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भारतीय क्रिकेट के सर्वेसर्वा बनेंगे सौरव गांगुली? BCCI बना सकता है अध्‍यक्ष

नए संविधान के मुताबिक लागू किए गए कूलिंग ऑफ पीरियड के कारण कई मौजूदा और पूर्व प्रशासक बोर्ड अध्यक्ष पद के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। ऐसे हालात में सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार होकर उभरे हैं।

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली। (image source-PTI)

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अगले सर्वेसर्वा हो सकते हैं। खबरों के अनुसार, सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष बन सकते हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी की कुछ सिफारिशों को अलग रखकर बीसीसीआई के नए संविधान के मसौदे को अपनी मंजूरी दे दी गई है। पिछले कुछ समय के दौरान जिस तरह से क्रिकेट बोर्ड में प्रशासन को लेकर कुछ विवाद हुए हैं। ऐसे में भारतीय बोर्ड की निगाहें अध्यक्ष पद के लिए एक ऐसे व्यक्ति की तलाश में हैं, जो बोर्ड की छवि को बेहतर कर सके और मैनेजमेंट को बखूबी संभाल सके।

नए संविधान के मुताबिक लागू किए गए कूलिंग ऑफ पीरियड के कारण कई मौजूदा और पूर्व प्रशासक बोर्ड अध्यक्ष पद के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। ऐसे हालात में सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार होकर उभरे हैं। सौरव गांगुली बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के मौजूदा अध्यक्ष हैं। इसके अलावा गांगुली बीसीसीआई की टेक्निकल कमेटी, क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के भी सदस्य हैं। 46 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली पिछले 4 सालों से प्रशासन में हैं और बीसीसीआई के अगले अध्यक्ष पद के लिए पहली पसंद हो सकते हैं। हालांकि इसके लिए पहले उन्हें बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में अप्रूव किए गए बीसीसीआई संविधान के तहत अब बोर्ड के अध्यक्ष पद में जोनल रोटेशन प्रणाली का इस्तेमाल नहीं होगा और किसी भी राज्य द्वारा नॉमिनेट किया गया उम्मीदवार अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ सकता है। हालांकि सौरव गांगुली यदि बोर्ड के अध्यक्ष चुने जाते हैं तो उन्हें 2 साल बाद ही यह पद छोड़ना पड़ेगा, क्योंकि नए नियमों के मुताबिक लगातार 6 साल तक ही कोई व्यक्ति बोर्ड में प्रशासनिक पद पर रह सकता है। वहीं सूत्रों के अनुसार, सौरव गांगुली तभी बोर्ड के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे, जब उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं होगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड के नए संविधान के तहत वन स्टेट-वन-वोट की पॉलिसी को नकार दिया, जिसके बाद राज्य के विभिन्न क्रिकेट बोर्ड को मान्यता मिलने का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही नए नियमों के मुताबिक 70 साल से अधिक उम्र का व्यक्ति बोर्ड में प्रशासनिक पदों पर नहीं चुना जा सकता। इस नियम के लागू होने के बाद बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के बोर्ड में वापसी के सारे रास्ते बंद हो गए हैं।

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