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न्याय मांगने गई युवा बॉक्सर को खेल मंत्री से मिला ‘झुनझुना’, किरन रिजीजू ने कहा- राजनेताओं का चयन प्रक्रिया में दखल नहीं होना चाहिए

मेरीकॉम ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह बीएफआई के फैसले के अनुसार चलेगी। बीएफआई ने पहले कहा था कि विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक विजेता मुक्केबाजों का ही ओलंपिक क्वॉलीफायर के लिये सीधे चयन होगा।

Author Updated: October 19, 2019 9:28 AM
मैरी कॉम और निकहत जरीन

खेल मंत्री किरेन रीजीजू ने मुक्केबाज निकहत जरीन की एम सी मेरीकॉम के खिलाफ ट्रायल मुकाबला कराने की मांग से उठे विवाद में स्पष्ट किया कि वह केवल महासंघ को देश और खिलाड़ियों के हित में सर्वश्रेष्ठ फैसला करने के लिये ही कह सकते हैं। जरीन ने गुरुवार को रीजीजू को पत्र लिखकर चीन में अगले साल होने वाले ओलंपिक क्वॉलीफायर के लिये भारतीय टीम के चयन से पहले मेरीकॉम के खिलाफ ट्रॉयल मुकाबला आयोजित करने की मांग की थी।

इससे पहले भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) ने कहा था कि मेरीकॉम (51 किग्रा) के हाल में रूस में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए वह छह बार की विश्व चैंपियन को चुनने का इरादा रखता है। इसके बाद ही जरीन ने यह पत्र लिखा। रिजीजू ने जरीन के पत्र के जवाब में कहा, ‘‘मैं निश्चित तौर पर मुक्केबाजी महासंघ को देश, खेल और खिलाड़ियों के सर्वश्रेष्ठ हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला करने के लिये कहूंगा। मंत्री को हालांकि खेल संघों द्वारा खिलाड़ियों के चयन में शामिल नहीं होना चाहिए क्योंकि खेल संघ ओलंपिक चार्टर के अनुसार स्वायत्त हैं।

मेरीकॉम ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह बीएफआई के फैसले के अनुसार चलेगी। बीएफआई ने पहले कहा था कि विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक विजेता मुक्केबाजों का ही ओलंपिक क्वॉलीफायर के लिये सीधे चयन होगा। जरीन को विश्व चैंपियनशिप से पहले भी ट्रायल मुकाबले का मौका नहीं दिया गया था। महासंघ ने तब इंडिया ओपन और प्रेसीडेंट कप में स्वर्ण पदक जीतने के कारण मेरीकोम का चयन करने का फैसला किया था।

रीजीजू की पोस्ट पर जवाब देते हुए जरीन ने कहा कि उन्हें निष्पक्ष मौका मिलने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने कहा, आपकी तुरंत कार्रवाई के लिये बहुत बहुत आभार सर। मुझे उम्मीद है कि उन खिलाड़ियों के साथ पक्षपात और भाई भतीजावाद नहीं होगा जो अपने देश का मान बढ़ाने के लिये कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

बीएफआई ने पिछले साल अंक आधारित चयन प्रणाली शुरू की थी जिसके तहत मुक्केबाजों को विभिन्न ग्रेड के टूर्नामेंट और राष्ट्रीय शिविर में प्रदर्शन के आधार पर चुना जाता है। पूर्व में ट्रायल मुकाबले आयोजित करने का चलन था। अब यह केवल उन्हीं भार वर्गों में होता है जिनमें कोच और चयनकर्ताओं को लगता है कि प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी है। जरीन को भारत के एकमात्र व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और दिग्गज निशानेबाज अभिनव बिंद्रा का भी समर्थन मिला है।

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