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शारीरिक कमजोरी के चलते तीरंदाज बने प्रवीण जाधव, अब टोक्यो में तिरंगा लहराएगा दिहाड़ी मजदूर का बेटा?

पहली बार ओलंपिक खेलने जा रहे प्रवीण जाधव किसी भी प्रकार के दबाव का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘दबाव सभी पर होगा। मैं निशाना सटीक लगाने पर फोकस करूंगा।’

Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: July 20, 2021 6:13 PM
सतारा के प्रवीण जाधव के पास बचपन में दो ही रास्ते थे। या तो पिता के साथ दिहाड़ी मजदूरी करते या बेहतर जिंदगी के लिए ट्रैक पर सरपट दौड़ते। (सोर्स- साई मीडिया)

तीरंदाज प्रवीण जाधव टोक्यो में अपना पहला ओलंपिक खेलेंगे। वह पुरुष रिकर्व (व्यक्तिगत) और पुरुष रिकर्व टीम इवेंट्स में हिस्सा लेंगे। प्रवीण जाधव का जन्म सतारा जिले के फलटन तालुका के एक छोटे से गांव सरडे में हुआ था। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे। इसके चलते प्रवीण को भी उनके कामों में हाथ बंटाना पड़ता था। प्रवीण की बचपन में रुचि एथलेटिक्स में थी, लेकिन शारीरिक कमजोरी के चलते उनके कोच ने उन्हें दूसरा खेल अपनाने की सलाह दी। इसके बाद प्रवीण ने हाथों में धनुष उठा लिया।

प्रवीण जाधव का बचपन बहुत ही मुफलिसी में गुजरा। उनके पास बचपन में दो ही रास्ते थे, या तो अपने पिता के साथ दिहाड़ी मजदूरी करते या बेहतर जिंदगी के लिए ट्रैक पर सरपट दौड़ते, लेकिन उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ओलंपिक में तीरंदाजी जैसे खेल में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। सराडे गांव के इस लड़के का सफर संघर्षों से भरा रहा है। वह अपने पिता के साथ मजदूरी पर जाने भी लगे थे, लेकिन फिर खेलों ने प्रवीण जाधव परिवार की जिंदगी बदल दी। परिवार चलाने के लिए उनके पिता ने कहा कि स्कूल छोड़कर उन्हें मजदूरी करनी होगी। उस समय वह सातवीं कक्षा में थे।

जाधव ने पीटीआई से बातचीत में कहा, ‘हमारी हालत बहुत खराब थी। मेरा परिवार पहले ही कह चुका था कि सातवीं कक्षा में ही स्कूल छोड़ना होगा ताकि पिता के साथ मजदूरी कर सकूं।’ एक दिन जाधव के स्कूल के खेल प्रशिक्षक विकास भुजबल ने उनमें प्रतिभा देखी और एथलेटिक्स में भाग लेने को कहा।

जाधव ने कहा, ‘विकास सर ने मुझे दौड़ना शुरू करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इससे जीवन बदलेगा और दिहाड़ी मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी। मैंने 400 से 800 मीटर दौड़ना शुरू किया।’ हालांकि, शारीरिक रूप से बहुत मजबूत नहीं होने के कारण वह बहुत सफल नहीं हो पाए। इसके बाद विकास भुजबल ने उन्हें कोई दूसरा गेम अपनाने को कहा। कोच की सलाह पर प्रवीण तीरंदाज बन गए।

वह अहमदनगर के क्रीड़ा प्रबोधिनी हॉस्टल में तीरंदाज बने, जब एक अभ्यास के दौरान उन्होंने दस मीटर की दूरी से सभी दस गेंद रिंग के भीतर डाल दीं। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और परिवार के हालात भी सुधर गए। वह अमरावती के क्रीड़ा प्रबाोधिनी गए। बाद में उन्हें बाद में पुणे के सैन्य खेल संस्थान में दाखिला मिला।

उन्होंने पहला अंतरराष्ट्रीय पदक 2016 एशिया कप में कांस्य के रूप में जीता। वह दो साल पहले नीदरलैंड में विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली तिकड़ी में शामिल थे, जिसमें तरुणदीप राय और अतानु दास भी थे। भारत के मुख्य कोच मिम बहादुर गुरंग ने उनके बारे में कहा, ‘वह क्षमतावान हैं। वह हर परिस्थिति में शांत रहते हैं, जो उनकी सबसे बड़ी खूबी है।’

सेना और भारत के पूर्व कोच रवि शंकर ने कहा, ‘वह प्रतिभाशाली और अनुशासित है। उसे लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा।’ पहली बार ओलंपिक खेल रहे जाधव दबाव का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘दबाव सभी पर होगा। मैं निशाना सटीक लगाने पर फोकस करूंगा।’

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