ताज़ा खबर
 

PHOTOS: 50 सालों में इतना हाईटेक हो गया क्रिकेट, ड्रोन कैमरों हो रही कवरेज; खिलाड़ियों के रवैये संग बदले नियम

समय के पहिए के साथ क्रिकेट भी बहुतेरे उलट-फेर हुए। फिक्सिंग स्कैंडल्स से लेकर और क्या हुआ, नीचे पढ़िए।

वक्त के साथ क्रिकेट भी बदला है। फॉर्मेट और नियम के अलावा भी बहुत सारी ऐसी चीजें हैं, जिन्होंने क्रिकेट की 50 सालों में कायापलट कर दी। (फाइल फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

भारत में क्रिकेट महज़ खेल नहीं है। यह एक किस्म का दीवानापन है। जुनून है। कइयों के लिए तो पूजा, धर्म-कर्म से भी बढ़कर है। ऐसे में समय के साथ इसमें कई बदलाव भी आए। 2017 आते-आते क्रिकेट में तमाम नई चीजों ने दस्तक दी। चाहे वह गेंद का रंग हो या फिर पहाड़ पार करने जैसा 300 रन का स्कोर। प्लेयर्स का आक्रामक रवैया हो या खेल के नियम। बहुत कुछ बदला है।

बीते 50 सालों में क्रिकेट में भारी कायापलट हुआ है। हमने इन तब्दीलियों को देखा और पसंद भी किया, लेकिन एका-एक इन्हें देखेंगे तो आप भी कहेंगे कि क्या उस्ताद, क्रिकेट कहां से कहां आ गया।

– छाईं रंग-बिरंगी जर्सियां, आई ब्रांड की भरमारः ग्लोबलाइजेशन के फेर में दुनिया ग्लोबल से लोकल क्या हुई, क्रिकेट के मैदान ब्लैक एंड व्हाइट मोड से बाहर निकल आए। सफेद टी-शर्ट लोवर की जगह रंग-बिरंगी जर्सियां आ चुकी थीं। स्पोर्ट्स ब्रांड के अलावा विल्स और कैप्टन जैसी कंपनियों के नाम और लोगो प्लेयर्स की जर्सी पर नजर आ जाया करती थीं। मैच से इतर आज यही खिलाड़ी साबुन, तेल और सेंट बेचते नजर (विज्ञापनों में) आ रहे हैं।

क्रिकेट समय के साथ थोड़ा रंग-बिरंगा भी हुूआ है। वनडे और टी-20 मैचों में खिलाड़ी चमचमाती जर्सियों में नजर आते हैं। उनपर बड़े ब्रांड्स बतौर स्पॉन्सर नजर आते हैं। (फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस)

शानदार, जबरदस्त और जिंदाबाद टाइप मैदानः खेल बदलने के साथ ही यहां कई और चीजें भी बदलीं। वह था इंफ्रास्ट्रक्चर। जी हां, खेल और खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए क्रिकेट के मैदान, खिलाड़ियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग, सुविधाएं और संसाधनों पर खासा फोकस किया। धांसू क्रिकेट के मैदान तैयार किए गए। इसी कड़ी में धर्मशाला का हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) स्टेडियम इसकी बानगी पेश करता है। यहां की पिच विदेशी मैदानों से बेहतर बताई जाती है।

दुनिया के सबसे खूबसूरत क्रिकेट मैदानों में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम का नाम आता है। यह धर्मशाला में स्थित है। (फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस)

कई एंगलों से दिखने लगा मैचः तकनीक और हाईफाई गैजेट्स के दौर में हमारे मैच भी अत्याधुनिक हुए हैं। ड्रोन कैमरे हमारे मैच की कवरेज करते हैं। बाप ऑफ ऑल फॉर्मेट्स टी-20 – ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि चार-पांच दिन खिंचने वाले लंबे मैच देखना अब कम ही लोग पसंद करते हैं। 60 ओवर से 50 ओवर के हुए वनडे मैच भी लोग देखने में खासा दिलचस्पी नहीं दिखाते। चैनल चेंज कर न्यूज या वेबसाइट से स्कोर जान लेने भर से उनका काम चल जाता है। ऐसे में आईपीएल उनके लिए एक बेहतरीन विकल्प के रूप में साबित हो रहा है। 20 ओवर में टीम का काम तमाम भी हो जाता है और अच्छा खासा स्कोर भी बनते देखा गया है। खासकर, युवाओं में इस फॉर्मेट को लेकर गहरा चाव देखा गया है।

मैच के प्रसारण में ड्रोन कैमरे हर तरफ से कवरेज करते हैं। इससे कवर किया जाने वाला एरियल शॉट (ऊपर से लिया जाने वाला) खास माना जाता है। (फोटो सोर्सः यूट्यूब)

