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2011 वर्ल्‍ड कप फाइनल: सचिन के कहने पर युवराज से पहले उतरे धोनी? वीरेंद्र सहवाग ने खोला राज

भारत की ओर से 463 वनडे खेलने वाले तेंदुलकर ने इस फॉर्मेट में 86.23 की स्ट्राइक के साथ 18,426 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने 49 शतक समेत 96 अर्धशतक भी जमाए।

विश्व कप-2011 में जीत के बाद टीम इंडिया। (Photo Courtesy: ICC)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने 2011 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले को लेकर खुलासा किया है। ये वही ओडीआई वर्ल्ड कप था, जिसने भारतीय टीम ने दूसरी बार खिताब अपने नाम किया था। आज भी हर भारतीय के दिमाग में इसे लेकर यादें ताजा हैं। इस मैच से ही जुड़ा किस्सा सहवाग ने वॉट द डक शो में शेयर किया। मुल्तान के इस सुल्तान ने बताया कि सचिन के कहने पर ही धोनी युवराज से पहले बल्लेबाजी के लिए उतरे थे।

सहवाग बताते हैं कि, “हम लोग आमने-सामने बैठे थे और धोनी आ गए। उस वक्त विराट कोहली और गौतम गंभीर बैटिंग कर रहे थे। सचिन ने धोनी से कहा कि अगर लेफ्टी आउट होगा तो लेफ्टी जाएगा और राइटी हुआ, तो राइटी जाएगा। कुछ देर बाद कोहली आउट हुए और धोनी बैटिंग के लिए गए। इसलिए युवराज सिंह नंबर-4 पर बल्लेबाजी के लिए नहीं गए, जबकि वो ज्यादा रन बना रहे थे। ये सचिन की ही देन थी। सचिन अगर सीधे तौर पर मैसेज नहीं देते थे लेकिन उस दिन दिया।”

भारत की ओर से 463 वनडे खेलने वाले तेंदुलकर ने इस फॉर्मेट में 86.23 की स्ट्राइक के साथ 18,426 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने 49 शतक समेत 96 अर्धशतक भी जमाए। वहीं बात अगर टेस्ट की करें तो 200 मैचों में इस खिलाड़ी ने 51 शतक और 68 अर्धशतक की मदद से 15,921 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में सचिन 2 हजार से ज्यादा चौके लगाने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं। उन्होंने टेस्ट मैचों में 2058 चौके जड़े हैं।

विश्व कप जीतने पर रो पड़े थे सचिन: एक अन्य इंटरव्यू में सचिन तेंदुलकर ने 2011 के विश्व कप में भारत की जीत को एक ‘अनमोल’ पल बताते कहा था कि जब भारत को जीत मिली तो उनकी आंखों में ‘खुशी के आंसू’ आ गए थे। भारत द्वारा फाइनल में श्रीलंका को हराने के आखिरी पलों को याद करते हुए तेंदुलकर ने कहा कि उन्होंने तब ईश्वर को धन्यवाद दिया, खुशी से चिल्लाए और ड्रेसिंग रूम से मैदान की तरफ दौड़े। तेंदुलकर कहते हैं, ‘‘जब मैं मैदान पर गया तब रो पड़ा। वह एकमात्र समय था जब मेरी आंखों में खुशी के आंसू आए क्योंकि वह एक अनमोल पल था। उस पल के बारे में आप बस सपने में सोच सकते थे।’’

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