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पहलवान नरसिंह यादव डोप टेस्ट में नाकाम, रियो ओलंपिक से कट सकता है टिकट, सुशील भी नहीं जा सकेंगे

नरसिंह यादव प्रतिबंधित स्टेरायड के सेवन का दोषी पाया गया है। उसका बी नमूना भी पॉजीटिव निकला।

Author नई दिल्ली | Updated: July 24, 2016 5:06 PM
पहलवान नरसिंह यादव बनाम सुशील कुमार।

भारत की ओलंपिक तैयारियों को रविवार (24 जुलाई) को करारा झटका लगा जब सुशील कुमार पर तरजीह देकर चुने गए पहलवान नरसिंह यादव नाडा द्वारा कराए गए डोप टेस्ट में नाकाम रहे जिससे वह अगले महीने शुरू हो रहे रियो ओलंपिक से भी लगभग बाहर हो गए हैं। राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजंसी के महानिदेशक नवीन अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की कि नरसिंह के बी नमूने में भी प्रतिबंधित स्टेरायड के अंश पाए गए हैं। वह शनिवार (23 जुलाई) नाडा की अनुशासन पेनल के सामने पेश हुआ था। सूत्रों ने कहा कि उसे प्रतिबंधित अनाबालिक स्टेरायड मेथांडिएनोन के सेवन का दोषी पाया गया।

नाडा डीजी ने कहा,‘नरसिंह प्रतिबंधित स्टेरायड के सेवन का दोषी पाया गया है। उसका बी नमूना भी पॉजीटिव निकला। जब उसका बी नमूना खोला गया तब वह खुद भी मौजूद था।’ उन्होंने कहा,‘वह शनिवार (23 जुलाई) को अनुशासन पेनल के सामने पेश हुआ। पेनल ने इस मसले पर और रिपोर्ट मांगी है। मुझे उम्मीद है कि पेनल जल्दी कार्रवाई करेगी। हमें तब तक इंतजार करना होगा।’ यह पूछने पर कि क्या नरसिंह रियो ओलंपिक नहीं खेल सकेगा, अग्रवाल ने कहा,‘अभी कुछ कहना कठिन है। हम जल्दी ही प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश करेंगे। मैं अभी कोई कयास नहीं लगा सका।’

नरसिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ के करीबी सूत्रों ने कहा कि पूरा घटनाक्रम एक साजिश लग रहा है। सूत्रों ने कहा,‘इसमें कोई साजिश है। नरसिंह का साफ सुथरा इतिहास रहा है। उसके खिलाफ साजिश की गई है। 74 किलो वर्ग में नुमाइंदगी का फैसला बाद में किया जाएगा लेकिन लगता है कि रियो में 74 किलो वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व नहीं होगा। नरसिंह को अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया गया है।’ पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले नरसिंह का रियो ओलंपिक के लिए चयन विवादित हालात में हुआ था क्योंकि ओलंपिक दोहरे पदक विजेता सुशील ने 74 किलो वर्ग में दावेदारी ठोकी थी। नरसिंह ने चूंकि विश्व चैम्पियनशिप के जरिये कोटा हासिल किया था डब्ल्यूएफआई और दिल्ली उच्च न्यायालय दोनों ने सुशील की मांग खारिज कर दी। नरसिंह को हालांकि इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी।

खेल मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की कि एक पहलवान डोप टेस्ट में नाकाम रहा है हालांकि इसने यादव का नाम नहीं लिया। मंत्रालय ने कहा,‘एक पहलवान को राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी ने डोप टेस्ट में पॉजीटिव पाया है। नाडा की डोपिंग निरोधक अनुशासन पेनल मामले की सुनवाई कर रही है। शनिवार (23 जुलाई) इसकी पहली सुनवाई हुई जिसके तहत पहलवान को अपने बचाव का मौका दिया जाएगा।’ इसमें कहा गया,‘सुनवाई के बाद पेनल ने नाडा से कुछ और रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने पर आगे सुनवाई की जायेगी। एडीडीपी के अध्यक्ष कानून विशेषज्ञ हैं जिसमें डाक्टर और खिलाड़ी भी शामिल है। नाडा युवा कार्य और खेल मंत्रालय के तहत स्वायत्त ईकाई है जो खेलों में डोपिंग की जांच करती है।’

इसमें कहा गया,‘भारत विश्व डोपिंग निरोधक आचार संहिता को लेकर प्रतिबद्ध है और प्रक्रिया का पालन करता है। सरकार नाडा के दैनंदिनी काम में दखल नहीं देती और डोपिंग से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता तथा निष्पक्षता बरतती है।’ भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव राजीव मेहता ने इस बात से इनकार किया कि पूरे मामले से सुशील को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि ओलंपिक के लिए प्रविष्टियां भेजनी की आखिरी तारीख 18 जुलाई थी जो बीत चुकी है। उन्होंने कहा,‘जहां तक सुशील कुमार की बात है तो उसके लिये नरसिंह की जगह जाने का कोई मौका नहीं है। खिलाड़ियों की प्रविष्टि की समय सीमा निकल चुकी है।’

डब्ल्यूएफआई सूत्रों ने कहा कि नरसिंह को सोनीपत में अभ्यास शिविर में भी भाग नहीं लेने के लिए कहा गया था लेकिन इसके बावजूद उसने भाग लिया। नरसिंह के प्रायोजक जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स ने भी उसका समर्थन करते हुए कहा,‘कोई गंदा खेल खेल रहा है। वह भारत की पदक उम्मीद है लेकिन वह पूरी तरह हिल चुका है। यह दुखद है कि भारत में हम अपने खिलाड़ियों को शांति से अभ्यास भी नहीं करने दे सकते।’

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