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लाल बजरी में राजा वही, लेकिन रानी नई

2005 से 2008, 2010 से 2014 और 2017 से 2019 तक फ्रेंच ओपन चैंपियन बनकर राफेल नडाल ने फिलिप चेट्रियर कोर्ट पर अपने को बेजोड़ साबित किया है।

Author June 13, 2019 1:43 AM
टेनिस को ‘पॉवर गेम’ माना जाता है।

सुरेश कौशिक

बारह फाइनल और बारह ही खिताब – यह रेकार्ड किसी छोटी-मोटी प्रतियोगिता का नहीं, टेनिस ग्रैंडस्लैम का है। और जो शख्स यह कमाल कर रहा है, उसे क्या कहा जाएगा? बादशाह कहना इसके लिए उपयुक्त शब्द नहीं होगा। करिश्माई खिलाड़ी कहना ज्यादा उचित होगा। बार-बार खिताब जीतने वाले यह खिलाड़ी हैं स्पेन के राफेल नडाल। पेरिस की लाल बजरी वाली सतह पर इनकी श्रेष्ठता का अंदाजा इसी से लग जाता है कि उन्होंने फ्रेंच ओपन टेनिस में तीसरी बार खिताब की ‘हैट्रिक’ जमाई। यह प्रदर्शन अपने आप में ऐतिहासिक है। पुरुष या महिला टेनिस में ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं हुआ जिसने एक ही ग्रैंडस्लैम खिताब को 12 बार जीता हो। महिला वर्ग में आस्ट्रेलियाई ओपन के 11 खिताब जीतकर आस्ट्रेलिया की मारग्रेट कोर्ट ने कमाल किया था। लेकिन इस सफलता से राफा उनसे आगे निकल गए हैं। 2005 से 2008, 2010 से 2014 और 2017 से 2019 तक फ्रेंच ओपन चैंपियन बनकर राफेल नडाल ने फिलिप चेट्रियर कोर्ट पर अपने को बेजोड़ साबित किया है।

30 पार, फिर भी शक्ति अपार
टेनिस को ‘पॉवर गेम’ माना जाता है। हर साल नए युवा खिलाड़ियों की चुनौती से निपटना होता है। जब खिलाड़ी 30 के पार चला जाता है तो उसके रिफ्लेक्सेस धीमे पड़ने शुरू हो जाते हैं। लेकिन इस ‘थ्योरी’ को 33 साल के राफेल नडाल, 36 साल के रोजर फेडरर और 32 साल के जोकोविच ने झुठला दिया है। एक दशक से भी ज्यादा समय से ग्रैंडस्लैम की जंग इन्हीं तीनों के बीच चल रही है। इस दौरान खिलाड़ी उभरे भी पर उनकी सफलता का ग्राफ अटक कर रह गया।

हर दशक में दो-तीन की बादशाहत
इतिहास गवाह है कि टेनिस में हर दशक में बादशाहत की दौड़ दो-तीन खिलाड़ियों के बीच रही है। 1960 के दशक में आस्ट्रेलियाई चौकड़ी राड लेवर, केन रोजवैल, राय एमरसन और जान न्यूकांब, 70 के दशक में ब्योर्न बोर्ग, जान मैकनरो और जिमी कोनर्स, 80 के दशक में मैट्स विलेंडर, इवान लैंडल, स्टीफन एडबर्ग और 90 के दशक में पीट सम्प्रास, आंद्रे अगासी और जिम कोरिया का दबदबा रहा। बाद में फेडरर युग की शुरुआत हुई। राफेल नडाल के साथ उनकी प्रतिद्वंद्विता का दौर शुरू हुआ जो अभी जारी है। इस दौरान जोकोविच ने उनकी श्रेष्ठता को प्रबल चुनौती दी।

चार ग्रैंडस्लैम, चार सतहें
चार ग्रैंडस्लैम अलग-अलग सतह पर खेले जाते हैं। इसलिए ऐसी सतह पर अपने खेल को ढालने की चुनौती भी रहती है। अगर घसियाले कोर्ट पर फेडरर और जोकोविच का कोई सानी नहीं, तो ह्यलाल बजरीह्ण के कोर्ट पर राफेल नडाल अजेय हैं। फ्रेंच ओपन टेनिस के सफल करिअर में 95 में से 93 जीतना और केवल दो में हारना यह दर्शाता है कि नडाल दूसरे खिलाड़ियों से अलग हैं। इस सतह पर उन्हें सर्वकालीन महान खिलाड़ियों की सूची में टाप पर रखा जा सकता है। लगातार दूसरे साल उन्हें फ्रेंच ओपन के खिताबी टकराव में विश्व के नंबर चार खिलाड़ी आस्ट्रिया के 25 वर्षीय डोमिनिक थीम से मिली। नडाल चार सेटों का मुकाबला 6-3, 5-7, 6-1, 6-1 से जीते। पूरी प्रतियोगिता में उन्होंने केवल दो सेट गंवाए। तीसरे राउंड के मुकाबले में स्विस खिलाड़ी डेविड गोफिन ने जबकि फाइनल में थीम उनसे एक सेट झटकने में सफल रहे।

