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ब्रिटेन ने 50 गुना खर्च बढ़ाकर रियो में पाया दूसरा स्थान

ब्रिटेन ने जहां 1996 के अटलांटा ओलंपिक पर पांच मिलियन पौंड व्यय किए थे वहीं 2016 के रियो ओलंपिक की तैयारी पर उसने 275 मिलियन पौंड की रकम खर्च की।

Author नई दिल्ली | August 23, 2016 2:48 AM
रियो ओलंपिक में अमेरिका प्रथम, ब्रिटेन दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर रहा।

रियो ओलंपिक की पदक तालिका में सबसे बड़ा उलटफेर चीन और ब्रिटेन की पायदान बदलना रहा। लंदन ओलंपिक 2012 में ब्रिटेन तीसरे स्थान पर था तो रियो में वह दूसरे पर आ गया। ब्रिटेन की सफलता में सबसे चौंकाने वाला पहलू रहा 1996 के अटलांटा ओलंपिक में 36वें स्थान से रियो में दूसरी पायदान पर पहुंच जाना। यह छलांग ब्रिटेन ने यूं ही नहीं लगाई। इस मुकाम को पाने के लिए उसने खिलाड़ियों और खेल ढांचे के विकास पर हर ओलंपिक के साथ रकम बढ़ाई। अटलांटा के मुकाबले ब्रिटेन ने रियो के लिए 50 गुना ज्यादा रकम खर्च की। नतीजा भी सुखद रहा। अटलांटा में उसे महज एक स्वर्ण सहित 15 पदक मिले थे वहीं रियो में उसने 27 स्वर्ण समेत 67 पदक हासिल किए।

वहीं अगर भारत से तुलना की जाए तो यूके स्पोर्ट ने ओलंपिक तैयारी के लिए 2013-17 के बीच जहां 350 मिलियन डॉलर की रकम तय की, वहीं भारत सरकार ने युवा मामलों और खेल बजट में 500 मिलियन डॉलर या 3,200 करोड़ रुपए ही दिए। अगर इस रकम की तुलना ब्रिटेन के खेल ढांचा और प्रशिक्षण के सालाना खेल बजट से करें तो यह तीसरा हिस्सा ही बैठती है। ब्रिटेन का खेल बजट 1.5 अरब डॉलर या 9000 करोड़ रुपए था।

ब्रिटेन के 366 खिलाड़ी रियो गए। इनमें से 130 पदकों के संग लौटे। यानी 35 फीसद खिलाड़ियों ने पदक हासिल किए। कहा जा सकता है कि ब्रिटेन ने जीते 67 पदकों में हर पदक पर 4.1 मिलियन पौंड की रकम खर्च की। यूके स्पोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन ने जहां 1996 के अटलांटा ओलंपिक पर पांच मिलियन पौंड व्यय किए थे वहीं 2016 के रियो ओलंपिक की तैयारी पर उसने 275 मिलियन पौंड की रकम खर्च की। वहीं, भारत के 117 खिलाड़ियों में से सिर्फ दो ने तमगे पाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों मन की बात में कहा भी था कि इस बार ओलंपिक पर भारत ने हर खिलाड़ी पर डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

भारत का खेल बजट युवा मामलों और खेल मंत्रालय के मार्फत राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ), राष्ट्रीय खेल विकास कोष (एनएसडीएफ) और टारगेट ओलंपिक पोडियम (टीओपी) को मिलता है। एनएसडीएफ को सरकार के अलावा निजी संस्थानों से भी पैसा आता है। भारत में चार साल (2012-13 से 2015-16 के बीच) 750 करोड़ रुपए खेल महासंघों, प्रशिक्षण केंद्रों, प्रशिक्षकों और ढांचे पर खर्च किए जबकि खिलाड़ियों पर महज 22.7 करोड़ रुपए एनएसडीएफ (109 एथलीट), 38 करोड़ रुपए टीओपी कार्यक्रम (97 एथलीट रियो ओलंपिक) पर व्यय किए।

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