शंकर नारायण। आईपीएल सिर्फ एक क्रिकेट लीग नहीं, बल्कि उन सपनों के सच होने का मंच है, जो बंद कमरों और संघर्षों की भट्टी में पकते हैं। सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाज प्रफुल हिंगे (Praful Hinge) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ डेब्यू मैच के पहले ही ओवर में तीन विकेट चटकाकर रातों-रात सनसनी बने नागपुर के इस लड़के का सफर किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा लगता है।

टी20 क्रिकेट के इतिहास में ऐसा कम ही होता है जब कोई अनजान डेब्यूटेंट अपने पहले ही ओवर में विरोधी टीम की कमर तोड़ दे, लेकिन नागपुर के रहने वाले प्रफुल हिंगे ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ ठीक ऐसा ही किया। उन्होंने 15 साल के इन-फॉर्म वैभव सूर्यवंशी और ध्रुव जुरेल जैसे बल्लेबाजों को एक ही ओवर में पवेलियन भेज दिया।

मंदिर में दंडवत होकर की गई प्रार्थना से लेकर, बहन की रात-रात भर की पढ़ाई और फ्रेंचाइजी की मालकिन काव्या मारन को खुशी से झूमने पर मजबूर कर देने तक प्रफुल हिंगे का ‘ड्रीम डेब्यू’ एक परिवार की वर्षों की खामोश तपस्या का परिणाम है। हालांकि, मैदान पर 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कहर बरपाने वाले इस युवा गेंदबाज का यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। चोट, रिश्तेदारों के तानों और परिवार के त्याग की यह कहानी आपको भावुक कर देगी।

प्रफुल हिंगे ने हैदराबाद में रचा इतिहास

  • सनराइजर्स हैदराबाद के प्रफुल हिंगे ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ पहले ही ओवर में 3 विकेट लिए।
  • नागपुर के रहने वाले प्रफुल ने IPL नीलामी में नाम आने पर मंदिर में दंडवत होकर प्रार्थना की थी।
  • सीए (CA) बहन की पढ़ाई और पिता की सख्ती ने प्रफुल हिंगे का करियर गढ़ने में भूमिका निभाई।

हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में प्रफुल हिंगे इतिहास रच रहे थे और नागपुर में एक मध्यम-वर्गीय परिवार में सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी और एक महिला यह सब होते हुए देख रहे थे।

पिछले मैच में पंजाब किंग्स के खिलाफ टॉस के समय प्रफुल हिंगे को प्लेइंग इलेवन में चुना गया था। उनके डेब्यू का अनाउंसमेंट हुआ। हालांकि, सनराइजर्स हैदराबाद ने 219 रन बनाए और मैनेजमेंट ने अपना मन बदल लिया। जयदेव उनादकट आए और प्रफुल हिंगे बाहर बैठे। कंडीशन, एक्सपीरियंस और T20 क्रिकेट के ‘गणित’ के कारण डेब्यू टल गया।

IPL नीलामी की रात

प्रफुल हिंगे घर गए पास बने एक छोटे से मंदिर में यह देखने के लिए चले गए कि नीलामी में उनका नाम आता है या नहीं। हाथ में फोन, स्क्रीन पर ऑक्शन और सामने भगवान। जब SRH ने उनके लिए बोली लगाई तो उन्होंने फोन नीचे रख दिया और दंडवत हो गए। वह बस वहीं लेटे रहे और भगवान का आभार जताते रहे। उनकी मां रो पड़ीं।

प्रफुल ने अपनी बहन को फोन किया, जो उस समय मुंबई में अपने दफ्तर जाने के लिए लोकल ट्रेन में थी। उन्होंने फोन नहीं उठाया। प्रफुल ने एक संदेश लिखा, हैदराबाद ने मुझे चुन लिया है। जब तक वह घर पहुंची और उन्होंने वीडियो कॉल किया, तब वह भी रो रहीं थी।

सुबह 7 बजे घर से निकलते थे 3 लोग

नागपुर के उस परिवार में हर सुबह 7 बजे तीन लोग घर से निकलते थे। पिता सरकारी कार्यालय के लिए, बहन अपनी CA की पढ़ाई के लिए और प्रफुल मैदान के लिए। उनके पिता भी कभी एक तेज गेंदबाज हुआ करते थे। उनकी विरासत रन और ट्रॉफियां नहीं सिर्फ रफ्तार थी। वह अपने बेटे को क्लब पर छोड़ते और कहते- अब तुम अपने दम पर हो, मुझे अपने दफ्तर पहुंचना है।

यही तय हुआ था। वह लगभग किसी भी मैच में नहीं जाते थे। ऐसा इसलिए नहीं था कि उन्हें कोई परवाह नहीं थी, बल्कि इसलिए कि परवाह करने का उनका तरीका ऐसा ही था। लड़के को आगे बढ़ने देना और खुद पीछे हट जाना। इसकी गवाह प्रफुल की बहन थीं। वह चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की पढ़ाई कर रही थी। आगे चलकर उन्होंने महाराष्ट्र में तीसरा स्थान हासिल किया।

बहन पूरी-पूरी रात पढ़ाई करती थी। प्रफुल उससे लाइट बंद करने को कहते ताकि सो सके; लेकिन वह पढ़ाई जारी रखतीं। प्रफुल सुबह 4 बजे प्रैक्टिस के लिए उठते और बहन तब भी अपनी किताबों के साथ ही होती। लाइट जलती ही रहती। वह मैदान पर चले जाते। यह सिलसिला वर्षों चलता रहा।

19 साल की उम्र में विकेट मिलने लगे। अंडर-19 क्रिकेट में 36 विकेट। फिर कोविड आ गया। उसके बाद MRF पेस फाउंडेशन- छह महीने तक गेंदबाजी नहीं कर पाए। एक अनजान शहर में फिजियो के साथ काम करते रहे, यह पता लगाते रहे कि क्या गड़बड़ हुई थी और उसे ठीक करते रहे। फिर पहली बार विदेश यात्रा (ब्रिस्बेन) पर गए।

तमिलनाडु के खिलाफ रणजी ट्रॉफी का एक मैच जिसका सीधा प्रसारण टेलीविजन पर हो रहा था। उसमें उन्होंने पांच विकेट लिए। इसके कुछ ही समय बाद SRH के ट्रायल के लिए वरुण एरोन का फोन आया। उनसे जो करने को कहा गया उन्होंने वही किया और उन्हें टीम में जगह मिल गई।

SRH के कप्तान इशान किशन मुस्कुरा रहे थे। काव्या मारन पहले ओवर से ही अपनी सीट से उछल पड़ी थीं और इस नजारे को नागपुर में कहीं एक महिला देख रही थी, जो सूरज उगने से पहले टिफिन तैयार कर देती थीं। प्रफुल की मां को क्रिकेट के बारे में तब तक कुछ नहीं पता था, जब तक उन्होंने अपने फोन पर बेटे के स्कोर देखने शुरू नहीं किये थे।

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