वेंकट कृष्णा बी। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का नाम सुनते ही दिमाग में करोड़ों रुपये की बोली, ग्लैमर और रातों-रात मिलने वाले स्टारडम की तस्वीर उभरती है। क्रिकेट की दुनिया में कहा जाता है कि शोहरत को संभालना सबसे मुश्किल काम है, खासकर तब जब कोई रातों-रात सुर्खियों में आ जाएं। हालांकि, इस चकाचौंध से कोसों दूर, एक ऐसा युवा सितारा है जिसकी सफलता की पटकथा भोपाल की धूल भरी पिचों पर लिखी गई। नाम है प्रियांश आर्या।

मैदान पर 37 गेंद में नौ छक्के की मदद से 93 रन कूटने वाला यह युवा बल्लेबाज ऑफ-सीजन में कैंप में एक साधु जैसी एकाग्रता के साथ जीवन जीता है। कैंप में न हाथ में स्मार्टफोन होता है, न ही कोई वीआईपी ट्रीटमेंट। होती है तो बस सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक का अनवरत अभ्यास और गायत्री मंत्र से मिलने वाली आध्यात्मिक शांति। 70 अन्य लड़कों की भीड़ में खुद को एक साधारण प्रशिक्षु मानकर पसीना बहाने वाले इस बल्लेबाज ने साबित कर दिया कि मैदान पर जो छक्कों का तूफान दिखता है, उसके पीछे कितनी गहरी और खामोश साधना छिपी है।

12 घंटे का सेशन

संजय भारद्वाज ने जान-बूझकर इस कैंप को इसी तरह बनाया है। सेशन बारह घंटे चलता है। सुबह छह बजे से रात छह बजे तक, बीच में एक घंटे का ब्रेक। फिटनेस, स्किल, दोहराव। ट्रेनिंग शुरू होने से पहले, प्रियांश आर्या गायत्री मंत्र का जाप करते हैं। फिर भ्रामरी प्राणायाम। प्रियांश आर्या जब नौ साल के थे तब से संजय भारद्वाज उन्हें ट्रेनिंग दे रहे हैं।

स्टारडम संभालना आसान नहीं

संजय भारद्वाज कहते हैं, ‘‘जब आप IPL में खेलते हैं, तो स्टारडम जल्दी मिल जाता है और युवाओं के लिए इसे संभालना आसान नहीं होता। आप सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे होते हैं और एक स्टेटस का दबाव होता है। आप वह बनने की कोशिश करते हैं जो आप असल में नहीं हैं। कैंप में, जहां लगभग 70 दूसरे लड़के थे, वह उनमें से बस एक था। उसमें IPL खिलाड़ी होने का कोई घमंड नहीं था। वह बिल्कुल वैसा ही नौ साल का बच्चा था जैसा मैंने उसे पहले देखा था।’’

संजय भारद्वाज ने बताया, ‘‘इन सबके पीछे की वजह खास है। पिछले सीजन की शानदार सफलता के बाद, हमने सोचा कि सब कुछ भगवान पर छोड़ देना ही सबसे अच्छा रहेगा। हमने इसका पूरा श्रेय ऊपर वाले को दे दिया। चूंकि उसने अच्छा प्रदर्शन किया है, इसलिए उम्मीदें बहुत ज्यादा होंगी और जब उम्मीदें होती हैं, तो अतिरिक्त दबाव भी होता है। वैसे भी आईपीएल में दबाव पहले से ही बहुत ज्यादा होता है तो फिर और ज्यादा बोझ क्यों डाला जाए? अगर उसने ऐसा किया, तो लगातार अच्छा प्रदर्शन करना मुमकिन नहीं होगा। आप टीम को आगे नहीं रखेंगे, बल्कि अपने खेल को आगे रखने की कोशिश करेंगे। पावरप्ले टीम के लिए है। इसके बाद आप जो करते हैं, वह आपके लिए है।’’

चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ प्रियांश आर्या ने 11 गेंद में 39 रन बनाकर 210 रन के लक्ष्य का पीछा करने की नींव रखी। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 220 रन का पीछा करते हुए उन्होंने पहले ही ओवर में 18 रन बनाए और कुल 20 गेंद में 57 रन बनाकर पारी खेली।

