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रंगारंग समारोह में Rio ने खिलाड़ियों को कहा अलविदा, सी यू इन तोक्यो

16 दिन चले खेलों के इस महासमर में 42 खेलों में 205 देशों के 11000 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।

Author रियो डि जिनेरियो | August 22, 2016 11:49 AM
रियो के माराकाना स्टेडियम में रियो ओलंपिक के समापन समारोह का एक दृश्य। (एपी फोटो)

बारिश के बीच रियो में रंगारंग समापन समारोह में ब्राजील के इस शहर ने दुनिया के हजारों खिलाड़ियों को भावनात्मक विदाई दी जिसके साथ यहां 31वें ओलंपिक खेलों का समापन हो गया। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाक ने खेलों के समापन की घोषणा की जिसके साथ 16 दिन चले खेलों के इस महासमर का आधिकारिक अंत हो गया जिसमें 42 खेलों में 205 देशों के 11000 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। खचाखच भरे ऐतिहासिक माराकाना स्टेडियम में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बाक ने कहा, ‘मैं 31वें ओलंपियाड के खेलों के समापन की घोषणा करता हूं। परंपरा का पालन करते हुए मैं दुनिया भर के युवाओं से चार साल में जापान के तोक्यो में 32वें ओलंपियाड के जश्न के लिए जुटने का आग्रह करता हूं।’

इससे पहले ओलंपिक ध्वज को उतारा गया और इसे अगले ओलंपिक खेलों के मेजबान तोक्यो 2020 के प्रतिनिधियों को सौंपा गया। बाक ने ध्वज तोक्यो की गवर्नर यूरिको कोइके को सौंपा। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने आधुनिक तकनीक वाले इस शो के एक छोटे लेकिन प्रभावी हिस्से में ‘सी यू इन तोक्यो’ परफोर्मेंस के दौरान रोमांचक प्रवेश किया। खिलाड़ियों ने प्रतिस्पर्धा संपन्न होने के बाद सर्द हवा और बारिश के बावजूद जश्न के माहौल का पूरा लुत्फ उठाया। लगभग तीन घंटे लंबे समापन समारोह के दौरान बारिश लगातार जारी रही लेकिन खिलाड़ियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा जो बरसाती के साथ उतरे और इस दौरान उनमें से कई गाना गाने के अलावा नाच रहे थे और सेल्फी ले रहे थे।

खिलाड़ियों ने मैदान पर प्रवेश दिया तो परंपरा के अनुसार युनान की टीम सबसे पहले उतरी। ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान साक्षी मलिक ने भारतीय दल की अगुआई की और ध्वजवाहक बनी। साक्षी ने रियो खेलों में कांस्य पदक के साथ भारत के पदकों का खाता भी खोला था। भारत की ध्वजवाहक बनने का सम्मान साक्षी को मिला क्योंकि रजत पदक विजेता पीवी सिंधू रविवार (21 अगस्त) को ही स्वदेश लौट गई। समारोह में पुरुष और महिला हाकी टीमों के पहलवानों और मुक्केबजों में शिव थापा और मनोज कुमार सहित लगभग 50 खिलाड़ियों ने खिलाड़ियों की परेड में हिस्सा लिया।

भारत एक रजत और एक कांस्य पदक के साथ खेलों में 67वें स्थान पर रहा। अमेरिका ने 46 स्वर्ण, 37 रजत और 38 कांस्य के साथ कुल 121 पदकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। मेजबान ब्राजील सात स्वर्ण, छह रजत और छह कांस्य के साथ 13वें स्थान पर रहा। ब्राजील ने एक दिन पहले इसी स्टेडियम में जर्मनी को हराकर पहली बार पुरुष फुटबॉल का स्वर्ण पदक जीता था और रियो 2016 के निर्णायक लम्हों के दौरान जब नेमार और उसेन बोल्ट जैसे खिलाड़ियों को दिखाया गया तो लोगों ने तालियां बजाकर उनका अभिवादन किया।

आतिशबाजी के बीच 13 हिस्सों के समापन समारोह की शुरुआत हुई जिसमें ‘विमानन जगत के पिता’ माने जाने वाले सांतोस ड्यूमोंट को श्रद्धांजलि दी गई। माराकाना में दर्शकों का स्वागत किया गया। प्रोजेक्शन के जरिये उड़ते हुए पक्षी की नजर से मेजबान शहर रियो डि जिनेरियो के प्रसिद्ध हिस्सों को दिखाया गया जिसमें क्रिस्ट द रिडीमर, सुगरलोफ शामिल रहे और इसका अंत पांच ओलंपिक छल्लों के निर्माण के साथ हुआ। इसके बाद संगीत छा गया। रियो के सांबा के आइकन मार्टिन्हो डा सिल्वा ने अपनी तीन बेटियों के साथ ‘कारिनहोसो’ पर सोलो परफोर्मेंस दी जो ब्राजील के सबसे लोकप्रिय गानों में से एक है।

ब्राजील के राष्ट्रगान को 27 बच्चों ने गाया जो देश के 26 राज्यों और एक संघीय जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। खेलों के असल नायकों शरणार्थी ओलंपिक टीम सहित 207 टीमों के खिलाड़ियों ने एक साथ स्टेडियम में प्रवेश किया और एकजुटता तथा दोस्ती का संदेश दिया। इलेक्ट्रोनिक म्यूजिक के सुपरस्टार काइगो और गायक-गीतकार जूलिया माइकल्स ने इसके बाद ‘कैरी मी’ गाने के साथ खिलाड़ियों की परेड का अंत किया। इसके बाद ब्राजील के आर्टिस्टों ने परफोर्म किया। अगले चरण में रियो में अहम लम्हों का दो मिनट का वीडियो दिखाया गया जबकि इसके बाद अंतिम स्पर्धा पुरुष मैराथन का पदक वितरण समारोह दिखाया गया।

तोक्यो 2020 को 11 मिनट 45 सेकेंड का कार्यक्रम समर्पित रहा जिसमें जापानियों ने आभार जताया और अपने जज्बे, प्रतिबद्धता, साहस और उम्मीद का प्रदर्शन किया जिससे चार साल के समय में और बड़ी सफलता हासिल की जा सके। इसके बाद आधिकारिक प्रोटोकॉल स्पीच दी गई। माराकाना स्टेडियम में हुई आतिशबाजी ने इसके बाद रात के समय रियो के आकाश को जगमगा दिया और अंत में ओलंपिक मशाल को बुझा दिया गया जिससे खेलों के इस महासमर को अंतिम विदाई दी गई।

बाक ने इस दौरान स्वयंसेवकों, खिलाड़ियों और पहली बार आलंपिक में हिस्सा ले रही शरणार्थी ओलंपिक टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ‘आपने, दुनिया भर के खिलाड़ियों ने हमें दुनिया को एकजुट करने में खेलों की ताकत दिखाई। एक साथ मिलकर हम और आगे जा सकते हैं। एक साथ मिलकर हम ऊंचा लक्ष्य बना सकते हैं। अपनी विविधता में हम एकजुट हैं, हम मजबूत हैं।’ उन्होंने कहा, ‘धन्यवाद, प्रिय शरणार्थी खिलाड़ियों। आपने अपनी प्रतिभा और मानवीय भावना से हमें प्रेरित किया। आप दुनिया भर के लाखों शरणार्थियों के लिए उम्मीद की किरण हो। आप इन ओलंपिक के बाद भी हमारे साथ रहेंगे।’

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