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नस्लवाद: विश्व कप विजेता कप्तान ने ICC को धिक्कारा, कहा- आवाज उठाइए नहीं तो आप भी इसके दोषी होंगे

डैरेन सैमी से पहले वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान क्रिस गेल भी क्रिकेट में नस्लवाद का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था, ‘नस्लभेद सिर्फ फुटबाल में नहीं है।। यह क्रिकेट में भी है।’

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: June 2, 2020 5:21 PM
darren sammy 850डैरेन सैमी की अगुआई में वेस्टइंडीज की टीम 2012 और 2016 में टी20 वर्ल्ड चैंपियन बन चुकी है।

अमेरिका में अफ्रीकी मूल के बाउंसर जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद नस्लवाद का मुद्दा गरमाया हुआ है। अमेरिका में बडे़ पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। दुनिया भर में नस्लवाद के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। इस कड़ी में वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान डैरेन सैमी का नाम भी जुड़ गया है। डैरेन सैमी अपनी अगुआई में वेस्टइंडीज को 2-2 बार (2012 और 2016) में वर्ल्ड चैंपियन बना चुके हैं।

डैरेन सैमी ने आईसीसी से नस्लवाद के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर उसने ऐसा नहीं किया तो इस समस्या के लिए वह भी दोषी ठहराया जाएगा। सैमी ने इस संबंध में सिलसिलेवार कई ट्वीट किए। बता दें कि अमेरिका में एक श्वेत पुलिस अधिकारी ने जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन अपने घुटने से दबा दी थी, जिसके कारण उसकी मौत हो गई थी।

डैरेन सैमी ने ट्वीट किया, ‘ताजा वीडियो देखने के बाद भी अगर क्रिकेट जगत अश्वेतों के खिलाफ हो रही नाइंसाफी के खिलाफ खड़ा नहीं होगा तो उसे भी इस समस्या का हिस्सा माना जाएगा। अश्वेतों को सिर्फ अमेरिका ही नहीं दुनिया भर में नस्लवाद झेलना पड़ता है।’

उन्होंने एक तरह से क्रिकेट की वैश्विक संस्था को धिक्कारते हुए पूछा, ‘क्या आईसीसी और बाकी सभी बोर्डों को दिखता नहीं है कि मेरे जैसे (अश्वेतों) लोगों के साथ क्या होता है? क्या मेरे जैसे लोगों के साथ हो रहा सामाजिक अन्याय नजर नहीं आता?’

सैमी ने आगे लिखा, ‘यह सिर्फ अमेरिका में नहीं है। यह रोज होता है। अब चुप रहने का समय नहीं है। मैं आपकी आवाज सुनना चाहता हूं। अश्वेत लोग लंबे समय से सहन करते आए हैं। मैं सेंट लूसिया में हूं। मुझे जॉर्ज फ्लॉयड की मौत का दुख है। क्या आप भी बदलाव लाने के लिए अपना समर्थन देंगे। #ब्लैक लाइव्स मैटर।’


डैरेन सैमी से पहले वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान क्रिस गेल भी क्रिकेट में नस्लवाद का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था, ‘नस्लभेद सिर्फ फुटबाल में नहीं है।। यह क्रिकेट में भी है। यहां तक कि टीमों के अंदर भी एक अश्वेत होने के तौर पर मुझे अहसास हुआ है।’

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