दूसरे सीजन की चुनौती

मार्च में जब ब्रैड हैडिन ने भारत के लिए फ्लाइट पकड़ी तो उनके मन में बस एक ही सवाल था, प्रियांश आर्या अपने दूसरे सीजन में कैसा प्रदर्शन करेंगे। विपक्षी टीमें उनके खेल का अच्छी तरह अध्ययन करके मैदान में उतरेंगी? दूसरे सीजन की चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गेंदबाज आपस में चर्चा करते हैं। रणनीतियां बनाई जाती हैं। चंडीगढ़ में प्रियांश आर्या का जो रूप उन्हें और रिकी पोंटिंग को देखने को मिला, वह वैसा बिल्कुल नहीं था। इसके वह खुद मानसिक रूप से तैयार होकर आये थे।

कुछ खास है प्रियांश: सरनदीप

दिल्ली के कोच सरनदीप सिंह कहते हैं, वह अब काफी परिपक्व हो गया है। वह सचमुच कुछ खास है। वह ऐसे कारनामे कर सकता है, जो दूसरे बल्लेबाजों के बस की बात नहीं। पिछले साल हमें इसकी एक झलक देखने को मिली थी। अब उसे खेल की गहरी समझ हो गई है और वह यह भी बखूबी समझता है कि उसके सामने खेल किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस समय तो, उसकी पूरी क्षमता का दोहन होना अभी बाकी है।

सरनदीप सिंह ने बताया, ‘‘प्रियांश आर्या को क्रीज पर पर देखिए। वह एकदम शांत खड़े हैं। उनके कंधे थोड़े खुले हुए हैं, जिससे आउटफील्ड में जगह बन जाती है। वह गेंद की लेंथ को बहुत जल्दी भांप लेते हैं और एक बार जब उन्हें इसका अंदाजा हो जाता है तो उनके तेज हाथ बाकी का काम कर देते हैं। बैट के एक ही झटके से बिना किसी जाहिर मेहनत के गेंद बहुत दूर तक चली जाती है। जब कोई मौका नहीं मिलता तो वह गेंद को सिर्फ रोक देते हैं।’’

लेंथ को जल्दी भांप लेते हैं प्रियांश

सरनदीप सिंह ने बताया, ‘‘प्रियांश आर्या की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह गेंद की लेंथ को जल्दी भांप लेता है। इससे वह अच्छी पोजिशन में आ पाता है और अपनी तेज हाथ की गति की बदौलत बाकी सब कुछ अपने आप ठीक हो जाता है। यही वह चीज है जिसने स्टीव स्मिथ को टेस्ट क्रिकेट में आज का इतना बेहतरीन बल्लेबाज बनाया है।’’

सरनदीप ने पूरे घरेलू सीजन में उन्हें देखा है। रेड-बॉल क्रिकेट में उनकी मेहनत और बिना किसी चकाचौंध वाले प्रैक्टिस सेशन और लंबे इतंजार के बाद मिला फर्स्ट-क्लास डेब्यू। सरनदीप सिंह कहते हैं, ‘‘मेरे हिसाब से वह तीनों फॉर्मेट का खिलाड़ी है। सिर्फ इसलिए कि वह बाउंड्री लगा रहा है और छक्के जड़ रहा है।’’

सिर्फ व्हाइट बॉल खिलाड़ी नहीं हैं प्रियांश

सरनदीप सिंह के मुताबिक, ‘‘उसे सिर्फ व्हाइट-बॉल खिलाड़ी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उसका डिफेंस बहुत मजबूत है। वह सिर्फ हवाई शॉट नहीं खेलता। उसे रेड-बॉल क्रिकेट में ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन जिस तरह की मेहनत वह पर्दे के पीछे कर रहा है, उसे देखते हुए यह बस कुछ ही समय की बात है। एक बार जब वह कोई बड़ी पारी खेल देगा तो उसे रोकना नामुमकिन हो जाएगा।’’

संजय भारद्वाज ने आईपीएल से पहले प्रियांश आर्या को पंजाब के मानसा में एक क्लब टूर्नामेंट में भेजा। उन्होंने थर्ड AC में सफर किया। उन्होंने 28 गेंदों में शतक बनाया। भीड़ को उनका नाम नहीं पता था। इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। संजय भारद्वाज कहते हैं, ‘‘वह ऐसा इंसान नहीं है जो IPL की दौलत देखकर बहक जाए। मेरे लिए यह दिखाता है कि वह लंबी रेस का घोड़ा है। वह बहुत ही विनम्र है और यही तो चाहिए।’’

सरनदीप भी इस बात से सहमत हैं। वह कहते हैं, ‘‘वह लड़का मैदान के बाहर बहुत शांत और चीजों को गौर से देखने वाला है। वह बहुत ही सोच-समझकर खेलने वाला क्रिकेटर है। टैलेंट के मामले में, मैं उसे यशस्वी जायसवाल की ही श्रेणी में रखूंगा।’’

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