लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में हुई 4 घंटे की बैठक में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) का असली चेहरा बेनकाब हो गया। कोलंबो में 15 फरवरी को भारत से होने वाले मैच का ‘बहिष्कार’ करने की धमकी देकर पाकिस्तान अब आईसीसी से सौदेबाजी करने पर उतर आया है। बांग्लादेश की सुरक्षा चिंताओं को ढाल बनाकर PCB अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने न सिर्फ वित्तीय मुआवजे की मांग की, बल्कि भविष्य के टूर्नामेंट्स की मेजबानी का आश्वासन भी मांगा। हालांकि, आईसीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों के उल्लंघन पर पाकिस्तान की सदस्यता रद्द की जा सकती है।
चार घंटे की बैठक बेनतीजा
पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने रविवार आठ फरवरी 2026 को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के साथ एक बैठक की। बैठक में पाकिस्तान के उस फैसले पर चर्चा हुई जिसमें उसने 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के भारत के साथ मैच का बहिष्कार करने की ‘गीदड़ भभकी’ दी थी। हालांकि, चार घंटे चली बैठक के बाद संयुक्त रूप से कोई बयान नहीं जारी किया गया।
सरकार से मंजूरी के बाद ही करेंगे ऐलान
रिपोर्ट में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के सूत्रों के हवाले से लिखा गया, ‘दोनों पक्ष पाकिस्तान सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही कोई ऐलान करेंगे।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईसीसी के पास बांग्लादेश को मुआवजे के तौर पर देने के लिए कुछ नहीं था, सिवाय इसके कि यह सुनिश्चित किया जाए कि उसे आईसीसी की कमाई से पूरा हिस्सा मिले।
ICC आर्बिट्रेशन कमेटी में रखे अपना पक्ष PCB
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ICC (आईसीसी) के डिप्टी चेयरपर्सन इमरान ख्वाजा ने PCB (पीसीबी) को सलाह दी कि वह तुरंत भारत बनाम पाकिस्तान मैच का बहिष्कार खत्म करे, क्योंकि यह क्रिकेट के लिए अच्छा नहीं है। यदि उसे कोई दिक्कत है तो वह अपना मामला आईसीसी आर्बिट्रेशन कमेटी के सामने रखे या आईसीसी बोर्ड मीटिंग के दौरान उठाए।’
बांग्लादेश की आड़ लेकर पीसीबी ने रखीं तीन मांगें
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, पीसीबी ने आईसीसी के साथ जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। सूत्रों के अनुसार, पीसीबी ने आईसीसी पदाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान गतिरोध तोड़ने के लिए तीन मांगें रखीं। (1) बांग्लादेश के लिए मुआवजे में वृद्धि। (2) टी20 विश्व कप से बाहर होने के बावजूद बांग्लादेश के लिए भागीदारी शुल्क। (3) भविष्य के आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी के अधिकार।
PVB के कुछ पदाधिकारी चाहते हैं भारत-पाक मैच
रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने खुलासा किया कि पीसीबी के कुछ पदाधिकारी भारत के खिलाफ 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले मैच को खेलने के लिए तैयार हैं, लेकिन पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी इस मामले में सहयोग नहीं कर रहे। मोहसिन नकवी अंतिम निर्णय लेने से पहले सोमवार नौ फरवरी 2026 को फिर पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ से मुलाकात करने वाले हैं।
‘पाकिस्तान: बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’
आईसीसी ने पिछले महीने बांग्लादेश को टी20 विश्व कप से बाहर कर दिया था, क्योंकि उसने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए भारत की यात्रा करने से इनकार कर दिया था। आईसीसी के आश्वासन के बावजूद (टीम के लिए कोई खतरा नहीं था) बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) अपने रुख पर अड़ा रहा। इस कारण आईसीसी को टूर्नामेंट में उसकी जगह स्कॉटलैंड को लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बाद में पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक X हैंडल पर कहा गया कि मेन इन ग्रीन (पाकिस्तान क्रिकेट टीम) 15 फरवरी के मैच में मैदान पर नहीं उतरेंगे। शहबाज शरीफ ने इस बहिष्कार को बांग्लादेश के साथ विवाद से जोड़ा और इसे एकजुटता का प्रतीक बताया।
अलग से भी मिले नकवी और इस्लाम
आईसीसी की बैठक के अलावा मोहसिन नकवी और पीसीबी के अन्य पदाधिकारियों ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के प्रमुख अमीनुल इस्लाम बुलबुल से भी बातचीत की। इस बीच आईसीसी ने PCB से पूछा है कि उसने ‘फोर्स मेज्योर’ घटना (ऐसी परिस्थितियां जो किसी को करार पूरा करने से रोकती हैं) को कम करने के लिए क्या किया है, क्योंकि यह सदस्य भागीदारी समझौते (MPA) के लिए जरूरी है।
ESPNCricinfo के अनुसार, ICC को PCB से ईमेल मिला था जिसमें बहिष्कार के कारण के तौर पर सरकारी आदेशों का हवाला दिया गया था, जो टूर्नामेंट शुरू होने से 10 दिन से भी कम समय पहले आया। माना जाता है ICC के पास ऐसे अधिकार हैं जिनके तहत ‘फोर्स मेज्योर’ और टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने के लिए जरूरी सबूतों की सीमा तथा खेल, वाणिज्यिक और शासन संबंधी प्रभाव का इस्तेमाल कानूनी तौर पर किया जा सकता है।
ICCने PCB को संभावित भौतिक नुकसान के बारे में भी सूचित किया जो मैच न होने पर हो सकता है। वैश्विक गवर्निंग बॉडी कोई टकराव नहीं चाहती है, लेकिन अपने संविधान के तहत, अगर दायित्वों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन होता है तो वह सदस्यता के निलंबन/समाप्ति के साथ आगे बढ़ सकती है।
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