टीकाकरण के बाद खेल

भारत में कोरोना की 100 करोड़ खुराक होने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है।

सिमोन। फाइल फोटो।

मनीष कुमार जोशी

भारत में कोरोना की 100 करोड़ खुराक होने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। यह संख्या महज आंकड़ा नहीं है, बल्कि इससे कई क्षेत्र आगे की ओर प्रगति करेंगे। सभी क्षेत्रों में 100 करोड़ खुराक लेने का मनोवैज्ञानिक लाभ दिखेगा। खासकर खेल के क्षेत्र में इसका बड़ा प्रभाव दिखाई देने की संभावना है। 100 करोड़ खुराक लेने के लक्ष्य के बाद लोगों में कोरोना के विरुद्ध आत्मविश्वास आएगा। कोरोना के विरुद्ध लड़ने के आत्मविश्वास के बाद लोग खेलों को देखने के लिए स्टेडियम में आएंगे। खेल प्रशासक दर्शकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं कर सकेंगे। इससे खेलों में लोगों का आकर्षण फिर बनेगा। खेल अब पूरी शक्ति और ऊर्जा के साथ हो सकेंगे।

फिलहाल टेनिस में ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताएं तो हो रही हैं परंतु खिलाड़ी सशंकित हैं। कुछ खिलाड़ी ग्रैंड स्लैम में खेल रहे हैं कुछ खिलाड़ी खेलने से बच रहे हैं। कोरोना की प्रथम लहर के बाद जब टेनिस शुरू हुआ तो कई खिलाड़ी कोरोना संक्रमित मिले। इसके बाद ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं में कई खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया। अब जब पूरी दुनिया में काफी हद तक टीकाकरण हो गया है तो टेनिस का खेल भी अब उन्मुक्त तरीके से हो सकेगा परंतु पूर्ण टीकाकरण के बावजूद खिलाड़ी शंकित है।

टेनिस की तरह क्रिकेट भी कोरोना के बाद जल्दी शुरू कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि खिलाड़ी संक्रमित होने लगे। पहले आयोजित आइपीएल के दौरान खिलाड़ियों के संक्रमित होने के कारण टूर्नामेंट बीच में रोक दिया गया था। हालांकि आइपीएल का प्रथम दौर बिना दर्शकों के खेला गया था। उसके बावजूद खिलाड़ी और स्टाफ संक्रमित होने लगा था। इसके बाद भारत और इंग्लैंड टैस्ट सीरीज मैं स्टाफ कोरोना संक्रमित होने के बाद चार मैच के बाद ही रोक दी गई।

सीरीज बीच में रोक देने का इंग्लैंड क्रिकेट ने विरोध किया। परंतु भारतीय क्रिकेट टीम के कोच के संक्रमित होने के बाद बीसीसीआइ को यह फैसला लेना पड़ा। टी20 विश्व कप के दौरान कोरोना टीके का प्रभाव दिख रहा है। दर्शकों की अच्छी खासी संख्या दिखने लगी है। उसके बाद भी लोगों के संक्रमित होने की खबरें नहीं आई है। यह अच्छा संकेत है। इससे दूसरी क्रिकेट सीरीज कराने में मदद मिलेगी।

टीकाकरण के बाद फुटबाल मैच बड़ी संख्या में हो रहे हैं। इन मैचों में दर्शक खूब आ रहे हैं। जापान में ओलंपिक में खिलाड़ियों के संक्रमित होने की छुटपुट खबरें आई थीं। लेकिन टीकाकरण और गाइडलाइन के पालन के कारण यह संक्रमण अधिक नहीं फैला। अभी मुक्केबाजी और एथलेटिक्स स्पर्धाएं चल रही हैं। इनमें भी संक्रमण की खबरें नहीं है। खेल ऐसा क्षेत्र है जिसने कोरोना के बाद जल्दी ही अपनी रफ्तार पकड़ी।

सभी खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं तेजी से हुईं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों ने गति पकड़ ली है परंतु घरेलू स्तर पर खेल अभी गति पकड़ नहीं पाए हैं। कई देशों में खेलों की घरेलू प्रतियोगिताएं नहीं हो पा रही हैं। खेल तभी आगे बढ़ेंगे जब घरेलू मुकाबले होंगे। घरेलू प्रतियोगिताएं होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों के लिए नए खिलाड़ी मिलेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्वालीफाई प्रतियोगिताएं हो रही हैं। इसी प्रकार घरेलू स्तर पर भी खेल प्रतियोगिताएं शुरू की जानी चाहिए।

टीकाकरण के बाद खेलों का परिदृश्य बदलना चाहिए। कोरोना ने खेलों को खेलने और देखने का तरीका बदल दिया है। खिलाड़ियों और दर्शकों ने खेलों के बदले स्वरूप को अपना लिया है। मैदान में दर्शकों को उचित दूरी और मास्क का उपयोग करते हुए देखा जा सकता है। अब जरूरत इस बात की है कि कोरोना दिशानिर्देशों की समीक्षा दोबारा होनी होनी चाहिए और खेलों के आयोजन का दायरा भी बढ़ाना चाहिए।

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