ताज़ा खबर
 

सौरव गांगुली के BCCI अध्यक्ष बनने की इनसाइड स्टोरी; IPL चेयरमैन बनने से किया इनकार तो बीजेपी की मदद से रातों-रात बन गए बोर्ड प्रेसिडेंट

नए बीसीसीआई संविधान के अनुसार, सभी क्रिकेट प्रशासकों का बीसीसीआई और राज्य निकायों में अधिकतम नौ साल का कार्यकाल होता है, जिसमें दोनों स्थानों पर छह साल बाद अनिवार्य रूप से कूलिंग-ऑफ अवधि होती है। इस तरह गांगुली के पास अपने छह साल में केवल 278 दिन बचे थे।

सौरव गांगुली क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल में अध्यक्ष और संयुक्त सचिव थे। (सोर्स – सोशल मीडिया)

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली 8 जुलाई को 48 साल के हो गए। गांगुली पिछले साल बोर्ड अध्यक्ष बने थे। तब उनका नाम अचानक ही सामने आया था। दरअसल, गांगुली को सबसे पहले आईपीएल गवर्निंग काउंसिल का चेयरमैन बनाने की बात हो रही थी। उन्हें इसका ऑफर भी दिया गया था, लेकिन दादा ने उसे रिजेक्ट कर दिया। इसके अलावा उन्हें बीसीसीआई उपाध्यक्ष पद भी ऑफर किया था, लेकिन वे उसके लिए तैयार नहीं हुए।

असली खेल इसके बाद शुरू हुआ। गांगुली मीटिंग छोड़कर होटल वापस चले गए। लगभग रात के 9 बजे स्क्रिप्ट में बदलाव शुरू हुआ। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के पसंदीदा माने जाने वाले बृजेश पटेल ने अध्यक्ष पद की दौड़ से धीरे-धीरे बाहर होने लगे। लोढ़ा समिति की नियमों के मुताबिक, श्रीनिवासन खुद बोर्ड अध्यक्ष बनने के लिए योग्य नहीं थे। वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के अध्यक्ष भी थे। नए नियमों के मुताबिक, बोर्ड अध्यक्ष का कार्यकाल 4 साल का होता है। बृजेश पटेल को आईपीएल का अध्यक्ष बनाया गया।

आउटलुक वेबसाइट के मुताबिक, 14 अक्टूबर को नामांकन की समय सीमा समाप्त होने से पहले बोर्ड में लॉबिंग शुरू हुआ। पूर्व बोर्ड अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सबसे बड़े समूह का नेतृत्व किया जिसमें लगभग सभी 17 भाजपा शासित राज्य शामिल थे। श्रीनिवासन ने दक्षिणी राज्यों को नियंत्रित किया। गांगुली ने आठ पूर्वोत्तर राज्यों- अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और असम से अपनी ताकत हासिल की। राजीव शुक्ला सबसे कमजोर, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण समूह का नेतृत्व कर रहे थे। वे हर ग्रुप में स्वीकार्य थे।

‘मेरे साथ अन्याय हुआ, सीरीज जीतने बाद भी किया गया था टीम से बाहर,’ सौरव गांगुली का छलका दर्द

चुनावों से पहले 10 अक्टूबर अनुराग ठाकुर ने नॉर्थईस्ट का दौरा किया था। वे वहां सभी सातों राज्य के बोर्ड सदस्यों से मिले थे। हालांकि, ठाकुर ने इसके बारे में मीडिया से कभी बात नहीं की। फिर मामला दिल्ली पहुंचा। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह से श्रीनिवास, गांगुली और अनुराग ठाकुर अकेले-अकेले मिले। फिर सौराष्ट्र के पूर्व सचिव निरंजन शाह, राजीव शुक्ला, ठाकुर और गांगुली मिले। इसके पीछे का एक ही मकसद था लड़ाई खत्म हो। फिर भी श्रीनिवासन हथियार डालने को तैयार नहीं थे। बाद में दूसरे लॉबी के मजबूत होने के बाद उन्होंने अपने पैर पीछे खिंच लिए। गांगुली को अध्यक्ष पद मिल गया।

नए बीसीसीआई संविधान के अनुसार, सभी क्रिकेट प्रशासकों का बीसीसीआई और राज्य निकायों में अधिकतम नौ साल का कार्यकाल होता है, जिसमें दोनों स्थानों पर छह साल बाद अनिवार्य रूप से कूलिंग-ऑफ अवधि होती है। इस तरह गांगुली के पास अपने छह साल में केवल 278 दिन बचे थे। उन्होंने बाकी का समय सीएबी (क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल) अध्यक्ष और संयुक्त सचिव के रूप में बिताया था। 26 जुलाई, 2020 को उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 जानिए इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की प्लेइंग इलेवन
2 पहले दिन बारिश ने डाला खलल, सिर्फ 17.4 ओवर का ही हो पाया खेल
3 ‘कैप्टन कूल’ महेंद्र सिंह धोनी ने इंटरनेशनल मैच में अंपायर को दिखाई थी अंगुली, IPL में भी कई मौकों पर खो चुके हैं आपा
ये पढ़ा क्या ?
X