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सानिया के लिए ऐतिहासिक रहा साल

सानिया मिर्जा के लिए 2015 उपलब्धियों से भरा रहा जिसमें वे महिला डबल्स ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और डबल्स टेनिस रैंकिंग में शीर्ष तक पहुंची..

Author नई दिल्ली | Published on: December 23, 2015 3:14 AM
भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा। (एपी फाइल फोटो)

सानिया मिर्जा के लिए 2015 उपलब्धियों से भरा रहा जिसमें वे महिला डबल्स ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और डबल्स टेनिस रैंकिंग में शीर्ष तक पहुंची जबकि युकी भांबरी भी नए अवतार में नजर आए। सानिया ने मार्च में स्विटजरलैंड की मार्तिना हिंगिस के साथ जोड़ी बनाई और दोनों का तालमेल गजब का रहा। दोनों ने अपने पहले ही टूर्नामेंट इंडियन वेल्स में खिताब जीता और सत्र के आखिर तक अपना दबदबा कायम कर लिया। चार्ल्सटन में सत्र की लगातार तीसरी जीत दर्ज करने के साथ ही सानिया डबल्स रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचीं और उसे बरकरार रखा।

सत्र के आखिर तक दोनों ने नौ खिताब अपने नाम कर लिए जिनमें विंबलडन, अमेरिकी ओपन और सत्र का आखिरी डब्ल्यूटीए फाइनल्स शामिल है। दोनों ने साथ में 16 टूर्नामेंट खेला और उनका जीत हार का रेकार्ड 55.7 रहा है। टेनिस सिंगल्स में भारत को हालांकि उतनी कामयाबी नहीं मिली लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि टेनिस में डबल्स वर्ग में भी लिएंडर पेस और महेश भूपति के बाद सानिया के रू प में दूसरा चैंपियन पैदा करने में भारत को करीब 15 साल लग गए। सानिया ने 2015 में कुल दस खिताब जीते जिनमें नौ मार्तिना के साथ और एक अमेरिका की बेथानी माटेक सैंड्स के साथ जीता।

पुरुष टेनिस में दिल्ली के युकी भांबरी ने उम्दा प्रदर्शन किया। वे पहली बार सिंगल्स रैंकिंग में शीर्ष 100 में पहुंचे जिससे उन्हें ग्रैंडस्लैम में सीधे प्रवेश मिला। सोमदेव देववर्मन का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। पेस ने मार्तिना के साथ तीन मिक्सड डबल्स खिताब जीतकर उपलब्धियों का सिलसिला जारी रखा। सातवां ओलंपिक खेलने की दहलीज पर खड़े पेस ने कोर्ट से बाहर भी चुनौतियों का सामना किया जब पूर्व जीवनसाथी रिया पिल्लै से उन्हें अपनी बच्ची के संरक्षण के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

इसके बावजूद टेनिस कोर्ट पर उन्होंने जबर्दस्त प्रदर्शन किया लेकिन पुरुष डबल्स में उसे दोहरा नहीं सके। अलग अलग जोड़ीदारों के साथ 26 टूर्नामेंट खेलकर 42 बरस के पेस सिर्फ तीन बार फाइनल तक पहुंचे और एक जीता। वहीं 15 से अधिक टूर्नामेंटों में दूसरे दौर से आगे नहीं बढ सके। सिंगल्स में युकी ने जहां अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं सोमदेव लय हासिल करने के लिए जूझते रहे। युकी ने दो चैलेंजर स्तर के एकल खिताब जीते और अपने से बेहतर रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को हराया। वहीं खराब फार्म से जूझ रहे सोमदेव अब रैंकिंग में 180वें स्थान पर है। उम्मीद है कि नए कोच के साथ अगले साल वे बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

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