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बरी किए जाने के बाद भी पिंकी प्रमाणिक से हो रहा है भेदभाव

कलकत्ता हाई कोर्ट ने नौ महीने पहले ही धावक पिंकी प्रमाणिक को बलात्कार के आरोप से बरी कर दिया था। यह आरोप उन पर एक महिला ने लगाए थे। पिंकी का कहना है कि उनके लिंग को लेकर फैले भ्रम की वजह से वे आज भी भेदभाव का सामना कर रही हैं।

Author Updated: July 6, 2015 8:53 AM
सियालदह रेलवे स्टेशन पर टिकट चेक करतीं पिंकी प्रमाणिक। फोटो : पार्थ पॉल

कलकत्ता हाई कोर्ट ने नौ महीने पहले ही धावक पिंकी प्रमाणिक को बलात्कार के आरोप से बरी कर दिया था। यह आरोप उन पर एक महिला ने लगाए थे। पिंकी का कहना है कि उनके लिंग को लेकर फैले भ्रम की वजह से वे आज भी भेदभाव का सामना कर रही हैं।

जिस दिन हाई कोर्ट ने उन्हें बरी किया था, उसके अगले दिन ही वे एक जोड़ी जूते खरीद कर लाई थीं। हालांकि ट्रैक पर वापसी की पहली औपचारिकता भी उन्होंने पूरी नहीं की थी। उन्हें पहले राज्य समिति में अपने नाम का नवीनीकरण कराना था, जो कि आधिकारिक मान्यता प्राप्त खेल प्रतियोगिता में भाग लेने या छुट्टी लेने या प्रशिक्षण लेने की बुनियादी शर्त है।

उनके नियोक्ता पूर्वी रेलवे ने पिंकी की जनवरी में दी गई उस अर्जी पर अब तक कोई जवाब नहीं दिया है, जिसे उन्होंने वेस्ट बंगाल एथलेटिक एसोसिएशन (डब्लूबीएए) के साथ अपने पंजीकरण के नवीनीकरण और प्रतियोगिताओं में भागे लेने के लिए प्रशिक्षण के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश के लिए दिया था। प्रमाणिक कहती हैं, ‘खेल अधिकारी से करीब छह महीने पहले मैंने जो औपचारिक अनुरोध किया था, उस पर अभी तक मुझे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।’

उन्होंने बताया कि सियालदह मंडल में मुख्य चल टिकट निरीक्षक की नौकरी में उन्हें प्रतिदिन दोपहर दो बजे से रात दस बजे तक काम करना पड़ता है।

पिंकी ने बताया, ‘हालांकि कार्यस्थल पर मेरे साथ हमेशा सम्माजनक व्यवहार किया जाता है। सियालदह रेलवे स्टेशन के मेरे सहयोगियों ने 2012 में हुई मेरी गिरफ्तारी के दौरान और उसके बाद बहुत अधिक सहयोग किया। लेकिन मुझे लगता है कि खेल में वापसी को लेकर मेरे प्रयासों पर मेरे साथ भेदभाव किया जा रहा है। जिस तरह से छिपे तौर पर मेरे साथ भेदभाव होता है, उसमें उल्लेखनीय बात यह है कि मेरे आवेदन की अनदेखी की गई।’

पूर्वी रेलवे की खेल अधिकारी ज्योत्सना मुखर्जी कहती हैं कि पिंकी के आवेदन पर विचार न किए जाने का एक कारण यह कि एथलीट के तौर पर उसका अच्छा समय निकल चुका है। मुखर्जी कहती हैं, ‘हमारे पास पिंकी से कम आयु की तीन या चार लड़कियां हैं। वे अभी बहुत अच्छे फार्म में हैं।

अगर पिंकी विशेष आकस्मिक अवकाश चाहती है तो उन्हें यह साबित करना होगा कि वे अपने वर्ग में पूर्वी रेलवे के एथलीटों में सर्वश्रेष्ठ हैं। उन्हें पुरुलिया जिले का प्रतिनिधित्व निश्चित तौर पर शुरू कर देना चाहिए और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेना चाहिए। अगर वह अच्छा समय निकालती हैं और हमारे मानकों पर खरी उतरती हैं तो हम प्रशिक्षण के लिए उन्हें विशेष आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने पर विचार कर सकते हैं।’

लेकिन डब्लूबीएए के सचिव कमल मित्रा कहते हैं कि जिले का प्रतिनिधित्व करने के लिए भी रेलवे के अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत होगी। वे कहते हैं, ‘वह पूर्वी रेलवे की पंजीकृत एथलीट थी। जब उसने मुझसे संपर्क किया और कहा कि वह खेल में फिर भाग लेना चाहती है तो मैंने उससे कहा कि वह अपने नियोक्ता से एक पत्र लेकर आए। हम उसका एक एथलीट, यहां तक की प्रशिक्षक के रूप में स्वागत करने के लिए उत्सुक है।’

पिंकी राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों की पदक विजेता हैं। वे अपनी पसंदीदा चार सौ और आठ सौ मीटर की दौड़ में वापसी करना चाहती हैं। लेकिन बलात्कार के आरोप और जबरिया लिंग परीक्षण ने उन्हें काफी पीछे ढकेल दिया है। वो कहती हैं, ‘मैं जानती हूं कि उच्च स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मुझे जिलास्तरीय प्रतियोगिताओं में जीतना होगा। लेकिन साल 2006-07 के लिए भारतीय रेल का बेहतरीन खिलाड़ी होने के नाते मैं थोड़े सम्मानित व्यवहार की उम्मीद करती हूं।’

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