यू करना होता है। मार्च में कोरोना होने के कारण मान्यता देने में खेल मंत्रालय को देरी हुई। इसके चलते इन सभी स्पोर्ट्स फेडरेशन को आर्थिक राशि सरकार की तरफ से जारी नहीं हो सकी है।

अस्थायी मान्यता मिलने के बाद ही स्पोर्ट्स फेडरेशन सरकारी अनुदान हासिल कर पाते हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में स्पोर्ट्स फेडरेशन में कई अनियमितताओं के बारे में बताते हुए याचिका लगाई गई थी। इस पर पिछले काफी समय से सुनवाई चल रही है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि फेडरेशन में आर्थिक अनियमितताएं और पद के दुरुपयोग से जुड़े कई उदाहरण हैं।

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