दिग्गजों का दंगल
सेमीफाइनल में रोजर फेडरर और राफेल नडाल के बीच मुकाबले पर सभी की निगाहें थीं लेकिन नडाल की सीधे सेटों में एकतरफा जीत से निराशा हाथ लगी। विश्व नंबर वन जोकोविच का बढ़ाव सेमीफाइनल में थम गया। खराब मौसम के कारण थीम के साथ उनके सेमीफाइनल मुकाबले में कई बार व्यवधान पड़ा। लेकिन हवाई परिस्थितियों को अच्छी तरह ढालकर थीम ने बाजी को संघर्षमय बना दिया। दो दिन खिंचे मुकाबले में थीम के पक्ष में नतीजा रहा। लेकिन हार से बौखलाए जोकोविच चेअर अंपायर से ही उलझ गए। मुकाबला पांच सेटों तक चला।

ग्रैंडस्लैम की खिताबी दौड़
फ्रेंच ओपन नडाल का 18वां ग्रैंडस्लैम खिताब है। अब वे रोजर फेडरर के 20 खिताबों से सिर्फ दो पीछे रह गए हैं। जोकोविच के नाम 16 ग्रैंडस्लैम खिताब हैं। डोमिनिक थीम को छोड़कर ऐसा कोई खिलाड़ी भी नजर नहीं आया जो इन तीनों दिग्गजों को मजबूत चुनौती दे सके। नडाल ने तो फाइनल के बाद कह भी दिया कि डोमिनिक थीम के खेल में दम है। खूब मेहनती हैं और एक दिन ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने में सफल होंगे।

नई मल्लिका
भविष्य में धूम मचाने वाली एक स्टार का उदय महिला वर्ग में हुआ। आस्ट्रेलिया की ऐशले बार्टी पहली ग्रैंडस्लैम सफलता के साथ फ्रेंच ओपन की नई क्वीन बनीं। फाइनल में उन्होंने चैक गणराज्य की मार्केटा वोंद्रोसोवा को आसानी से 6-1, 6-3 से हराया। यह सफलता उन्हें विश्व रैंकिंग में दूसरे नंबर पर ला खड़ा कर देगी। नंबर वन होना उनका अगला लक्ष्य होगा। इसी माह शुरू होने वाले विम्बलडन में वे अपने पसंदीदा ग्रास कोर्ट पर इतिहास रचने की कोशिश करेंगी। अगर वे ऐसा करने में सफल रहीं तो इवोन गुलागोंग काउले के बाद शिखर छूने वाली दूसरी आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बनेंगी। 1976 में गुलागोंग नंबर वन बनी थींं पर सिर्फ दो सप्ताह के लिए।

खैर, 46 साल बाद फ्रेंच ओपन में मिली बार्टी की यह सफलता आस्ट्रेलिया की महिला खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। टेनिस को अनोखा खेल बताने वाली बार्टी वास्तव में प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। 2011 में वे जूनियर विम्बलडन विजेता थीं और विश्व की नंबर दो जूनियर खिलाड़ी भी। तीन साल बाद जाने क्या सूझा कि टेनिस से दूर हो गईं। क्रिकेट का नशा चढ़ गया और बिग बैश क्रिकेट लीग में हाथ दिखाने लगीं। लेकिन 2016 के शुरू में फिर टेनिस से जुड़ गईं।

बार्टी ने सेमीफाइनल में अमेरिका की अमांडा एनिसिमोवा को 6-7, 6-3, 6-3 से हराया। 17 वर्षीया अमेरिकी खिलाड़ी ने इससे पहले पिछली विजेता सिमोना हालेप को हराकर सनसनी फैलाई थी। वोंद्रोसोवा ने दूसरे सेमीफाइनल में ब्रिटेन की जोहाना कोंटा को शिकस्त दी थी। चंद सप्ताह बाद इन्हीं खिलाड़ियों में श्रेष्ठता की जंग फिर होगी पर इस बार विम्बलडन के ग्रास कोर्ट पर।

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