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Rio Olympics उद्घाटन समारोह 2016: ऑफिसियल यूनिफार्म से नाखुश लड़कियां, पूछा- साड़ी तो ठीक है, उसे ब्लेजर से ढंकवाने का क्या मतलब?

रियो ओलंपिक 2016 की ओपनिंग सेरेमनी में साड़ी के ऊपर ब्‍लेजर पहनने को लेकर महिला एथलीट्स में नाराजगी देखी जा रही है।
Author August 5, 2016 21:37 pm
चार साल पहले लंदन ओलंपिक के दौरान भारतीय खिलाडि़यों का दल।

रियो ओलंपिक 2016 की ओपनिंग सेरेमनी में साड़ी के ऊपर ब्‍लेजर पहनने को लेकर महिला एथलीट्स में नाराजगी देखी जा रही है। चार साल पहले लंदन ओलंपिक के दौरान भी इस तरह की स्थिति बनी थी। उस समय टेनिख खिलाड़ी सानिया मिर्जा और उनकी डबल्‍स पार्टनर रश्मि चक्रवर्ती ने ब्‍लेजर पहनने के बजाय इसे हाथ में ले लिया था। कई अन्‍य महिला खिलाडि़यों ने भी ऐसा ही किया था। ओपनिंग सेरेमनी के लिए महिला और पुरुष एथलीट्स के लिए एक समान नेवी ब्‍ल्‍यू कलर की ब्‍लेजर होती है। बैडमिंटन स्‍टार ज्‍वाला गुट्टा साड़ी पर ब्‍लेजर पहनने से इत्‍तेफाक नहीं रखती हैं। उनका कहना है, ”साड़ी की खूबसूरती अच्‍छे ब्‍लाउज और पल्‍लू के साथ होती है। इसमें थोड़ा सा पेट दिखता है और थोड़ी सी पीठ। ब्‍लेजर पहनने से यह लुक छुप जाता है। हो सकता है मैं इसे ना पहनूं। हो सकता है मैं इसे हाथ में लेकर चलूं। मुझे साड़ी पसंद है और मैं इसमें अच्‍छी दिखती हूं लेकिन ब्‍लेजर…।”

रश्मि इस बार ओलंपिक में नहीं है लेकिन वह लंदन ओलंपिक के बारे में बताती है, ”दुनिया हमारी साड़ी को देखती है और कहती है, बहुत बढि़या। आप इसे छुपाना क्‍यों चाहते हैं। फिर तो आप टी-शर्ट, स्‍कर्ट और ब्‍लेजर पहन सकते हैं। पूरा मकसद ही खत्‍म हो गया। राष्‍ट्रीय पोशाक पहनना और देश का प्रतिनिधित्‍व करना, इस फीलिंग को आप बयां नहीं कर सकते। लेकिन उस ब्‍लेजर को ना कहूंगी।” ब्‍लेजर के बारे में डिजाइनर्स ने दो कारण बताए। पहला- रियो का ठंडा मौसम, वहां पर 28 डिग्री तापमान होगा और दूसरा- भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन का लोगों दिखाना। डिजाइनर स्‍टडी बाई जनक के अभिषेक दुग्‍गल ने बताया, ”यदि आजादी दी जाती तो हमारे पास हजारों डिजाइंस थी। पुरुषों के लिए इंडो-वेस्‍टर्न और बंदगला टाइप।”

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पूर्व लॉंन्‍ग जंपर और 2004 एथेंस ओलंपिक में ध्‍वजवाहक रहीं अंजू बॉबी जॉर्ज इस बारे में कहती हैं, ‘- हम एथलीट हैं और देश की सबसे फिट महिलाओं में से एक। यदि किसी पर बॉडी फिटिंग ब्‍लाउज फिट होता है तो वह हम हैं। ओलंपिक एसोसिएशन की कलंगी इस पर लगाई जा सकती है।” कुछ महिला खिलाडि़यों ने ड्रेस कोड मे बदलाव की मांग भी की है। पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी अपर्णा पोपट का कहना है कि कब तक साड़ी ही चलती रहेगी। बिना पश्चिमी देशों की नकल किए भारत में और भी कई सारी यूनिफॉर्म हैं जिन्‍हें अपनाया जा सकता है। सलवार सूट भी भारतीय ही है। ज्‍वाला गुट्टा भी इस बात का समर्थन करती हैं। बता दें कि ओलंपिक की ओपनिंग सेरेमनी के दौरान 400 मीटर की वॉक होती है। इस दौरान एक देश के दल पर लगभग 20 सैकंड का कवरेज होता है। इसमें पांच सैकंड ध्‍वहवाहक पर, तीन सैकंड तिरंगे पर, तीन सैकंड वीआईपी स्‍टैंड में बैठे लोगों पर, पांच सैकंड बाकी खिलाडि़यों पर और तीन सैकंड का लॉन्‍ग शॉट। इसके बाद अगले देश का नंबर आ जाता है।

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