गुलाबी गेंद संग डे-नाइट मैचः क्रिकेट में पिछले साल के पहले तक सफेद और लाल गेंद का चलन था। तभी गुलाबी गेंद को डे-नाइट टेस्ट मैच के नए प्रयोग के साथ मैदान में आजमाया गया। हालांकि, 2008 में ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम के मैचों में गुलाबी गेंद को ट्राय किया गया था। फिर 2010 में कैरेबियन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इसे इस्तेमाल किया गया। सात साल बाद इसे तिबारा ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड के बीच हुए डे-नाइट टेस्ट मैच में आजमाया गया।

डे-नाइट टेस्ट मैच की शुरुआत के साथ ही गुलाबी गेंद का भी प्रयोग क्रिकेट में आजमाया गया था। (फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस)

मैच फिक्सिंग स्कैंडल्सः एक तरफ जहां बेहतरीन खिलाड़ियों और उनके रिकॉर्ड्स ने क्रिकेट का सुनहरा इतिहास रचा-गढ़ा। वहीं, फिक्सिंग स्कैंडल्स ने उस पर कालिख पोती। भारतीय क्रिकेटर मो.अजहरुद्दीन, अजय जडेजा, मनोज प्रभाकर, श्रीसंत इसी चक्कर में नपे, द.अफ्रीकी हैंसी क्रोनिए, हर्शल गिब्स, कैरेबियाई खिलाड़ी मार्लन सैमुअल्स, पाकिस्तान से मो.आमिर, मो.आसिफ, सलमान बट व दानिश कनेरिया भी फिक्सिंग मामले में बैन और जुर्माना झेल चुके हैं।

2013 में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में स्पॉट फिक्सिंग के मामले से क्रिकेट जगत में खलबली मच गई थी। जाने-माने भारतीय खिलाड़ी एस.श्रीसंत को इसमें जेल तक जाना पड़ा था। (फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस)

-रुको-रुको, फ्यूचर में ये भी हो सकते हैं अहम बदलाव-
नहीं मिलेगा टॉस का फायदाः टॉस। सिक्का उछालकर गेम में अपनी चाल चलने का मौका काफी अहम होता है। ऐसे भी मैच हुए हैं, जिनमें टॉस ने फैसला तय किया। विशेषज्ञों की मानें तो अभी तक टीमों को टॉस जीतने का फायदा मिलता था। फ्यूचर में टॉस हारने वाली टीमों को टीम में कोई खास बदलाव का मौका दिया जाएगा।

खिलाड़ियों को मिलेगी ब्रेन ट्रेनिंगः गुरु मैच-वैच बड़ा टेंशन वाला मामला है। टीवी स्क्रीन या मैदान में यह देखने में जितना मजेदार और मनोरंजक लगता है। दरअसल, खेलने में यह उतना ही पेंचीदा और टेशनफुल है। खिलाड़ियों की इसी टेंशन को कम करने के लिए जल्द उन्हें ब्रेन ट्रेनिंग दी जाएगी। कुछ ऐसे हेडसेट्स तैयार किए जाएंगे, जो खिलाड़ियों की टेंशन हर लेंगे।

वर्चुअल प्रैक्टिसः खेल में सुधार-निखार लाने के लिए खिलाड़ी ट्रेनिंग सेशंस और नेट प्रैक्टिस करते हैं। आने वाले दौर में यह तरीका खत्म हो जाएगा। वर्चुअल प्रैक्टिस इसे रीप्लेस करेगी, जिसमें वर्चुअल फील्डर, स्कोरर और अंपायर होंगे। इस दौरान असल मैच जैसी सिचुएशंस होंगी। खिलाड़ी भी उन्हीं के हिसाब से अपनी प्रैक्टिस करेंगे।

क्रिकेट में नेट प्रैक्टिस के बाद अब खिलाड़ियों को वर्चुअल प्रैक्टिस कराई जाएगी। यह भी आने वाले समय में बड़ा सुधार होगा। (फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस)

लद जाएंगे टेस्ट और वनडे के दिनः समय के साथ क्रिकेट के फॉर्मेट भी बदले हैं। फैंस की पसंद और मिजाज में भी फेरबदल हुआ है। हर कोई झट-पट मैच का रिजल्ट जानना चाहता है। अपनी टीम को जीतते देख चियर करना चाहता है। इससे पहले हॉन्ग-कॉन्ग सिक्सेस फॉर्मेट में हम पांच-पांच ओवर्स के मैच का उदाहरण भी देख चुके हैं। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि टेस्ट और वनडे के दिन लदने वाले हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App