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पकिस्तान के साथ क्रिकेट सीरीज नहीं खेलेगा भारत

सोमवार को पंजाब के गुरदासपुर में हुए आतकंवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज की बहाली खटाई में पड़ गई है।पाकिस्तान के साथ हुए करार के मुताबिक इस साल के अंत में भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सीरीज यूएई में खेली जानी थी।

Author July 29, 2015 1:01 PM
भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट बहाली के आसार फिलहाल तो संभव नहीं दिखता है।

सोमवार को पंजाब के गुरदासपुर में हुए आतकंवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज की बहाली खटाई में पड़ गई है।

पाकिस्तान के साथ हुए करार के मुताबिक इस साल के अंत में भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सीरीज यूएई में खेली जानी थी।

लेकिन सोमवार के हमले के बाद सीरीज खटाई में पड़ गई है। मौजूदा हालात में केंद्र सरकार सीरीज कराने का जोखिम मोल नहीं ले सकती। यों भी केंद्र सरकार क्रिकेट को लेकर विवादों में घिरी है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव अनुराग ठाकुर ने भी साफ कर दिया है कि क्रिकेट देश से ज्यादा महत्त्वपूर्ण नहीं है। मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच क्रिकेट सीरीज के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।

इस माहौल में भारत-पाक क्रिकेट होना तो नामुमकिन

भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट बहाली के आसार फिलहाल तो संभव नहीं दिखता है। कुछ महीने पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष शहरयार खान ने दोनों देशों के बीच क्रिकेट बहाली के प्रयास तेज किए थे और उम्मीद जगी थी कि इस साल के अंत में भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सीरीज शुरू हो।

हालांकि तब भी कई सवाल सामने थे। दोनों देशों के सियासी रिश्तों को लेकर तो सवाल था ही, सरहद के उस पार से पाकिस्तान का रवैया कैसा रहता है, इसे लेकर भी कई तरह की पेचीदगियां थीं। एक तो यह भी कि पाकिस्तान घरेलू सीरीज का आयोजन कहां करता है। तब उसने भारत को यह भी प्रस्ताव दिया था कि वह पाकिस्तान की घरेलू सीरीज का आयोजन कर सकता है। श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हमले के बाद पाकिस्तान के लिए अपने देश में क्रिकेट का आयोजन करना एक मसला बना हुआ है और उसके घरेलू सीरीज खाड़ी देशों में होने लगे हैं।

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हाल में जिंबाब्वे टीम को बुला कर पाकिस्तान ने इस बात की कोशिश जरूर की कि विश्व संस्था को बताएं कि हालाता अब सामान्य है। लेकिन इन कोशिसों के बावजूद कोई देश पाकिस्तान जाना नहीं चाहता। भार-पाक मैचों को लेकर भी यह मसला उठा था। यों भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबले के लिए बांग्लादेश ने भी मेजबान बनने की पेशकश की थी। लेकिन वह उस सूरत में ही मुमकिन हो सकता था जब सरहद पार से न तो घुसपैठ हो और न ही बंदूकें गरजें।

लेकिन दिक्कत यह है कि पाकिस्तान लगातार कुछ न कुछ ऐसा करता रहा है जिस से रिश्ते बनते-बनते बिगड़ जाते हैं। भारत के साथ पाकिस्तान को अगर क्रिकेट संबंध बहाल करना है तो जरूरत पहले अपने हुक्मरानों के सोच को बदलने की है। नफरत और मोहब्बत एक साथ नहीं हो सकती। इसी वजह से पटरी पर आने के बाद फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।

सोमवार को पंजाब के गुरदासपुर में आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट बहाली की कोशिशों को झटका लगा है। जो सबूत सामने आए हैं, उससे साफ हो गया है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई। गुरदासपुर में इस हमले में एक पुलिस अधीक्षक सहित छह लोगों की जान गई। हमले के बाद ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने साफ कर दिया कि सि माहौल में दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध बहाल करना नामुमकिन है। हालांकि पीसीबी संबंध बहाली को लेकर अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश में जुटा था।

शहरयार खान भारत आकर बीसीसीआइ के अध्यक्ष जगमोहन डालमिया और सचिव अनुराग ठाकुर से मिले थे। दोनों से मुलाकात के बाद शहरयार खान ने इस साल के अंत में क्रिकेट सीरीज शुरू होने की उम्मीद जताई थी। शहरयार खान ज्यादा उत्साहित थे। बीसीसीआए ने सकारात्मक संकेत जरूर दिए थे लेकिन सीरीज को लेकर किसी तरह का फैसला तब भी नहीं किया गया था। ताजा घटना के बाद तो एक तरह से इन पर विराम ही लग गया है। खान ने इस साल मई में कोलकाता में डालमिया से मुलाकात की थी और इस साल दिसंबर में यूएई में तीन टैस्ट, पांच वनडे और दो टी20 मैचों की सीरीज का प्रस्ताव रखा था। यह सीरीज दोनों देशों के बीच सहमति पत्र का हिस्सा थी। भारत ने 2008 मुंबई में आतंकवादी हमले के बाद से पाकिस्तान के साथ पूर्ण द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेली है। पाकिस्तान ने हालांकि दिसंबर 2012 में दो टी20 और तीन वनडे मैचों की सीरीज के लिए भारत का दौरा किया था।

साफ है कि जब तक दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर नहीं होंगे, क्रिकेट के संबंध भी बहाल नहीं होंगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इस स्थिति में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने के लिए किसी भी सूरत में तैयार नहीं होगा। निष्पक्ष देश में भी नहीं। भारत में तो पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के खेलने का सवाल ही नहीं है और भारत दूसरे देश में खेलने के लिए तैयार नहीं होगा। दरअसल केंद्र सरकार के लिए क्रिकेट खेल से ज्यादा सियासत का मुद्दा है।

सियासी नफा-नुकसान के तराजू में तौल कर ही वह पाकिस्तान के साथ क्रिकेट बहाली का फैसला लेगी। और अभी जो हालात हैं वहां क्रिकेट खेलने से ज्यादा नहीं खेलना उसके पक्ष में जाता है। एक फैसला केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा कर सकता है और क्रिकेट को लेकर ही विवादों से घिरी केंद्र सरकार फिलहाल दूसरे विवाद में पड़ना नहीं चाहेगी। इसलिए भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट बहाली अभी दूर की कौड़ी लगती है।

अनुराग ठाकुर ने साफ भी किया है कि भारतीयों की जीवन से ज्यागा महत्त्वपूर्ण क्रिकेट नहीं है और फिर क्रिकेट देश से बड़ा नहीं होता है। ठाकुर के इस रुख से ही साफ हो गया था कि जिन रिश्तों की डोर को शहरायर खान मजबूत बनाने चले थे, उनके देश के हुक्मरां उस डोर को मजबूत नहीं बनाना चाहते। हर खेल प्रेमी चाहेगा कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट हो लेकिन इस तरह के माहौल में नहीं।

हालात में जब तक सुधार नहीं होता, तब तक दोनों देशों के बीच क्रिकेट तो नामुमकिन ही लगता है। जरूरत इस बात की है दोनों देशों के बीच सियासी हालात बेहतर हों और मसलों को सुलझाया जाए, तभी क्रिकेट भी होगा और रिश्ते भी बेहतर बनेंगे। इस मामले में पहल पाकिस्तान को करनी होगी। लेकिन पाकिस्तान से किसी बेहतरी की उम्मीद तो नहीं ही की जा सकती।

 

फ़ज़ल इमाम मल्लिक

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