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रणजी मैच तटस्थ स्थलों पर, दलीप ट्राफी की क्षेत्रीय प्रणाली खत्म

बैठक में बीसीसीआइ के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के भी मौजूद थे। बीसीसीआइ ने बयान में कहा कि समिति ने 2016-17 सत्र के लिए दलीप ट्राफी के प्रारूप पर चर्चा की।

बंगलुरु | May 30, 2016 2:08 AM
बीसीसीआइ के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर। (पीटीआई फाइल फोटो)

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली की अध्यक्षता वाली बीसीसीआइ की तकनीकी समिति ने सभी रणजी मैचों को आगामी सत्र में तटस्थ स्थलों पर कराने का फैसला किया है जबकि दलीप ट्राफी में अंतर-क्षेत्रीय प्रणाली की जगह चयन पैनल की ओर से अखिल भारतीय स्तर पर चुनी गई चार टीमों को लिया जाएगा। बैठक में बीसीसीआइ के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के भी मौजूद थे। बीसीसीआइ ने बयान में कहा कि समिति ने 2016-17 सत्र के लिए दलीप ट्राफी के प्रारूप पर चर्चा की। यह सिफारिश की गई कि चयनकर्ता राउंड रोबिन प्रारूप के टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए चार टीमों को चुनेंगे। पूरा टूर्नामेंट दिन-रात्रि का होगा। भारतीय टीम न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर करीब 13 टेस्ट मैच खेलेगी तो ठाकुर ने प्रस्ताव दिया कि टेस्ट के सभी संभावितों और युवा खिलाड़ियों को गुलाबी गेंद का आदी होने का मौका दिया जाएगा।

तकनीकी समिति के एक सदस्य ने रविवार को बताया कि अध्यक्ष को लगता है कि चैलेंजर ट्राफी की तरह इस सत्र की दलीप ट्राफी में सभी बड़े खिलाड़ियों और टैस्ट संभावितों को रात में दूधिया रोशनी में गुलाबी गेंद से खेलने का मौका मिले। इसलिए यह फैसला किया गया कि इस बार कोई क्षेत्रीय प्रणाली नहीं होगी।

पता चला है कि गांगुली ने दलीप ट्राफी में स्तरीय विदेशी टीम को खिलाने का सुझाव दिया लेकिन इसके पक्ष में फैसला नहीं हो पाया। सूत्र ने कहा कि गांगुली के प्रस्ताव पर विचार किया गया लेकिन इसके बाद हमें लगा कि मान लीजिए अगर हम आस्ट्रेलिया की प्रथम श्रेणी टीम को बुलाते हैं और वे नाकआउट प्रारूप में पहले दौर में हार जाते हैं तो उन्हें बुलाने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। पता चला है कि सभी मैच कूकाबूरा गेंद से खेले जाएंगे लेकिन दिन-रात्रि मैचों के लिए गुलाबी गेंद तैयार करने के लिए कुछ अन्य खेल सामग्री निर्माण कंपनियों से भी बात चल रही है।

इसके अलावा जो बड़ा फैसला किया गया वह यह है कि रणजी ट्राफी मैच तटस्थ स्थानों पर होंगे। बयान में कहा गया कि घरेलू क्रिकेट को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और घरेलू टीमों के लिए विशेष तरह का विकेट तैयार करने से जुड़े मुद्दों को खत्म करने व खिलाड़ियों को विभिन्न हालात में खिलाने की कवायद के तहत बीसीसीआइ की तकनीकी समिति ने रणजी ट्राफी मैच तटस्थ स्थान पर कराने की सिफारिश की है। रणजी ट्राफी को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इस कदम की सिफारिश की गई है।

पता चला है कि कुछ सदस्य टास नहीं कराने की नई प्रणाली को आजमाना चाहते थे जिसके इस बार इंग्लिश काउंटी सत्र में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें मेहमान टीम को पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनने का विकल्प दिया जाता है। बहुमत से हालांकि तटस्थ स्थान पर खेलने के पक्ष में फैसला किया गया। तकनीकी समिति के एक सदस्य ने कहा कि लंबे समय से शिकायत रही है कि घरेलू टीमें पिचों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करती हैं। इसके लिए दो विकल्प थे। टास कराना बंद कर दिया जाए या तटस्थ स्थानों पर मैच हों। अधिकांश लोगों को मानना था कि तटस्थ स्थान बेहतर विकल्प है। साथ ही इसका मतलब होगा कि युवा क्यूरेटर पर कभी घरेलू टीम के कप्तान का कोई दबाव नहीं होगा। बयान में यह भी कहा गया कि समिति ने साथ ही अगस्त में दो चार दिवसीय मैचों और त्रिकोणीय शृंखला के लिए भारत ‘ए’ के आस्ट्रेलिया दौरे को भी मंजूरी दे दी है। बीसीसीआइ साथ ही न्यूजीलैंड क्रिकेट (एनजेडसी) से बात करेगा जिससे कि ‘ए’ टीम वहां का दौरा कर सके।

भारत ‘ए’ टीम ने पिछली बार 2012 में न्यूजीलैंड का दौरा किया था। इन सिफारिशों को अब बीसीसीआइ की कार्य समिति के समक्ष रखा जाएगा। एनसीए समिति की बैठक में सदस्यों को चल रहे विभिन्न आयु वर्गों के क्षेत्रीय शिविरों के आकलन और अंपायरों के रिफ्रेशर कोर्स के बारे में जानकारी दी गई। सदस्यों को एनसीए की ओर से अगले महीने कराए जाने वाले फिजियोथेरेपिस्ट और ट्रेनर के कोर्स की जानकारी भी दी गई। इस कोर्स में सभी राज्य संघों के फिजियो और ट्रेनर हिस्सा लेंगे।

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