स्मृति मंधाना ने राहुल द्रविड़ के बैट से ठोका था पहला दोहरा शतक, ‘नेशनल क्रश’ की दिलचस्प है कहानी

शो के होस्ट गौरव कपूर से बात करते हुए स्मृति मंधाना ने बताया कि उनके बड़े भाई श्रवण भी क्रिकेट खेलते थे और वे राहुल द्रविड़ के बड़े फैन थे। स्मृति के भाई श्रवण ने राहुल द्रविड़ से अनुरोध किया था कि जब वह उन्हें अपना बल्ला साइन कर के दें। जिसके बाद द्रविड़ ने उन्हें अपना एक बल्ला साइन कर के दे दिया।

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स्मृति मंधाना ने अंडर-19 वेस्टर्न डिवीजन क्रिकेट टूर्नामेंट में दोहरा शतक राहुल द्रविड़ के बल्ले से लगाया था।

भारतीय महिला विस्फोटक बल्लेबाज स्मृति मंधाना का बल्ल जब चलता है तो रनों की बारिश होती है। स्मृति शुरू से ही अपनी आतिशी बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं। अंडर-19 वेस्टर्न डिवीजन क्रिकेट टूर्नामेंट में उनके नाम एक दोहरा शतक भी हैं। क्या आप जानते हैं यह शतक उन्होंने किस दिग्गज के बल्ले से बनाया था।

17 साल की उम्र में स्मृति मंधाना ने अक्टूबर 2013 में अंडर-19 वेस्टर्न डिवीजन क्रिकेट टूर्नामेंट में दोहरा शतक लगाया था। वे एकदिवसीय क्रिकेट में दोहरा शतक बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर थीं। यह दोहरा शतक उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ के बल्ले से लगाया था। इस मैच में स्मृति ने 150 गेंदों में नाबाद 224 रन बनाए थे।

इस बात का खुलासा उन्होंने यूट्यूब चैनल ओकट्री स्पोर्ट्स के शो ब्रेकफॉस्ट विद चैंपियंस में किया था। शो के होस्ट गौरव कपूर से बात करते हुए स्मृति मंधाना ने बताया कि उनके बड़े भाई श्रवण भी क्रिकेट खेलते थे और वे राहुल द्रविड़ के बड़े फैन थे। स्मृति के भाई श्रवण ने राहुल द्रविड़ से अनुरोध किया था कि जब वह उन्हें अपना बल्ला साइन कर के दें। जिसके बाद द्रविड़ ने उन्हें अपना एक बल्ला साइन कर के दे दिया।

दिलचस्प बात यह है कि द्रविड़ ने वह बल्ला स्मृति मंधाना के नाम से ही दिया था। स्मृति ने शो पर इस बल्ले से जुड़ी पूरी कहानी बताई। उन्होंने बताया कि मेरे भाई श्रवण ने द्रविड़ सर से मेरे लिए अपना ऑटोग्राफ किया बल्ला मांगा था। उन्होंने भी दरियादिली दिखाते हुए बैट दे दिया।

स्मृति ने कहा ” मैं इस बल्ला को संभालकर रखनी चाहती थी। लेकिन जैसे ही मैंने इसे हाथ में उठाया, तो इसका बैलेंस देखकर मैं हैरान हो गई। इस बल्ले का वजन और संतुलन कमाल का था। इसके बाद मैंने इससे खेलना शुरू कर दिया। मैंने वनडे फॉर्मेट में जो पहला दोहरा शतक लगाया था। वो राहुल सर के आटोग्राफ किए बल्ला से ही आया था।”

उसके बाद मैंने उसे कई बार ठीक किया और उसी से खेलती थी। लेकिन उसके बाद मेरे पिता ने कहा कि अब इसको हटा दो ये बहुत खराब हो गया है। आज भी वो बल्ला मेरे पास अच्छे से शोपीस में रखा हुआ है। बता दें 2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। वह आईसीसी महिला टीम ऑफ द ईयर 2016 में नामित होने वाली एकमात्र भारतीय खिलाड़ी थीं और उन्होंने 2018 में महिला क्रिकेटर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीता था।

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