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IPL-10: रायल चैलेंजर्स बेंगलुरु से हारकर बोले राहुल द्रविड़, कहा- करीबी मैचों में जीत न दर्ज करने का है मलाल

दिल्ली डेयरडेविल्स के इंडियन प्रीमियर लीग प्ले आफ में जगह बनाने में नाकाम रहने के बाद टीम के मेंटर राहुल द्रविड़ ने कहा कि वह निराश हैं कि उनकी टीम मौजूदा सत्र में करीबी मैचों में जीत दर्ज करने में नाकाम रही।

Author नई दिल्ली | May 15, 2017 13:54 pm
राहुल द्रविड़ के बाद अजिंक्य रहाणे एेसे दूसरे भारतीय ओपनर हैं, जिन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे शतक लगाया हो।

दिल्ली डेयरडेविल्स के इंडियन प्रीमियर लीग प्ले आफ में जगह बनाने में नाकाम रहने के बाद टीम के मेंटर राहुल द्रविड़ ने कहा कि वह निराश हैं कि उनकी टीम मौजूदा सत्र में करीबी मैचों में जीत दर्ज करने में नाकाम रही। दिल्ली की टीम कल भी यहां रायल चैलेंजर्स बेंगलूर के 162 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 20 ओवर में 151 रन पर सिमट गई जिससे द्रविड़ निराश दिखे। द्रविड़ ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘हम निराश हैं। इस सत्र में हम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। कई मैच करीबी थे जिन्हें हम जीतने में नाकाम रहे और हमारे उच्च्पर दबाव आ गया। हमारे आठ मैच करीबी थे जिसमें से हम केवल दो में जीत दर्ज कर पाए। पांच से छह मैच हम जीत की स्थिति में होने के बावजूद हार गए।

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में करीबी मैच जीतना महत्वपूर्ण होता है। अगर हम तीन और मैच जीत लेते तो बेहतर रहता।’’
द्रविड़ ने हालांकि कहा कि पिछले दो साल में टीम के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दो साल में हमारे प्रदर्शन में सुधार हुआ है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। हमे करीबी मैचों में हार का नुकसान उठाना पड़ा। इस टूर्नामेंट के प्ले आफ में जगह बनाने के लिए आठ जीत की जरूरत होती है। पिछले साल हमने सात मैच जीते जबकि इस साल छह मैच जीतने में सफल रहे। हम निराश हैं कि उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए।

दिल्ली की टीम को अपने खिलाड़ियों की चोटों को खामियाजा भी भुगतना पड़ा जिसके कारण पूरे टूर्नामेंट के दौरान टीम को अंतिम एकादश में सामंजस्य बैठाने के लिए जूझना पड़ा। पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज द्रविड़ ने कहा, ‘‘हमें खिलाड़ियों की चोटों से भी नुकसान हुआ लेकिन यह किसी के हाथ में नहीं हैं। क्विंटन डि काक और जेपी डुमिनी चोटों के कारण टूर्नामेंट के लिए ही नहीं आ पाए। श्रेयस अय्यर चिकन पाक्स के कारण शुरूआती मैचों से बाहर हो गए। कोरी एंडरसन भी चोटिल था जबकि जहीर भी टूर्नामेंट के बीच में चोटिल हो गए। क्रिस मौरिस टूर्नामेंट के अंतिम चरण में चोट के कारण नहीं खेल पाए।

द्रविड़ ने साथ ही स्वीकार किया उनके खिलाड़ी प्रतिभावान हैं लेकिन अनुभव की कमी टूर्नामेंट के दौरान सामने आई।
उन्होंने कहा, ‘‘आपको यह स्वीकार करना होगा कि नीलामी के बीच में आपको अनुभवी भारतीय खिलाड़ी नहीं मिलेंगे क्योंकि कोई टीम उन्हें नहीं छोड़ेगी। इसलिए हमने युवा प्रतिभावान खिलाड़ियों को टीम में चुना और अनुभव के लिए विदेशी खिलाड़ियों पर निर्भर होने का फैसला किया। लेकिन क्विंटन डिकाक और जेपी डुमिनी जैसे हमारे दो अनुभवी खिलाड़ी टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही बाहर हो गए।’’
द्रविड़ ने टूर्नामेंट में प्रभावी प्रदर्शन करने वाले युवा विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत और संजू सैमसन की भी तारीफ की।
दिल्ली डेयरडेविल्स के मेंटर द्रविड़ ने कहा, ‘‘पंत और सैमसन जैसे युवा खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन उन्हें अपने प्रदर्शन में निरंतरता लानी होगी। टूर्नामेंट से ठीक पहले उसे पिता का निधन हो गया लेकिन इसके बावजूद वह टूर्नामेंट में खेला जो उसकी मानसिक मजबूती को दिखाता है।

उन्होंने कहा, संजू सैमसन भी काफी अच्छा खेला। उसने एक मैच में शतक भी जड़ा लेकिन उसने भी स्वीकार किया है कि उसे अपने प्रदर्शन में निरंतरता लाने की जरूरत है। द्रविड़ ने टूर्नामेंट में मुंबई इंडियन्स को प्रबल दावेदार बताया लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें राइजिंग पुणे सुपरजाइंट, सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स से भी कड़ी चुनौती मिलेगी जिनके पास कई मैच विजेता खिलाड़ी हैं।
दूसरी तरफ अंक तालिका में अंतिम स्थान पर रही रायल चैलेंजर्स बेंगलूर के तेज गेंदबाज हर्षल पटेल ने कहा कि टीम का प्रदर्शन मौजूदा सत्र में निराशाजनक रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘बेशक हमारा प्रदर्शन निराशाजनक रहा। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही हमारे कई खिलाड़ी :कप्तान विराट कोहली और एबी डिविलियर्स: चोटिल थी जिसके कारण हम टूर्नामेंट में अच्छी शुरूआत नहीं कर पाए। शुरूआती मैचों में हमारी अनुभवहीन टीम खेली और हम सही संयोजन नहीं बनाए पाए। इस तरह के टूर्नामेंट में अगर आप सामंजस्य नहीं बैठा पाते तो फिर पूरे टूर्नामेंट के दौरान पिछड़ते जाते हैं।
हर्षल ने कहा कि कप्तान कोहली की मौजूदगी के कारण प्ले आफ की दौड़ से बाहर होने के बावजूद टीम में प्रेरणा की कोई कमी नहीं थी।
उन्होंने कहा, ‘‘विराट कोहली की बाडी लैंग्वेज हमेशा सकारात्मक रहती है। टीम हारे या जीते वह पूरी तरह से पेशेवर रवैया अपनाता है जिससे हमें प्रेरणा की कभी कोई कमी नहीं हुई। टूर्नामेंट के सकारात्मक पक्षों के बारे में पूछने पर हर्षल ने कहा, ‘‘अंतिम मैच में आवेश खान ने शानदार गेंदबाजी की। पवन नेगी ने अच्छा प्रदर्शन किया। युजवेंद्र चहल ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया जबकि केदार जाधव की फार्म भी सकारात्मक पक्ष रही।’’

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