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Rio Olympics 2016: खेलगांव पहुंचने के बाद फूट फूटकर रोई दीपा करमाकर

कोच नंदी ने कहा,‘खेलगांव आने के बाद दीपा को संभालना मुश्किल हो गया था। मामूली अंतर से कांस्य से चूकना हमारे लिए जिंदगी के सबसे बड़े खेद में से रहेगा।’

Author रियो डि जिनेरियो | August 16, 2016 12:54 AM
दीपा करमाकर रियो ओलंपिक में महिला वाल्ट फाइनल्स में करीब से कांस्य पदक से चूक कर चौथे स्थान पर रहीं, लेकिन फिर भी इस भारतीय जिम्नास्ट ने इतिहास रच दिया। यह किसी भी भारतीय जिम्नास्ट का ओलंपिक इतिहास में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। तेईस वर्षीय दीपा ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट बनी थी। उन्होंने औसत 15.066 अंक जुटाये जिससे वह स्विट्जरलैंड की कांस्य पदक विजेता गुईलिया स्टेनग्रुबर (15.216 अंक) से महज 0.15 अंक से चूक गईं। इसके बावजूद जब वह भारती लौंटी को उनका स्वागत हीरो की तरह किया गया। दीपा महिलाओं की वॉल्ट स्पर्धा में चौथे स्थान पर रह गईं लेकिन इसके बावजूद सोशल मीडिया पर उनके लिए जबरदस्त समर्थन देखने को मिल रहा है। त्रिपुरा की दीपा भारत के निराशाजनक अभियान में कुछ चमकदार एथलीटों में से एक रहीं, वह आठ महिलाओं के वाल्ट फाइनल में शानदार प्रदर्शन कर 15.066 अंक से पदक से महज 0.15 अंक से चूक गयी। दीपा ने आठवें नंबर पर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। जब उसकी वाल्ट खत्म हुई तब वो दूसरे नंबर थी। लेकिन उनके बाद की दोनों प्रतिभागी ने अच्छा प्रदर्शन किया और वो चौथे नंबर पर चली गईं। (रियो में प्रदर्शन के दौरान भारत की जिम्नास्ट दीपा करमाकर/REUTERS/Mike Blake)

रियो ओलंपिक की जिम्नास्टिक स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहने के बाद दीपा कर्माकर भले ही मुस्कुराती हुई नजर आई लेकिन उसकी इस मुस्कान के पीछे अपार दर्द छिपा था और खेलगांव लौटने के बाद वह अपने जज्बात पर काबू नहीं रख सकी। खेलगांव पहुंचने के बाद दीपा फूट फूटकर रोई। उसके कोच और पितृतुल्य बिश्वेश्वर नंदी के लिए भी खुद को रोक पाना मुश्किल हो गया था। कोच नंदी ने कहा,‘खेलगांव आने के बाद दीपा को संभालना मुश्किल हो गया था। मामूली अंतर से कांस्य से चूकना हमारे लिए जिंदगी के सबसे बड़े खेद में से रहेगा।’ दीपा और उसके कोच पूरी शाम खेलगांव में एक दूसरे को ढांढस बंधाते रहे।

कोच ने कहा,‘हर कोई खुश था लेकिन हमारी तो दुनिया ही मानो उजड़ गई और वह भी इतने मामूली अंतर से। यह सबसे खराब स्वतंत्रता दिवस रहा। मैं धरती पर सबसे दुखी कोच हूं। यह खेद ताउम्र रहेगा।’ महिलाओं के वोल्ट फाइनल में दीपा का स्कोर 15.266 था और वह स्विटजरलैंड की जिउलिया स्टेनग्रबर से पीछे रही जिसने 15.216 के साथ कांस्य पदक जीता। रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के बाद दीपा के पास तैयारी के लिए तीन महीने का ही समय था। कोच ने कहा, ‘हमने सिर्फ तीन महीने तैयारी की जबकि दूसरे जिम्नास्ट पूरे साल तैयारी करते हैं।’

यह पूछने पर कि क्या विदेश में अभ्यास या कोचों के बारे में विचार किया जा रहा है, नंदी ने कहा,‘मैं विदेशी कोचों के खिलाफ हूं। यदि हम कर सकते हैं तो उनकी क्या जरूरत है। हमें फिट रहने और उसे तोक्यो ओलंपिक 2020 तक फिट बनाए रखने के लिए उचित सुविधायें चाहिए ।’ उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण की तमाम सुविधायें मुहैया कराने के लिये जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा,‘‘हमें सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं मिली।’

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