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बृजभूषण शरण सिंह की रिपोर्टः कुश्ती आज से, टिकी महिला पहलवानों पर निगाह

रियो में भारतीय दल के लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बीच कुश्ती और बैडमिंटन ने पदक की उम्मीद बरकरार रखी है।
Author रियो डि जिनेरियो | August 17, 2016 05:21 am
रियो में भारतीय दल के लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बीच कुश्ती और बैडमिंटन ने पदक की उम्मीद बरकरार रखी है।

रियो में भारतीय दल के लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बीच कुश्ती और बैडमिंटन ने पदक की उम्मीद बरकरार रखी है। बुधवार से शुरू हो रहे कुश्ती अभियान से पूरे देश को अच्छे प्रदर्शन और पदक के लिए मजबूत दावेदारी पेश करने की उम्मीद है। इस दौरान महिला पहलवानों पर सबकी निगाहें टिकी होंगी। इसी बीच रियो से भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने जनसत्ता के लिए लिखे विशेष लेख के माध्यम से अगामी प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों की तैयारियों के बारे में बताया है साथ ही कुश्ती के माध्यम से भारत के लिए पदक को लेकर ‘सूखे का अंत’ होने की बात कही है। हालांकि उन्होंने महिला प्रतिभागियों पर ज्यादा भरोसा जताया है।

बृजभूषण शरण सिंह ने लिखा है कि, खेल गांव में दूसरे खेलों के अबतक जितने भी खिलाड़ी और अधिकारी मुझसे मिले, प्रत्येक ने यही कहा कि कुश्ती के मुकाबलों का उन्हें बेसब्री से इंतजार रहता है। इस उम्मीद में कि पदकों का सूखा जल्द खत्म हो सके। मैं उन्हें देखकर मुस्कुरा भर देता हूं क्योंकि, यह बड़े-बड़े दावे करने का समय नहीं है। यह वक्त है अपने पहलवानों की हौसलाअफजाई करने का। उन्होंने लिखा है कि इस समय मैं पहलवानों से स्वर्ण पदक की बात करके उन पर दबाव नहीं बनाना चाहता क्योंकि इससे उन पर दबाव आ जाएगा और वह अपना स्वाभाविक प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे। हां लेकिन उनसे पदक की उम्मीद जरूर है।

रियो के कुश्ती मुकाबलों के पहले तीन दिन ग्रीको रोमन शैली की कुश्ती के लिए हैं। रवींद्र खत्री 85 किलो वर्ग में हारकर पहले ही बाहर हो चुके हैं। उनका हंगरी के जिस पहलवान से मुकाबला हुआ, वह पिछले साल लॉस वेगास में विश्व चैंपियनशिप में छठे स्थान पर रहा था। वहीं रवींद्र ने एशियाई ओलंपिक क्वालिफाइंग में सिल्वर मेडल हासिल किया था।
उन्होंने कहा कि उनका मुकाबला इतना एकतरफा होगा और रवींद्र मुकाबले में कहीं नहीं दिखेंगे, इसकी उम्मीद तो किसी ने नहीं की थी लेकिन मैं यहां स्पष्ट करना चाहता हूं कि ग्रीको रोमन शैली में हमारे पहलवानों का ओलंपिक तक पहुंचना ही अपने आप में बड़ी बात थी। 2004 के एथेंस ओलंपिक खेलों के बाद इस शैली में हमारे पहलवानों ने कोटा हासिल किया था, जो अपने आप में एक उपलब्धि है।

हालांकि रवींद्र की हंगरी के विक्टर लॉरिनेज के खिलाफ शुरुआत सूझबूझ से भरी रही लेकिन ग्राउंड पोजीशन में वह अपना बचाव नहीं कर पाए और विक्टर ने यहां से पहले चार अंक और बाद में स्टैंडिंग पोजीशन से कुल पांच अंक और बटोरकर मुकाबले को एकतरफा बना दिया। इसी शैली के दूसरे पहलवान हरदीप हैं जिन्होंने 98 किलो में अपनी चुनौती रखी है।
ग्रीको रोमन शैली की कुश्ती के बाद महिलाओं के मुकाबले शुरू होंगे। पहले दिन यानी बुधवार को विनेश फोगट 48 किलो वर्ग में और साक्षी मलिक 58 किलो वर्ग में अपनी चुनौती रखेंगी। विनेश ने पिछले दिनों तुर्की में आयोजित ओलंपिक क्वालिफाइंग मुकाबलों में मुझे काफी प्रभावित किया है। वहां उन्होंने पांच में से चार कुश्तियां तकनीकी फॉल से जीती हैं यानी दस अंकों के अंतर से।

अन्य कुश्ती में भी वह 6-0 से विजयी रहीं। उन्होंने इन छह मुकाबलों में 50 अंक बटोरे जबकि केवल तीन अंक उनके खिलाफ बने। इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका आक्रमण और रक्षण दोनों कितने मजबूत हैं। प्रो रेसलिंग लीग में हम उन्हें चैंपियन की तरह लड़ते देख चुके हैं। वह काफी जुझारू हैं और इसी जुझारूपन की आज भारत को जरूरत है।

उन्होंने कहा कि साक्षी मलिक से मुझे इसलिए ज्यादा उम्मीद है कि उन्होंने अपने खेल को पिछले दो सालों में ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। तुर्की में विनेश के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साक्षी ने ही किया है। वह काफी अनुशासित पहलवान हैं। वह काफी सूझबूझ से लड़ती हैं। विपक्षी को अपने ऊपर हावी न होने के लिए वह काफी ऐहतियात बरतती हैं। अगर मौका देखते ही वह निडर होकर अपनी जुझारू क्षमता का परिचय देने में कामयाब रहीं तो समझिए कि उनसे कुछ उम्मीद की जा सकती है। मैं तो यही कहूंगा कि पिछले वर्षों में महिला कुश्ती ने काफी उम्मीदें जगाई हैं। मेरी कामना है कि उनकी मेहनत रियो में सफल हो।

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