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कश्यप के लिए आसान नहीं होगी रियो ओलंपिक की राह

कश्यप ने कहा कि एक बार में एक टूर्नामेंट पर ध्यान दे रहा हूं। पिछले कुछ महीनों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए आज से आगे के बारे में नहीं सोच सकता

Author नई दिल्ली | February 29, 2016 12:38 AM
भारत के टॉप शटलर पी कश्यप (फाइल फोटो)

चोटों से जूझने के बाद फिटनेस हासिल कर चुके बैडमिंटन स्टार पारूपल्ली कश्यप की नजरें रियो ओलंपिक पर टिकी हैं लेकिन खेलों के महाकुंभ में क्वालीफाई करने के लिए उनके पास ज्यादा समय नहीं है। कश्यप बुधवार को जर्मन ग्रां प्री गोल्ड के साथ यूरोपीय सर्किट पर तीन टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगे। उन्हें आल इंग्लैंड चैंपियनशिप (आठ से 13 मार्च) और स्विस ग्रां प्री गोल्ड (15 से 20 मार्च) में भी हिस्सा लेना है।

जर्मन ओपन के पहले दौर में यूक्रेन के आर्तेम पोचतारेव से भिड़ने वाले कश्यप से कहा कि चार महीने की कड़ी ट्रेनिंग और रिहैबिलिटेशन के बाद अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर वापसी से मैं काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं। इसके बाद आल इंग्लैंड ओपन और स्विस ओपन होगा। उन्होंने कहा कि मैं हैदराबाद में बीएसी में नहीं खेला था, मैं उस समय ट्रेनिंग कर रहा था। मैं पहले मैच में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं और उसके बाद चीजें अपने आप ठीक हो जाएंगी। मैं अपनी तैयारी से खुश हूं। दो महीने पहले की स्थिति को देखते हुए मैं अब नए स्तर पर पहुंच गया हूं।

कश्यप ने कहा कि एक बार में एक टूर्नामेंट पर ध्यान दे रहा हूं। पिछले कुछ महीनों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए आज से आगे के बारे में नहीं सोच सकता। मुझे आगामी सत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद के लिए शुभकामनाओं की जरूरत है। एक समय दुनिया के आठवें नंबर के खिलाड़ी रहे कश्यप चोटों के बाद अब 17वें स्थान पर खिसक गए हैं। इस भारतीय खिलाड़ी को पिछले साल अक्तूबर में पिंडली की मांसपेशियों में चोट लगी। वे सैयद मोदी ग्रां प्री में खेले लेकिन अपने खिताब की रक्षा नहीं कर पाए और पेट की मांसपेशियों में खिंचाव के बाद क्वार्टर फाइनल से बाहर हो गए।

कश्यप को गुवाहाटी और शिलांग में इस महीने हुए दक्षिण एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में शामिल किया था लेकिन भारतीय बैडमिंटन संघ और भारतीय खेल प्राधिकरण को लगातार आग्रह करने के बाद उन्हें टीम से हटा दिया गया। कश्यप ने इसके बाद हैदराबाद में बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में भी हिस्सा नहीं लिया। अब ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए सिर्फ आठ हफ्ते का समय बचा है और ऐसे में उनकी राह आसान नहीं होगी।

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