सचिन तेंदुलकर जैसा बल्लेबाज शायद किसी युग में आएगा। क्योंकि उन्होंने जो रिकॉर्ड विश्व क्रिकेट में बनाए हैं उन्हें तोड़ना सालों तक फिलहाल किसी के लिए आसान नहीं होगा। इसी कारण से उन्हें क्रिकेट के भगवान की भी उपाधि मिली है। मगर क्रिकेट की दुनिया में हमेशा एक जैसा वक्त किसी का नहीं रहता है। कभी ना कभी किसी क्रिकेटर के लिए एक बुरा दौरा आता है और सचिन तेंदुलकर के लिए वो दौर था 2012 का।

उस वक्त सेलेक्टर्स ने भी उन्हें रिप्लेस करने का मन बना लिया था। उन्होंने इसी बीच वनडे क्रिकेट को अलविदा भी कह दिया था। इसके पीछे की पूरी कहानी टीम इंडिया के तत्कालीन चीफ सेलेक्टर रहे संदीप पाटिल ने बताई है। पाटिल ने राज खोला है इसके पीछे का कि जब सचिन से उनके भविष्य पर बात की गई तो उन्हें भरोसा नहीं हुआ था। वह खुद को रिप्लेस करने की बात सुन हैरान रहे गए थे। विक्की ललवानी के साथ पॉडकास्ट में पाटिल ने इसकी पूरी कहानी बताई है।

यह बात है 2012 के इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरों की जहां टीम इंडिया को लगातार 0-4 से हार झेलनी पड़ी थी। आठ टेस्ट मैचों में सचिन के बल्ले से सिर्फ 560 रन ही निकले थे और इसमें चार पचासे शामिल थे। इसके बाद इंग्लैंड की टीम जब भारत आई तब भी उनके बल्ले से चार मैचों में सिर्फ 112 रन ही निकले। इस दौरान 39 वर्षीय सचिन तेंदुलकर से बीसीसीआई के चीफ सेलेक्टर संदीप पाटिल ने बात की।

और खेलना चाहते थे सचिन तेंदुलकर…

संदीप पाटिल ने सचिन से उस दौरान हुई बातचीत की कहानी बताई और कहा, 2012 के अंत में नागपुर में इंग्लैंड से टेस्ट सीरीज हारने पर संदीप और उनके साथी चयनकर्ता राजेंद्र सिंह हंस ने सचिन तेंदुलकर के साथ बैठक की। ऐसा करने से पहले उन्हें एंटी-करप्शन यूनिट से औपचारिक रूप से अनुमति लेनी पड़ी। जब वे उनके साथ बैठे तो पाटिल ने एक सवाल पूछा, ‘आपकी योजना क्या है? उन्होंने (तेंदुलकर) कहा, क्यों? मैंने उनसे कहा कि समिति विकल्प देख रही है। वह हैरान थे। उन्होंने मुझे फिर पूछा आप सच बोल रहे हैं? मैंने कहा हां।’

पाटिल ने साफ-साफ कहा कि समिति ने तेंदुलकर को कभी ड्रॉप नहीं किया या उनसे संन्यास लेने को कहा। उन्होंने कहा, ‘चयनकर्ता किसी खिलाड़ी को निकाल सकते हैं। चयनतर्ता किसी खिलाड़ी से यह नहीं कह सकते कि उसका करियर खत्म हो गया है। हमने उनके प्लान पूछे। उन्होंने कहा कि वह और खेलना चाहते हैं। हमने कहा ठीक है।’ तेंदुलकर ने खुद ही संन्यास का ऐलान कर दिया और पाटिल को फोन करके बताया, ‘सैंडी, मैं रिटायरमेंट ले रहा हूं।’

इसके बाद वह एक साल तक करीब टेस्ट क्रिकेट खेलते रहे, लेकिन उनक प्रदर्शन वैसा नहीं रहा जिसके लिए वह मशहूर थे। भारत ने 2013 में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 4-0 से जीती। इसमें तेंदुलकर ने 192 रन पूरी सीरीज में बनाए और उनका औसत 32 का था। उसी दौरान उन्होंने आईपीएल से भी संन्यास ले लिया और फिर समय आ गया वेस्टइंडीज के खिलाफ उनके फेयरवेल टेस्ट का। सचिन ने आखिरकार अपने दो दशक से ज्यादा लंबे करियर में 34 हजार से ऊपर रन बनाए और 200 टेस्ट मैच खेलने का रिकॉर्ड बनाया।

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