ताज़ा खबर
 

गोपीचंद ने कहा- पीवी सिंधु का अभी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना बाकी है

यह पूछने पर कि क्या भारत 2020 तोक्यो में स्वर्ण पदक जीत सकता है तो गोपीचंद ने कहा, ‘मैं जानता हूं कि यह कठिन काम है। काफी मजबूत खिलाड़ी हैं, जिनके खिलाफ हम खेलेंगे।

Author हैदराबाद | August 22, 2016 10:06 PM
सोमवार (22 अगस्त) को हैदराबाद के गाचीबोवली स्टेडियम में स्वागत समारोह के के दौरान हाथ लहराते कोच पुलेला गोपीचंद और रियो में रजत पदक हासिल करने वाली पीवी सिंधु। (PTI Photo)

स्टार शटलर पीवी सिंधु ने रियो ओलंपिक में भले ही रजत पदक जीत लिया हो लेकिन उनके मेंटर और कोच पुलेला गोपीचंद का मानना है कि उनकी शिष्या अब भी अपनी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन करने से काफी पीछे है और उन्होंने कहा कि उसमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को पछाड़ने की प्रतिभा है। गोपीचंद ने पत्रकारों से कहा, ‘मुझे लगता है कि वह अभी पूरी तरह के बदलाव से काफी दूर है। मेरा मानना है कि वह जितनी सक्षम है, हमने अभी उसकी सिर्फ झलक ही देखी है। उसमें अपार क्षमता है और मैं उसके यह अहसास करने का इंतजार कर रहा हूं। इसमें समय लग सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘हमें धैर्य रखना होगा। हमें समझना होगा कि परिणाम भले ही निरंतर नहीं आये, जैसा कि हम चाहते हैं। लेकिन यह अहम है कि वह इसे समझे और कोशिश करे। वह अभी सिर्फ 21 साल की है और उसके पास आगे शायद 10 साल और है। एक बार उसे अहसास हो जाये कि मैं क्या देखता हूं तो वह दुनिया की बाकी खिलाड़ियों से काफी आगे निकल जाएगी।’

सिंधु की तारीफों के पुल बांधते हुए गोपीचंद ने कहा, ‘सच यही है कि इस बड़े मंच पर जब सबसे ज्यादा जरूरत थी, उसने अच्छा प्रदर्शन किया, यह काफी बड़ी चीज है। कई एथलीटों में आत्मविश्वास तो होता है लेकिन वे अंतिम क्षण में टूट जाते हैं।’ गोपीचंद ने कहा, ‘हमने काफी अच्छी प्रगति की और रियो में भी हमारी ओलंपिक के लिए तैयारी काफी शानदार रही क्योंकि हम एक ही फ्लैट में रह रहे थे। इसलिए हम अच्छी तरह से हर चीज की योजना बना सके। अच्छी चीज यह रही कि जब मायने रखता था, वह अपना काम पूरा करने में हिचकिचायी नहीं।’ सिंधु रियो में रजत पदक जीतकर काफी खुश हैं, उसने कहा, ‘ओलंपिक पदक जीतकर मेरा सपना सच हो गया। प्रत्येक टूर्नामेंट अलग होता है। ओलंपिक बहुत बड़ा होता है। मैं अपने माता पिता की शुक्रगुजार हूं।’

सिंधु ने कहा, ‘गोपी सर हमेशा प्रेरित करते रहते हैं। वह भले ही दूसरों को गुस्से में लगते हो लेकिन मेरे लिए यह उनकी प्रेरणा थी जिससे मुझे मदद मिली। पिछले दो महीने हमने काफी कड़ी मेहनत की और काफी बलिदान दिए जिसका हमें फल मिला। हमने पदक के बारे में नहीं सोचा था। हमने सिर्फ एक मैच पर ही ध्यान लगाया और मैं खुश हूं कि मैंने पदक जीता।’ यह पूछने पर कि क्या भारत 2020 तोक्यो में स्वर्ण पदक जीत सकता है तो गोपीचंद ने कहा, ‘मैं जानता हूं कि यह कठिन काम है। काफी मजबूत खिलाड़ी हैं, जिनके खिलाफ हम खेलेंगे। हमारा पदक हमें निशाने पर ले आएगा लेकिन एक बात है कि उम्र हमारे साथ है। हमारे पास काफी खिलाड़ी हैं जो कह रहे थे कि 2020 हमारे लिए है। इसलिए उम्मीद करते हैं कि हम प्रेरित रहेंगे और एक दूसरे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे तथा तोक्यो की दौड़ में बरकरार रहेंगे।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App