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‘रन फॉर रियो’ को मोदी ने दिखाई हरी झंडी, कहा- ओलंपिक में अपने आचरण से दुनिया का दिल जीतें भारतीय खिलाड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले ओलंपिक का बजट 15 से 20 करोड़ रुपए होता था लेकिन इस बार 125 करोड़ रुपए तक बजट पहुंच गया है।

Author नई दिल्ली | July 31, 2016 2:34 PM
मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम तक ‘रन फॉर रियो’ को रविवार (31 जुलाई) को झंडी दिखाकर रवाना करते प्रधानमंत्री मोदी। (पीटीआई फोटो)

रियो ओलंपिक में भारतीय दल को खेल के मैदान पर ही नहीं बल्कि अपने आचरण से दुनिया का दिल जीतने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (31 जुलाई) को कहा कि उन्हें यकीन है कि 15 अगस्त को जब देश में आजादी की सालगिरह पर तिरंगा फहराया जाएगा तो उसी कालखंड में रियो में कहीं न कहीं तिरंगा जरूर लहराएगा। पांच अगस्त से रियो दि जिनेरियो में शुरू हो रहे ओलंपिक में भारत के 119 सदस्यीय दल को शुभकामनाएं देने के लिए रविवार (31 जुलाई) को मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम तक ‘रन फॉर रियो’ को रविवार (31 जुलाई) को प्रधानमंत्री मोदी ने हरी झंडी दिखाई।

मोदी ने इस मौके पर कहा,‘जब विदेश में हमारा दल जाता है तो सिर्फ खेल के मैदान में हिन्दुस्तान नजर नहीं आता। पूरे ओलंपिक में उसका बोलना, चालना, उठना बैठना। मुझे विश्वास है कि हमारे खिलाड़ी, हमारे भारत का यह दल पूरी दुनिया के दिल को अपने आचरण से जीतेगा। अपने आचरण से भारत की महान विरासत का परिचय कराएगा।’ उन्होंने देशवासियों की ओर से भारतीय दल को शुभकामना देते हुए कहा, ‘मैं भारत के 119 खिलाड़ियों को कहना चाहता हूं कि दुनिया भर से बहुत से खिलाड़ी आए होंगे लेकिन आपके पीछे 125 करोड़ देशवासी जी जान से खड़े हैं। जब 15 अगस्त को हम हिन्दुस्तान में आजादी की 70वीं जयंती का तिरंगा फहराएंगे, मुझे विश्वास है कि इसी कालखंड में रियो में हर दिन कहीं ना कहीं तिरंगा फहराने का सौभाग्य प्राप्त होगा।’ इस मौके पर सैकड़ों की तादाद में जमा स्कूली बच्चों और युवाओं से मोदी ने तोक्यो में 2020 में होने वाले ओलंपिक की उम्दा तैयारियां करने का आह्वान करते हुए सरकार की ओर से हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का वादा किया।

मोदी ने कहा, ‘2020 में ओलंपिक तोक्यो में होगा और मैं देश के नौजवानों और 600 से ज्यादा जिलों को आहवान करता हूं कि वे संकल्प करें कि तोक्यो में सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि हर जिले का एक नुमाइंदा खेलने पहुंचेगा। इस बार 119 गए हैं, अगली बार 200 से ज्यादा खिलाड़ियों को पहुंचाने का संकल्प हम आज ही कर सकते हैं क्या। उन्होंने नए खेलों में अपनी पहचान बनाने का भी भारतीय युवाओं से आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘जिन खेलों में आज हमारा दूर दूर का भी नाता नहीं है, क्या ऐसे नए खेलों में भारतीय नौजवानों को तैयार करने का काम हम अभी से शुरू कर सकते हैं। भारतीय नौजवानों में सामर्थ्य है, संकल्प है और बड़े बड़े सपने भी हैं। मैं नौजवानों और स्कूल के बच्चों से आह्वान करता हूं कि तोक्यो 2020 के लिए तैयारी करे और सरकार खिलाड़ियों के जरिए दुनिया में अपनी आन बान शान के लिए पूरी ताकत आने वाले चार साल में लगा देगी।’ उन्होंने कहा कि खिलाड़ी की सफलता की कसौटी सिर्फ जीत हार नहीं बल्कि भारत के गौरव को बढ़ाने में उसका योगदान भी होना चाहिए।

