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मां से किया वादा निभाया, इनाम में मोटरसाइकिल जीत बदला पिता का दिल, रोचक है केकेआर के राइजिंग स्टार रिंकू सिंह की कहानी

अलीगढ़ में आयोजित ‘स्कूल टी20 विश्व कप’ के दौरान रिंकू सिंह मैन ऑफ द सीरीज चुने गए थे। टूर्नामेंट के आयोजकों ने रिंकू को मोटरसाइकिल दी। रिंकू के लिए यह वरदान साबित हुआ।

कोलकाता नाइट राइडर्स और उत्तर प्रदेश के हरफनमौला खिलाड़ी रिंकू सिंह अपने माता-पिता के साथ गैस सिलेंडर स्टॉकयार्ड के अंदर दो कमरों के आवास में। (एक्सप्रेस फोटो: गजेंद्र यादव)

कोलकाता नाइटराइडर्स के क्रिकेटर रिंकू सिंह अब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। आईपीएल 2022 में शानदार प्रदर्शन करने वाले इस खिलाड़ी के रूम में खूब ट्रॉफियां हैं। इसमें एक ट्राफी और आ गई है। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ शानदार पारी के लिए वह मैन ऑफ द मैच चुने गए थे। उन्होंने इसे लेकर कहा कि यह उनका पहला मैन ऑफ द मैच खिताब उनके लिए खास है। एक और ट्रॉफी है उनके लिए बहुत खास है। वह अपने गृहनगर अलीगढ़ में आयोजित ‘स्कूल टी20 विश्व कप’ के दौरान मैन ऑफ द सीरीज चुने गए थे। टूर्नामेंट के आयोजकों ने रिंकू को मोटरसाइकिल दी। रिंकू के लिए यह वरदान साबित हुआ।

रिंकू ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, “उस दिन मेरे पिता ने क्रिकेट खेलने के लिए मुझे पीटना बंद कर दिया था। जब भी मैं मैच से लौटता था तो मेरी पिटाई होती थी क्योंकि मेरे पिता को लगता था कि मैं अपना समय बर्बाद कर रहा हूं। मोटरबाइक से उनका हृदय परिवर्तन हुआ। उन्होंने महसूस किया कि मैं वास्तव में खेल खेल सकता हूं। इसके अलावा हम उस समय मोटरबाइक खरीदने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। यह मेरे और परिवार के लिए एक बड़ा दिन था।”

मोटरसाइकिल ने उनके पिता खानचंद सिंह के काम को आसान बना दिया। वह घर-घर गैस डिलीवरी करते थे। उन्होंने उस पर सिलेंडर ढोए और उनके बड़े बेटे ने इसमें उनकी मदद की। खानचंद ने एक पुराने ट्यूब टीवी पर अपने तीसरे बेटे रिंकू को 2022 सीजन में खेलते देखा। खानचंद और उनकी पत्नी वीना अभी भी एक गैस सिलेंडर स्टॉकयार्ड के परिसर में दो कमरों वाले घर में रहते हैं। रिंकू ने आईपीएल और रणजी ट्रॉफी की शुरुआत के बीच बचे समय में रामबाग कॉलोनी में एक नए बने तीन मंजिला घर में शिफ्ट हो गए। वह शाम को अभ्यास से पहले परिवार को समय देने के लिए और भोजन के लिए प्रतिदिन वहां जाते हैं।

रिंकू ने कहा, “मैंने पापा को नए घर में रहने को कहा, लेकिन पापा यहां स्टॉकयार्ड में रहना चाहते हैं। वह यहां 35 साल से काम कर रहे हैं। इसलिए वह इस माहौल में सहज हैं।” स्टॉकयार्ड बचपन की यादों से भरा है। खानचंद एक गेट को दिखाते हैं, जहां वह अपने क्रिकेट के दीवाने बेटों के घर लौटने का इंतजार करते थे। उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता था कि वे मेरी तरह बर्बाद हो जाएं। मैं चाहता था कि वे पढ़ाई करें और बढ़िया नौकरी पाएं। इसलिए मैं उनके क्रिकेट खेलने के खिलाफ था। रिंकू को यह हमेशा याद रहेगा क्योंकि वह सबसे ज्यादा पीटता था।”

किशोरावस्था में ही रिंकू का करियर लगभग पटरी से उतर गया था। उन्हें ठीक से याद नहीं है कि वह कितने साल के थे जब वह अपने भाई के साथ एक कोचिंग क्लास सेंटर में नौकरी की तलाश में परिवार की मदद करने के लिए गए थे बाद में उन्होंने अपनी मां से क्रिकेट खेलकर परिवार की मदद करने का वादा किया था।

रिंकू ने इसके बारे में बताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि यह साल 2010 था। मैंने अभी खेलना शुरू किया था, लेकिन मां ने मुझे नौकरी तलाशने के लिए कहा क्योंकि हमें पैसा कमाना था। कोचिंग सेंटर में उन्होंने मुझे झाडू और सफाई करने को कहा। मुझे कहा गया था कि इसे सुबह जल्दी करूं ताकि कोई मुझे देख न सके। मैंने इसे नहीं करने का फैसला किया। मैंने घर आकर मम्मी से कहा कि मैं क्रिकेट खेलकर परिवार की मदद करूंगा।”

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