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‘घरेलू क्रिकेट में मारे जाते हैं नस्लीय ताने, खासकर दक्षिण भारतीय खिलाड़ियों को,’ डैरेन सैमी के आरोप के बाद बोले इरफान पठान

विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मैंने किसी को उन (अपमानजनक) शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सुना है। पार्थिव ने भारत के लिए 25 टेस्ट और 38 वनडे खेले हैं।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: June 8, 2020 1:43 PM

डैरेन सैमी ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खुद के साथ नस्लीय भेदभाव होने का आरोप लगाया है। हालांकि, उनके टीम सनराइजर्स हैदराबाद के पूर्व साथियों ने इससे इंकार किया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भी कहा है कि उसे आईपीएल के इन 11 साल के दौरान किसी भी खिलाड़ी की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है। सैमी को इस मामले की तुरंत रिपोर्ट करनी चाहिए थी।

अपनी अगुआई में वेस्टइंडीज को दो बार टी20 वर्ल्ड कप जिताने वाले सैमी 2013 और 2014 में सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से खेले। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में आरोप लगाया था कि उन्हें श्रीलंकाई ऑलराउंडर थिसारा परेरा को टीम में ‘कालू’ कहकर पुकारा जाता था। पार्थिव पटेल, इरफान पठान और वाई वेणुगोपाल राव तीनों सनराइजर्स हैदराबाद में उनके साथी रहे हैं। उनमें से किसी ने भी पूर्व कप्तान के दावे का समर्थन नहीं किया।

‘द टेलिग्राफ’ की खबर के मुताबिक, विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मैंने किसी को उन (अपमानजनक) शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सुना है। पार्थिव ने भारत के लिए 25 टेस्ट और 38 वनडे खेले हैं। वर्तमान में आंध्र क्रिकेट एसोसिएशन के निदेशक वेणुगोपाल ने कहा, ‘मुझे बहुत यकीन नहीं है… इसके बारे में पता नहीं है।’

हालांकि, इरफान ने स्वीकार किया कि भारतीय क्रिकेट में नस्लवादी ताने नई बात नहीं है। मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय खिलाड़ियों को इस तरह के ताने का सामना करना पड़ा, खासकर घरेलू क्रिकेट में। उन्होंने कहा, ‘मैं 2014 में उनके (सैमी) साथ था। मुझे ऐसी बातों की जानकारी नहीं है, क्योंकि इसकी कोई ज्यादा चर्चा नहीं हुई थी।’

पठान ने कहा, ‘लेकिन इसके साथ-साथ, हमें हमारे लोगों को एजुकेट करने की जरूरत है, क्योंकि मैंने इसे घरेलू क्रिकेट में देखा है। विशेष रूप से हमारे दक्षिण के कुछ क्रिकेटरों ने नार्थ और वेस्ट इंडिया में खेलने के दौरान इसका सामना किया है। हालांकि, हालांकि मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता।’

पठान ने कहा, ‘भीड़ में क्या होता है, कोई मसखरी करने की कोशिश करता है। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि लोग नस्लवादी हैं। ऐसा लगता है कि कोई इंसान कुछ ठिठोलीबाजी कर लोकप्रिय होने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, कभी-कभी यह सीमा पार कर जाता है।’

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