मोदी ने कहा, ‘119 खिलाड़ी भारत मां का जय जयकार करने के लिए कठोर तपस्या करके कड़ी मेहनत करके वहां पहुंचे हैं। हर कसौटी से पार होकर निकले हैं और जीत का संकल्प को लेकर चले हैं और वह जीत अपना नाम दर्ज कराने के लिए नहीं बल्कि हिन्दुस्तान के 125 करोड़ देशवासियों की आन बान शान के लिए है।’ उन्होंने कहा, ‘ज्यादातर खेल का मूल्यांकन जीत और हार में सिमट जाता है। खेल का मूल्यांकन जीत और हार में नहीं समेटा जा सकता। खिलाड़ी अपनी पूरी ताकत से कौशल से, स्टेमिना से देश के मान सम्मान के लिए जूझता रहता है। यही उसकी सबसे बड़ी कसौटी होती है। मुझे विश्वास है कि 125 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाओं के साथ 119 खिलाड़ी भारत की प्रतिष्ठा को बढाने में अपना सब कुछ झोंक देंगे।’

मोदी ने रियो ओलंपिक की तैयारियों के लिए उनकी सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि इस बार उन्हें ज्यादा समय नहीं मिला लेकिन तोक्यो की तैयारी में वे कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा, ‘हमें अभी सरकार बनाये दो साल ही हुए हैं लिहाजा इस साल हमें ज्यादा समय नहीं मिला। भारत एक शताब्दी से ज्यादा समय से ओलंपिक से जुड़ा है लेकिन पहली बार 119 खिलाडियों का बड़ा दल हम रियो पहुंचाने में सफल हुए हैं। हमने ऐसे बदलाव किए हैं कि आपको ध्यान में आएगा कि भारत तोक्यो के लिए कैसे तैयारी कर रहा है।’ मोदी ने कहा, ‘पहले खिलाड़ी दो दिन पहले ओलंपिक में पहुंचते थे और खुद को ढालने में उन्हें दिक्कत होती थी लेकिन इस बार हमने 15 दिन पहले खिलाड़ियों को रियो पहुंचा दिया ताकि वह खुद को वहां के माहौल में ढाल सकें। इसके अलावा इस बार खास बजट आवंटित किया है कि भारतीय दल को भारतीय खाना उपलब्ध कराया जाए।’

उन्होंने कहा कि मीडिया ओलंपिक खत्म होने पर एक महीने आलोचना करके भूल जाता है लेकिन उनकी सरकार ने पिछले ओलंपिक की कमियों को दूर करने के प्रयास किये और आलोचना को मौका बना कर काम किया। मोदी ने कहा, ‘पहले दल के साथ जाने वाले अधिकारियों को 100 डॉलर प्रतिदिन और खिलाड़ियों को 50 डॉलर प्रतिदिन भत्ता मिलता था। हमने इस बार सबको बराबरी से 100 डॉलर प्रतिदिन भत्ता देने का फैसला किया। चुने हुए खिलाड़ियों को मनमाफिक मैदान पर, पसंद के ट्रेनर के साथ अपने चुने हुए देश में विश्व स्तरीय अभ्यास का मौका दिया गया और प्रत्येक खिलाड़ी पर 30 लाख से डेढ़ करोड़ रुपए तक खर्च किए गए। पहले ओलंपिक का बजट 15 से 20 करोड़ रुपए होता था लेकिन इस बार 125 करोड़ रुपए तक बजट पहुंच गया है।’

मोदी ने कहा, ‘मैं आज, भारत जिस खिलाड़ी के नाम से गर्व अनुभव करता है (मेजर ध्यानचंद), उनकी साक्षी से खेल जगत की महान परंपरा को याद करते हुए रियो को, हिस्सा लेने वाले देशों को, करतब दिखाने वाले खिलाड़ियों को 125 करोड़ हिन्दुस्तानियों की ओर से शुभकामना देता हूं। मुझे विश्वास है कि विश्व में बंधुता का संदेश देने वाला यह समारोह निर्विघ्न संपन्न होग।’ मोदी ने कहा,‘खेलना जिंदगी की आवश्यकता है लेकिन अंतरराष्ट्रीय जीवन में राष्ट्र की भी आवश्यकता बन गया है। आओ खेलें और खिलें, हम भी खिलें और हमारा देश भी खिले।’

खेलमंत्री विजय गोयल ने कहा कि क्रिकेट से इतर खेलों को भी गांव गांव और मोहल्लों तक पहुंचाना उनकी सरकार का लक्ष्य है और इस दिशा में सतत प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि देश में क्रिकेट ही नहीं बल्कि दूसरे खेलों का भी प्रचार प्रसार हो। खेल शिक्षा का हिस्सा बनें और इसके लिए स्कूल तथा कॉरपोरेट जगत हमें सहयोग करें। सरकार विभिन्न खेलों की आठ और अकादमियां खोलने जा रही है। ब्रिक्स फुटबॉल और अंडर 17 फीफा विश्व कप की हम मेजबानी कर रहे हैं।’ इस मौके पर ओलंपिक में भारत के इतिहास और मौजूदा 119 सदस्यीय दल की जानकारी देने वाला एक खास ब्रोशर भी प्रधानमंत्री ने जारी किया।

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